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मई में दो बच्चों की मौत, फिर भी नहीं जागा सिस्टम; CMHO बोले-1500 गांव अकेला नहीं जा सकता, कल बालाघाट जाएंगे CM

Fri, 28 Aug 2026 04:17 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Fri, 28 Aug 2026 04:17 PM IST
सार

बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव शनिवार को जनविश्वास अभियान के तहत जिले में पहुंचेंगे। वहीं, बच्चों की मौत के बाद  जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। डॉ. परेश उपलव को जिला टीकाकरण अधिकारी के पद से हटा दिया गया है, लेकिन उन्हें सीएमएचओ के पद पर अब भी बरकरार रखा गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब उन्हें जिला टीकाकरण अधिकारी की जिम्मेदारी से हटा दिया गया, तो फिर सीएमएचओ जैसे बड़े पद की जिम्मेदारी कैसे दी गई है? 

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Two children died in May, yet the system remains unmoved; CMHO says he cannot visit 1,500 villages, while the
सीएमएचओ परेश उपलव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आदिवासी इलाकों में 24 बच्चों की मौत के मामले के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को जनविश्वास अभियान के तहत जिले में पहुंचेंगे। रक्षाबंधन के कारण इस बार शुक्रवार के बजाय शनिवार को जनविश्वास अभियान आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री जिले की स्थिति की समीक्षा करेंगे। उनका दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब बालाघाट में बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बैहर और बिरसा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ समय में कई बच्चों की बीमारी के कारण मौत हुई है। जिले के सीएमएचओ डॉ. परेश उपलव के रवैया सवालों के घेरे में है। शासन का भी दोहरा रूख सामने आया है, उन्हें टीकाकरण अधिकारी के पद से तो हटाया गया है, लेकिन सीएमएचओ पद पर कायम रखा है। 
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जानकारी के अनुसार अब तक 24 बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। हालांकि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 10 की मौत हुई है। मौत की वजहों में मलेरिया, खसरा और कुपोषण जैसी बीमारियां सामने आई हैं। अभी अस्पताल में 48 बच्चे भर्ती हैं। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची हैं। जिला मलेरिया अधिकारी और टीकाकरण अधिकारी को हटाया जा चुका है।  
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मई में ही मिल गई थी खतरे की दस्तक
बालाघाट में बच्चों के बीमार होने और मौत का सिलसिला जून-जुलाई में सामने आने से पहले ही शुरू हो गया था। मई में दो बच्चों की मौत हुई थी। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। बाद में जब जून और जुलाई में बच्चों की मौत के मामले सामने आए तो प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का अमला प्रभावित गांवों में पहुंचा। अब सवाल यह है कि मई में दो बच्चों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी के कारणों की पड़ताल और रोकथाम के लिए समय रहते व्यापक कदम क्यों नहीं उठाए?

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60 से 70 प्रतिशत ही हुआ टीकाकरण
बच्चों की मौत के मामले में टीकाकरण भी बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। पिछले दो-तीन वर्षों में जिले में बच्चों का टीकाकरण करीब 60 से 70 प्रतिशत ही होने की बात सामने आई है। यानी बड़ी संख्या में बच्चे टीकाकरण से बाहर रहे। बैहर से कांग्रेस विधायक संजय उइके का आरोप है कि टीकाकरण पूरा नहीं होने के कारण बच्चे खसरे की चपेट में आए। कुपोषण के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर थी, जिससे बीमारी गंभीर होती गई। विधायक ने कुपोषण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मार्च से गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार नहीं बांटा जा रहा था। इससे पहले वितरित किए जा रहे पोषण आहार में भी पर्याप्त पोषक तत्व नहीं होने की बात सामने आई थी।

हाईरिस्क जिले की मलेरिया कैटेगरी बदली
बालाघाट की मलेरिया रोकथाम व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विधायक का कहना है कि बालाघाट लंबे समय से मलेरिया के हाईरिस्क जोन में रहा है।  उनका आरोप है कि मलेरिया की रोकथाम के लिए होने वाले उपायों को बढ़ाने के बजाए कम कर दिया गया। इनमें मच्छरदानी वितरण, दवा का छिड़काव और मलेरिया की जांच जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

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सीएमएचओ समेत जिम्मेदारों को हटाएं : विधायक उइके
बच्चों की मौत के बाद आदिवासी क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। प्रदर्शनकारी बालाघाट के सीएमएचओ डॉ. परेश उपलव को हटाने की मांग कर रहे हैं। उपलव जिले के टीकाकरण अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। प्रशासन ने उन्हें जिला टीकाकरण अधिकारी के पद से हटा दिया है। कांग्रेस विधायक संजय उइके का कहना है कि मामले में सीएमएचओ समेत सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुपोषण से लेकर टीकाकरण तक कई स्तर पर लापरवाही हुई है।


डिप्टी सीएम से लेकर नेता प्रतिपक्ष तक पहुंचे गांव
बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, जिले के प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। अधिकारियों की टीमें भी गांवों में पहुंचकर स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों की स्थिति की जानकारी जुटा रही हैं।

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जनविश्वास अभियान में होगी जिले की समीक्षा
मुख्यमंत्री मोहन यादव जनविश्वास अभियान के तहत अलग-अलग जिलों में पहुंचकर सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। अभियान के दौरान ऑनलाइन समाधान के जरिए मिली शिकायतों के निराकरण की भी जानकारी ली जाती है। 7 अगस्त तक मुख्यमंत्री छिंदवाड़ा, बड़वानी और टीकमगढ़ में जनविश्वास अभियान में शामिल हो चुके हैं। अब शनिवार को उनका बालाघाट दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब जिले के आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की मौत, टीकाकरण, कुपोषण और मलेरिया की रोकथाम को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

चार लाख है बैगा जनजातीय आबादी 
बैगा जनजाति मध्य प्रदेश में विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति के रूप में आती है। 2011 की जनगणना के अनुसार प्रदेश में बैगा जनजाति की आबादी करीब चार लाख है। बालाघाट के आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े सवालों के बीच मुख्यमंत्री के दौरे में इन इलाकों की स्थिति भी महत्वपूर्ण रहेगी।

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सीएमएचओ, डॉ. परेश उपलव से सवाल जवाब
आपके इस्तीफे की क्यों मांग की जा रही है? 
सीएमएचओ-
इसके बारे में मैं क्या बता सकता हूं। मुझे जानकारी नहीं है। 
आप जिला टीकाकरण अधिकारी भी थे, टीकाकारण पूरा क्यों नहीं हुआ? 
सीएमएचओ-
इस काम में पूरी टीम काम करती है। मुझे ब्लॉक से जानकारी मिलती थी। 
आपके अनुसार टीकाकरण पूरा हुआ है? 
सीएमएचओ-
देखिए, पूरी टीम काम करती है। मैं पूरे 1500 गांवों में अकेला तो जा नहीं सकता। 
यह भी आरोप है कि मई में दो बच्चों की मौत हो गई थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई? 
सीएमएचओ-
देखिए, नीचे एएनएम, आंगनवाड़ी, बीएमओ सब लोग होते हैं। कोई तो जानकारी देता। हमें जानकारी मिलने के बाद 15 जुलाई से टीम संबंधित क्षेत्रों में सक्रिय हो गई थी।
 
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