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एमपी के 35 बांध 90 फीसदी से ज्यादा भरे, पश्चिमी हिस्से में 12 फीसदी बारिश कम; रबी के जल प्रबंधन की तैयारी

Wed, 30 Sep 2026 10:06 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Wed, 30 Sep 2026 10:06 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में सामान्य से कम बारिश के बावजूद प्रमुख बांधों में पर्याप्त पानी है। 54 बड़े बांधों में औसतन 89.32 फीसदी जलभराव के बीच रबी सीजन की सिंचाई और पेयजल जरूरतों के लिए जल बजट तैयार किया जाएगा।

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MP: 35 Dams Over 90% Full, Western Region Gets 12% Less Rain; Rabi Water Planning Begins
सांकेतिक फोटो

विस्तार

प्रदेश में इस मानसून अब तक औसत से करीब चार फीसदी कम बारिश हुई है, लेकिन प्रमुख जलाशयों में पानी की स्थिति फिलहाल संतोषजनक है। प्रदेश के 54 प्रमुख बांधों में औसतन 89.32 फीसदी जलभराव दर्ज किया गया है। इनमें 35 बांध 90 फीसदी से अधिक भर चुके हैं। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने इन बांधों की लगातार निगरानी और जलस्तर के अनुसार पानी की निकासी पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बुधवार को प्रदेश में बारिश और जलाशयों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से रबी सीजन की सिंचाई और पेयजल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध पानी का बेसिन और परियोजना स्तर पर आकलन करने को कहा है। प्रदेश में अब तक 908.30 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश 949.50 मिलीमीटर है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में स्थिति ज्यादा कमजोर रही है। यहां 773.60 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 12 फीसदी कम है। इसके विपरीत पूर्वी मध्य प्रदेश में 1083.60 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य से चार फीसदी अधिक है। 
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गंगा बेसिन में सबसे ज्यादा पानी
बेसिनवार आंकड़ों में गंगा बेसिन के जलाशयों में 99 फीसदी, नर्मदा में 95 और यमुना बेसिन में 94 फीसदी जलभराव है। चंबल-बेतवा और सागर बेसिन में 82-82 फीसदी, नर्मदापुरम में 81, वैनगंगा में 80, उज्जैन में 71 और नर्मदा-ताप्ती बेसिन में 57 फीसदी जलभराव दर्ज किया गया है। पश्चिमी हिस्से में कम बारिश को देखते हुए उज्जैन और नर्मदा-ताप्ती क्षेत्र के जल संसाधनों की विशेष समीक्षा की जाएगी। रबी सीजन के लिए सिंचाई और पेयजल की जरूरत के मुताबिक जल बजट तैयार होगा और किसानों को संभावित सिंचाई जल उपलब्धता की जानकारी पहले से देने की योजना है। वहीं, अधिक भरे बांधों के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमों के साथ समन्वय बनाए रखने को कहा गया है। मानसून के बाद बांध, नहर और जल वितरण प्रणालियों के निरीक्षण के साथ जरूरी मरम्मत की योजना भी तैयार की जाएगी। 
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