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शिक्षक अभ्यर्थियों का एक माह से धरना: मांग पर फैसला नहीं, नरेंद्र 9 दिन से निर्जल अनशन पर, बिगड़ रही तबीयत

Sat, 19 Sep 2026 03:59 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 19 Sep 2026 03:59 PM IST
सार

वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर डीपीआई के सामने अभ्यर्थियों का आंदोलन 30वें दिन पहुंच गया है। ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत का निर्जल अनशन नौवें दिन भी जारी है। बारिश के बीच रात तक धरना चल रहा है, जबकि अभ्यर्थी 10 हजार और 25 हजार अतिरिक्त पदों के साथ दूसरी काउंसलिंग की मांग कर रहे हैं।

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Teacher candidates' sit-in enters second month: No decision on demands; Narendra on a fast without water for 9
निर्जल अनशन के नौवें दिन नरेंद्र राजपूत बिगड़ी तबीयत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन शनिवार को 30वें दिन पहुंच गया। डीपीआई के सामने अभ्यर्थियों का धरना पूरे एक महीने से जारी है। इसी बीच राजगढ़ के ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत का निर्जल अनशन भी नौवें दिन जारी है। आंदोलनकारियों का दावा है कि पानी नहीं पीने के कारण नरेंद्र की तबीयत लगातार बिगड़ रही है और वह बार-बार बेहोश हो रहे हैं। अभ्यर्थियों के मुताबिक, उन्होंने नरेंद्र को अनशन खत्म करने के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी हालत को देखते हुए किसी भी समय स्थिति गंभीर हो सकती है।
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बारिश में भी रात तक जारी रहा धरना
एक महीने से चल रहे आंदोलन के बीच बारिश ने अभ्यर्थियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। आंदोलनकारियों ने बताया कि गुरुवार-शुक्रवार की रात करीब डेढ़ बजे तक डीपीआई के सामने धरना जारी रहा। लगातार बारिश के कारण धरना स्थल पर सोना मुश्किल हो रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई लोग रात में ठीक से आराम तक नहीं कर पा रहे हैं। आंदोलनकारियों ने कहा कि रात में भी बारिश के बीच वे अपनी मांग को लेकर डटे हुए हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से आंदोलन चलने के बावजूद अभी तक पद बढ़ाने को लेकर कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।
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नरेंद्र ने जिम्मेदारी तय करने की बात कही
आंदोलनकारियों के अनुसार, नरेंद्र राजपूत पहले ही कह चुके हैं कि उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी डीपीआई आयुक्त अभिषेक सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की होगी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि नौ दिन से निर्जल अनशन पर बैठे नरेंद्र की तबीयत बिगड़ने के बावजूद उनकी समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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10 हजार और 25 हजार पद बढ़ाने की मांग
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग वर्ग-2 में कम से कम 10 हजार और वर्ग-3 में कम से कम 25 हजार पद बढ़ाने की है। इसके साथ ही वे दूसरी काउंसलिंग शुरू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती में पद सीमित होने के कारण परीक्षा में सफल कई अभ्यर्थियों को चयन का अवसर नहीं मिल पा रहा है। एक महीने से जारी आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति को खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग भी की है। पत्र में शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग पूरी नहीं होने और लंबे समय से चल रहे आंदोलन का हवाला दिया गया है।

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एक महीने बाद आंदोलन का सबसे गंभीर दौर
30वें दिन पहुंच चुका आंदोलन अब नरेंद्र राजपूत के नौ दिन के निर्जल अनशन को लेकर गंभीर स्वास्थ्य संकट में बदल गया है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, नरेंद्र बार-बार बेहोश हो रहे हैं, इसके बावजूद वह अनशन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लगातार उन्हें समझा रहे हैं, लेकिन नरेंद्र अपनी मांग पूरी होने तक पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।
 
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