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रीवा में मां-बच्चे की मौत पर बड़ा एक्शन: 2 डॉक्टर और 2 नर्सिंग ऑफिसर सस्पेंड, जांच कमेटी गठित
Fri, 28 Aug 2026 09:11 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 28 Aug 2026 09:11 PM IST
सार
रीवा में गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में दो डॉक्टर और दो नर्सिंग ऑफिसरों को निलंबित किया गया है। परिजनों की शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों की कमेटी बनाई गई है। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।
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डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रीवा के गांधी स्मारक चिकित्सालय में गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते दो डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, दुर्व्यवहार की शिकायत के आधार पर दो नर्सिंग ऑफिसरों पर भी निलंबन की कार्रवाई हुई है। मामले की पूरी जांच के लिए वरिष्ठ चिकित्सकों की समिति बनाई गई है। मृतका कल्पना मिश्रा, निवासी ग्राम हटवा, जिला रीवा को 26 अगस्त की सुबह करीब 2:38 बजे गांधी स्मारक चिकित्सालय के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उसी दिन रात करीब 11:55 बजे महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई।
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भर्ती के समय हालत गंभीर थी
अस्पताल के चिकित्सकीय रिकॉर्ड के अनुसार महिला की हालत भर्ती के समय ही गंभीर थी। उसका प्लेटलेट काउंट करीब 30 हजार प्रति माइक्रोलिटर था। ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ था और लीवर एंजाइम भी बढ़े हुए मिले थे। जांच में महिला को टर्म प्रेग्नेंसी के साथ गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपीनिया और हेल्प सिंड्रोम की स्थिति बताई गई थी। अस्पताल के अनुसार निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत इलाज और जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं शुरू की गई थीं।
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परिजनों की शिकायत के बाद कार्रवाई
महिला के परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए वरिष्ठ चिकित्सकों की समिति गठित की गई। प्रारंभिक स्तर पर डॉ. सोनल अग्रवाल, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग और डॉ. निधि पाण्डेय, निश्चेतना विभाग को कार्य में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किया गया है। वहीं, नर्सिंग स्टाफ से जुड़े दो कर्मचारियों पर परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है।
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पोस्टमार्टम के बाद शव गांव भेजे गए
परिजनों की मांग पर महिला और उसके गर्भस्थ शिशु का पोस्टमार्टम कराया गया। यह प्रक्रिया जिला चिकित्सालय और चिकित्सा महाविद्यालय की संयुक्त टीम ने पूरी की। जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों शवों को शव वाहन से उनके गृह ग्राम भेज दिया गया।
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जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मामले को गंभीर मानते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मरीज और उनके परिजनों के साथ सम्मानजनक व्यवहार के साथ इलाज के तय प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दास्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद मामले में तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
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भर्ती के समय हालत गंभीर थी
अस्पताल के चिकित्सकीय रिकॉर्ड के अनुसार महिला की हालत भर्ती के समय ही गंभीर थी। उसका प्लेटलेट काउंट करीब 30 हजार प्रति माइक्रोलिटर था। ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ था और लीवर एंजाइम भी बढ़े हुए मिले थे। जांच में महिला को टर्म प्रेग्नेंसी के साथ गंभीर प्री-एक्लेम्पसिया, गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपीनिया और हेल्प सिंड्रोम की स्थिति बताई गई थी। अस्पताल के अनुसार निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत इलाज और जरूरी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं शुरू की गई थीं।
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परिजनों की शिकायत के बाद कार्रवाई
महिला के परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए वरिष्ठ चिकित्सकों की समिति गठित की गई। प्रारंभिक स्तर पर डॉ. सोनल अग्रवाल, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग और डॉ. निधि पाण्डेय, निश्चेतना विभाग को कार्य में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किया गया है। वहीं, नर्सिंग स्टाफ से जुड़े दो कर्मचारियों पर परिजनों के साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है।
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पोस्टमार्टम के बाद शव गांव भेजे गए
परिजनों की मांग पर महिला और उसके गर्भस्थ शिशु का पोस्टमार्टम कराया गया। यह प्रक्रिया जिला चिकित्सालय और चिकित्सा महाविद्यालय की संयुक्त टीम ने पूरी की। जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों शवों को शव वाहन से उनके गृह ग्राम भेज दिया गया।
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जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मामले को गंभीर मानते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मरीज और उनके परिजनों के साथ सम्मानजनक व्यवहार के साथ इलाज के तय प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दास्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद मामले में तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
