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Bhopal: एमपी में सरकारी स्कूल बचाने भोपाल पहुंचे 36 जिलों के छात्र, शिक्षक और अभिभावक, स्कूल बंद करने का विरोध

Sun, 23 Aug 2026 08:09 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sun, 23 Aug 2026 08:09 PM IST
सार

भोपाल के नीलम पार्क में 36 जिलों से जुटे छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने सरकारी स्कूलों को बंद करने का विरोध किया। प्रदर्शन में स्कूलों की मरम्मत, मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने और शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग उठी।

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Bhopal: Students, teachers, and parents from 36 districts arrive in Bhopal to save government schools in MP; p
विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों को बंद करने और विलय की प्रक्रिया के विरोध में रविवार को राजधानी भोपाल में बड़ा प्रदर्शन हुआ। नीलम पार्क में आयोजित स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के सम्मेलन में प्रदेश के 36 जिलों से छात्र, शिक्षक और अभिभावक पहुंचे। सभी ने एकजुट होकर सरकारी स्कूलों को बंद नहीं करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई।
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स्कूल बंद करने की नीति का विरोध
सम्मेलन में क्लोजर, मर्जर और एक शाला-एक परिसर जैसी योजनाओं के तहत सरकारी स्कूलों को बंद करने का विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्कूलों को बंद करने के बजाय उनमें सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए। लंबे समय से जर्जर स्कूल भवनों की तत्काल मरम्मत कराने और बच्चों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।
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हर बारिश में सामने आती है स्कूलों की बदहाली
स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक मुदित भटनागर ने सरकार पर सरकारी शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बजट की कमी के कारण प्रदेश के कई सरकारी स्कूल वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। बारिश के दौरान कहीं छत से पानी टपकता है तो कहीं जर्जर दीवारों से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्कूल बंद करने के बजाय उनमें निवेश करना चाहिए, ताकि गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चों को उनके आसपास ही बेहतर शिक्षा मिल सके।
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उज्जैन में 11 स्कूल बंद करने का विरोध
उज्जैन प्रभारी एडवोकेट जितेंद्र सेंगर ने कहा कि क्लोजर और मर्जर नीति के तहत उज्जैन के 11 स्कूलों को बंद करने के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने दाऊदखेड़ी गांव के सांदीपनि स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि स्कूल में कन्या विद्यालय के विलय के विरोध में छात्रों और अभिभावकों ने आंदोलन किया था, जिसके बाद प्रशासन को मांग पर विचार करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अशोकनगर, गुना, देवास और इंदौर समेत कई जिलों में भी समिति ने स्कूल बचाने के लिए आंदोलन किए हैं। किसी भी योजना की आड़ में स्कूल बंद नहीं किए जाने चाहिए।

30 हजार स्कूल बंद होने का दावा
डॉ. रामावतार शर्मा ने यूडीआईएसई के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि देश में पिछले दस वर्षों में करीब 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं, जिनमें मध्य प्रदेश के लगभग 30 हजार स्कूल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों की दूरी बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और बड़ी संख्या में विद्यार्थी पढ़ाई छोड़ रहे हैं।

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शिक्षक कम करने पर भी सवाल
सम्मेलन में शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर भी विरोध जताया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा की आड़ में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए नई भर्ती की जानी चाहिए, न कि पद कम किए जाएं। साथ ही विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।
सम्मेलन को शिक्षक परमानंद डहेरिया, केंद्रीय कर्मचारी नेता यशवंत पुरोहित, समाजसेवी शशिभूषण यादव, शिक्षा बचाओ समिति के सुरेंद्र रघुवंशी, समाजसेवी माया विश्वकर्मा सहित कई शिक्षक, अभिभावक संगठनों के प्रतिनिधियों और अलग-अलग जिलों से आए छात्रों ने संबोधित किया।

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ये प्रमुख मांगें उठीं
- सरकारी स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
- जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए तुरंत बजट जारी किया जाए।
- स्कूलों में पानी, शौचालय, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
- क्लोजर, मर्जर और एक शाला-एक परिसर के नाम पर स्कूल बंद न किए जाएं।
- शिक्षकों की संख्या कम करने के बजाय पर्याप्त भर्ती की जाए।
- परीक्षा व्यवस्था को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जाए।
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