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एमपी: सीएम यादव बोले- कांग्रेस सरकार का 27% ओबीसी आरक्षण का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की समीक्षा करेंगे

Fri, 09 Oct 2026 10:54 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Fri, 09 Oct 2026 10:54 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। सीएम ने आरक्षण के प्रावधानों को कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण बताते हुए कहा कि राज्य सरकार फैसले का विधिक परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी।

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MP: CM Yadav Calls Congress's OBC Quota Notification Flawed, Says Government Will Review Legal Gaps
सीएम मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी और इसके प्रावधानों में गंभीर कानूनी खामियां थीं। राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्णय का विधिक परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 से 2022 के बीच की गई नियुक्तियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। उनके मुताबिक, न्यायालय ने 13 प्रतिशत अतिरिक्त नियुक्तियों को संरक्षण देते हुए आगामी भर्ती में समायोजित करने का निर्देश दिया है। वहीं, वर्ष 2022 के बाद से फैसले की तारीख तक की गई भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए हैं। 
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कांग्रेस सरकार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सीएम मोहन यादव ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के जरिए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी। उनके अनुसार, इस संबंध में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी परामर्श नहीं लिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से तत्कालीन सरकार की प्रक्रिया और आरक्षण लागू करने के तरीके पर सवाल उठे हैं। 
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विधिक परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले का विधिक परीक्षण करेगी और इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ओबीसी आरक्षण के मामले में फैसले के प्रभाव और राज्य सरकार के अगले कदम को लेकर अब कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। 

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