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मध्यप्रदेश: बालाघाट में बीमारी के बीच 57 मेडिकल टीमों का ऑपरेशन, 50 गांवों में 43 हजार लोगों की जांच

Wed, 30 Sep 2026 09:22 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Wed, 30 Sep 2026 09:22 PM IST
सार

बालाघाट के बिरसा इलाके में बच्चों के बीमार पड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया। 57 मेडिकल टीमों ने 50 गांवों में पहुंचकर 43 हजार से ज्यादा लोगों की जांच की और इलाज शुरू कराया।

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MP: 57 Medical Teams Deployed in Balaghat, Over 43,000 People Screened Across 50 Villages
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बालाघाट के दुर्गम इलाकों में बच्चों के अचानक बीमार पड़ने की सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया। जुलाई के दूसरे सप्ताह में बिरसा विकासखंड के कुछ गांवों में बच्चों को बुखार और दाने की शिकायत सामने आने के बाद जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल टीमें सक्रिय की गईं। भारी बारिश और मुश्किल रास्तों के बावजूद स्वास्थ्यकर्मी प्रभावित गांवों तक पहुंचे और जांच व उपचार शुरू किया। अभियान के दौरान 57 स्वास्थ्य टीमों ने 50 गांवों में 43,451 लोगों की जांच की। इनमें 6,537 लोगों का घर पर ही इलाज किया गया, जबकि गंभीर स्थिति वाले 647 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्चों में खसरा-रूबेला की रोकथाम के लिए बिरसा विकासखंड में 35,827 बच्चों का टीकाकरण कराया गया।
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मलेरिया की भी हुई जांच
बीमारी के साथ मलेरिया की स्थिति की भी जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग ने 26,865 लोगों की मलेरिया जांच की, जिसमें 980 लोग संक्रमित मिले। सभी संक्रमितों का उपचार शुरू कराया गया। प्रभावित क्षेत्रों में 8,610 घरों में कीटनाशक का छिड़काव और फॉगिंग कराई गई, जबकि 3,600 मच्छरदानियां बांटी गईं। दस्त से बचाव के लिए 1.63 लाख से ज्यादा परिवारों को ओआरएस और जिंक के पैकेट दिए गए। प्रशासन ने बीमारी की रोकथाम के साथ इसके संभावित कारणों, दूषित पानी और ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज से जुड़ी समस्याओं पर भी काम किया। 
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स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर
अभियान के साथ जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कई फैसले लिए गए। बैहर, बिरसा और कटंगी में गंभीर रूप से बीमार गर्भवती महिलाओं और बच्चों के सुरक्षित परिवहन के लिए 3.60 लाख रुपये दिए गए। टीकों के सुरक्षित परिवहन के लिए 3.40 लाख रुपये अतिरिक्त मंजूर किए गए। जिले के 22 उप-स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत के लिए 1.93 करोड़ रुपये और जरूरी उपकरणों के लिए 24 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। घुम्मुर उप-स्वास्थ्य केंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बदलने के लिए 66 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। जिले में 54 नए डॉक्टरों की पदस्थापना भी की गई है। 

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23 साल में टीकाकरण और संस्थागत प्रसव में बड़ा बदलाव
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बालाघाट में पिछले 23 वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं में भी बदलाव आया है। वर्ष 2003 में संस्थागत प्रसव 21.50 प्रतिशत था, जो 2026 में बढ़कर 92.10 प्रतिशत हो गया। सुरक्षित प्रसव 41.50 से बढ़कर 94.10 प्रतिशत और बच्चों का पूर्ण टीकाकरण 47.50 से बढ़कर 92.70 प्रतिशत बताया गया है। सरकार के अनुसार इसी अवधि में मातृ मृत्यु के मामले करीब 176 से घटकर 60 और शिशु मृत्यु के मामले करीब 3,805 से घटकर 1,560 रह गए हैं। प्रशासन का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, टीकाकरण और संस्थागत प्रसव बढ़ने से यह सुधार हुआ है।

 
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