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Hajj Committee: नियुक्ति इतनी टली कि बदल गए नियम, मामला बड़ी रकम के गोंडोबल का, जानिए क्या है पूरा मामला

Fri, 11 Oct 2024 05:37 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अरविंद कुमार Updated Fri, 11 Oct 2024 05:37 PM IST
सार

मामला सेंट्रल हज कमेटी में होने वाली डिप्टी सीईओ से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, इस पद के लिए जनवरी 2023 में एक विज्ञापन प्रकाशित किया गया। अन्य अहर्ताओं के साथ आयु सीमा 56 वर्ष तय हुई थी।

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Hajj Committee Appointment was delayed so much that rules were changed case of Gondobal of huge amount
हज हाउस, भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संस्था एक, अधिकारी भी वही, वांछित पद भी नहीं बदला...बस बदला तो एक नियम। नियम के झोलझाल के पीछे छिपा एक मकसद है, जिसे पूरा करने के लिए सेंट्रल हज कमेटी ने सारा तंत्र फैलाया और उसमें कामयाबी हासिल कर ली। मामला सेंट्रल हज कमेटी में होने वाली डिप्टी सीईओ से जुड़ा है।

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जानकारी के मुताबिक, इस पद के लिए जनवरी 2023 में एक विज्ञापन प्रकाशित किया गया। अन्य अहर्ताओं के साथ आयु सीमा 56 वर्ष तय हुई। आवेदन पहुंचे, प्रक्रिया हुई। लेकिन परिणाम होल्ड पर रख दिए गए। करीब आठ महीने बाद फिर इस प्रक्रिया को दोहराया गया। फिर विज्ञापन, फिर वही अहर्ता, फिर आवेदन, फिर साक्षात्कार...और पिछली बार की तरह इस बार भी परिणाम होल्ड पर। डिप्टी सीईओ के बिना ही कामकाज अपनी गति पर चलता रहा।
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...और बदल गए नियम
सूत्रों का कहना है कि सेंट्रल हज कमेटी में डिप्टी सीईओ पद के लिए जुलाई 2024 में फिर विज्ञापन जारी किया गया। बाकी वांछित योग्यता पिछली बार की तरह ही रखी हैं। बदला सिर्फ एक नियम, आवेदक की अधिकतम आयु सीमा 56 से घटाकर 45 कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक, नौ अक्तूबर को इन पदों के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी करते हुए तीन लोगों को नियुक्ति दे दी गई है।
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दो साल का इंतजार बेकार
सूत्रों का कहना है कि सेंट्रल हज कमेटी के इन पदों पर सेवाएं देने के ख्वाहिशमंद शासकीय अधिकारियों ने आवेदन किए थे। निर्धारित योग्यता, काम करने का जज्बा और कुछ बेहतर परिणाम देने की ललक रखने वाले अधिकारियों ने अपने मूल विभाग से प्रतिनियुक्ति से लेकर अन्य फॉर्मेलिटी भी पूरी कर ली थी। लेकिन करीब दो साल के इंतज़ार के बाद उनके हाथ महज निराशा ही लगी है। 56 की आयु सीमा में बंधे यह अधिकारी नए नियमों की जंजीर में इस तरह जकड़ दिए गए हैं कि भविष्य में होने वाली ऐसी रिक्तियों और नियुक्तियों के लिए योग्य ही नहीं रहे हैं।

इसलिए सारा घालमेल
सूत्रों का कहना है कि हज यात्रा से पहले सेंट्रल हज कमेटी भारत के हाजियों को ठहरने के होटल आदि के सिलेक्शन के लिए एक टीम सऊदी अरब भेजती है। बताया जाता है कि इस टीम में डिप्टी सीईओ स्तर के अधिकारी ही शामिल किए जाते हैं। इस टीम की तस्दीक पर ही सऊदी अरब में होटल आदि फाइनल किए जाते हैं। जिनमें हज के दौरान हाजियों को ठहराया जाता है।


मामला अरबों रुपये का
जानकारी के मुताबिक, करीब 42 दिन की हज यात्रा के लिए भारत से जाने वाले करीब डेढ़ लाख हाजियों के लिए सैकड़ों होटल किराए पर लिए जाते हैं। हाजियों से किराए के रूप में वसूल किया जाने वाला प्रति व्यक्ति 2200 रियाल के लिहाज से सऊदी अरब को करीब 8 अरब रुपये अदा किए जाते हैं। सूत्रों का कहना है सेंट्रल हज कमेटी द्वारा बिल्डिंग सिलेक्शन टीम द्वारा सऊदी से मिलकर दूरस्थ, कम सुविधा वाले और छोटे कमरों वाले होटल पर सहमति जता दी जाती है। जिसके चलते भारतीय हाजियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस मामले में हज कमेटी ऑफ इंडिया के सीईओ लियाकत अली से चर्चा करना चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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