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स्वास्थ्य विभाग में अंधेरगर्दी: खरीदी में गड़बड़ी में दो फर्म ब्लैकलिस्ट, पर धांधली का जिम्मेदार फिर बना CGMT

Mon, 07 Sep 2026 06:44 AM IST
Anand Pawar Anand Pawar
Updated Mon, 07 Sep 2026 06:44 AM IST
सार

मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीपीएचएससीएल) में जिन टेंडरों से जुड़ी दो फर्मों पर फर्जी दस्तावेज और घटिया गुणवत्ता के आरोपों में कार्रवाई हुई, उन्हीं प्रक्रियाओं के दौरान जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी को फिर से तीसरी बार चीफ जनरल मैनेजर टेक्निकल (सीजीएमटी) बना दिया गया। फर्में ब्लैकलिस्ट हुईं, लेकिन अधिकारी की जवाबदेही अब तक तय नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और खरीद प्रक्रिया की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।

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Chaos in the Health Department: Two firms blacklisted over procurement irregularities, yet the official respon
सीजीएमटी डॉ. पंकज पराशर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीपीएचएससीएल) में सरकारी खरीद में गड़बड़ी करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई करने के बजाए फिर उसी पद पर बैठाने का मामला सामने आया है। इस मामले में शिकायत के बाद फर्मों पर कार्रवाई कर ब्लैकलिस्ट कर दिया गया, लेकिन इसके जिम्मेदार अधिकारी को दोबारा  एमपीपीएचएससीएल का  चीफ जनरल मैनेजर टेक्निकल (सीजीएमटी) बना दिया गया। ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में फर्जी दस्तावेजों से टेंडर लेने और निम्न गुणवत्ता का सामान सप्लाई करने वाली दो फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इसके लिए मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने आदेश जारी किए, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई करने के बजाए उसको दोबारा उसी पद पर बैठा दिया गया। दरअसल  प्रदेश में लैप्रोस्कोपी उपकरणों की निविदा में फर्जी दस्तावेजों से टेंडर लेने का सत्यापन होने के बाद डिसेंट मेडिकल इक्विपमेंट सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की गई, वहीं अस्पताल फर्नीचर की आपूर्ति करने वाली भोपाल की इनलाइन मेडिकेयर को घटिया गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन नहीं करने पर दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया। दोनों मामलों में एक समान बात है। जिस समय संबंधित टेंडर और खरीद की प्रक्रिया पूरी हुई, उस दौरान डॉ. पंकज पराशर एमपीपीएचएससीएल में चीफ जनरल मैनेजर टेक्निकल (सीजीएमटी) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब सवाल यह है कि जब बाद में दोनों फर्मों के खिलाफ गंभीर आपत्तियां सामने आईं और कार्रवाई हुई, तो उस समय प्रक्रिया की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई? खास बात तो यह है कि संबंधित मामले में शिकायत के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पंकज पराशर को तीसरी बार सीजीएमटी जैसे अहम पद की जिम्मेदारी क्यों दे दी? 
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पराशर को तीसरी बार बनाया सीजीएमटी 
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड का सीजीएमटी डॉ. पंकज पराशर को मई-जून 2026 में तीसरी बार बनाया है। इस बार उनकी नियुक्ति के आदेश डीएमई द्वारा निकाले गए। इससे पहले पराशर 2018 से 2019 और 2023 से फरवरी 2025 तक चीफ जनरल मैनेजर टेक्निकल के पद पर पदस्थ रहे। दोनों फर्मों को टेंडर जारी करने और उनके सामान के इंस्पेक्शन के इंस्पेक्शन के समय डॉ. पंकज पराशर के पास ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी। अब सवाल यह है कि पंकज पराशर के समय अनियमितता सामने आने के बावजूद उनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उनको किसका संरक्षण प्राप्त हैं? 
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विदेशी कंपनी के फर्जी पत्र लगाए, करोड़ों की सप्लाई 
वर्ष 2023 लैप्रोस्कोपी उपकरणों से जुड़े टेंडर में डिसेंट मेडिकल इक्विपमेंट सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से विदेशी कंपनियों के निर्माता के अधिकृत पत्र लगाए गए थे। इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर शिकायत हुई थी। इस बीच कंपनी ने अस्पतालों में करोड़ों रुपये की सप्लाई कर दी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित विदेशी कंपनियों की ओर से भी इन अधिकृत पत्रों को लेकर आपत्ति जताई गई थी। हद तो यह है कि तत्कालीन सीजीएमटी ने फर्म को बचाने के लिए नोटशीट में सत्यापन नहीं होने की बात लिख दी। अब इस मामले की जांच की गई और दस्तावेजों फर्जी होने की बात सामने आई, जिसके आधार पर  फर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई। ऐसे में साफ है कि पंकज पराशर फर्जीवाड़े को बचाने का प्रयास कर रहे थे। इसके चलते नियमों के उल्लंघन के साथ ही सरकार को राजस्व का भी नुकसान हुआ। 

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इनलाइन मेडिकेयर का सामान मानकों पर खरा नहीं उतरा
दूसरा मामला भोपाल की फर्म इनलाइन मेडिकेयर को 2024 में मिले टेंडर से जुड़ा है। एमपीपीएचएससीएल ने फर्म द्वारा सप्लाई किए गए अस्पताल फर्नीचर और उपकरणों का निरीक्षण सरकारी एजेंसी राइट्स लिमिटेड से कराया था। निरीक्षण में बेड-साइड स्टूल, हॉस्पिटल बेड, एग्जामिनेशन टेबल, ड्रेसिंग ट्रॉली, स्ट्रेचर और आईसीयू मोटराइज्ड बेड समेत कई सामान निर्धारित तकनीकी स्पेसिफिकेशन के अनुरूप नहीं पाए गए। रिपोर्ट में सामान की गुणवत्ता, स्टील की मोटाई, आकार, वेल्डिंग, जंग और जरूरी प्रमाणपत्रों को लेकर भी आपत्तियां दर्ज की गईं। इसके बाद एमपीपीएचएससीएल ने फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया। फर्म की ओर से दिए गए जवाब को संतोषजनक नहीं माना गया। इसके बाद निविदा की शर्तों के तहत इनलाइन मेडिकेयर को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इस टेंडर के समय भी पंकज परासर ही सीजीएमटी जैसे मजबूत पद की जिम्मेदारी निभा रहे थे। 


सरकारी नौकरी के साथ निजी कंपनी का संचालन 
डॉ. पंकज पराशर पर सरकारी नौकरी के साथ निजी कंपनी का संचालन करने के भी आरोप लगे हैं। करीब दो साल पहले एक टीवी कार्यक्रम में उन्होंने खुद को इंदौर की एक निजी मेडिकल डिवाइस कंपनी का संस्थापक बताया था। इसके बाद उनकी सरकारी सेवा के दौरान निजी कंपनी से कथित जुड़ाव को लेकर शिकायत सामने आई थी। शिकायत में सेवा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। हालांकि इस मामले में भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

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यह पद क्यों महत्वपूर्ण?
एमपीपीएचएससीएल में तकनीकी सीजीएमटी करोड़ों रुपये की दवा और मेडिकल उपकरणों की खरीद, टेंडर, तकनीकी जांच और गुणवत्ता से जुड़े अहम फैसलों में भूमिका निभाता है। ऐसे में इस पद पर किसी विवादित नियुक्ति से खरीद प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

जांच के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी 
मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एमडी मयंक अग्रवाल ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों की जांच सही पाए जाने पर फर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जहां तक उस समय के अधिकारियों पर कार्रवाई का सवाल है तो वह विभागीय जांच के बाद तय होगा। हम मामले में सप्लाई उपकरणों की थर्ड एजेंसी से जांच करा रहे हैं। 

आयुक्त ने नहीं दिया जवाब, पराशर ने साधी चुप्पी 
वहीं, इस पूरे मामले में डॉ. पंकज पराशर पर कार्रवाई नहीं करने और उनको तीसरी बार सीजीएमटी बनाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त धनराजू एस से सवाल किया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं, सीजीएमटी पंकज पराशर से भी संपर्क किया, उनको मैसेज भी भेजा, लेकिन उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया।
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