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Bhopal: हमीदिया में महिलाओं के जटिल गर्भाशय और बच्चेदानी का ऑपरेशन हुआ आसान, एनएचएम से मिली लेप्रोस्कोपी मशीन
Sun, 10 Aug 2025 07:27 AM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sun, 10 Aug 2025 07:27 AM IST
सार
हमीदिया अस्पताल में अब महिलाओं गर्भाशय और बच्चेदानी से जुड़े जटिल ऑपरेशन नई मॉडर्न लेप्रोस्कोपिक मशीन से होंगे। अस्पताल में यह सुविधा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा उपलब्ध कराई गई है।
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हमीदिया अस्पताल भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल की सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया में अब महिलाओं गर्भाशय और बच्चेदानी से जुड़े जटिल ऑपरेशन नई मॉडर्न लेप्रोस्कोपिक मशीन से होंगे। अस्पताल में यह सुविधा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा उपलब्ध कराई गई है। हमीदिया अस्पताल के महिला एवं प्रसूति रोग विभाग की एचओडी डॉ. शबाना सुल्तान ने बताया कि निजी अस्पतालों में मरीजों को इस तरह की सर्जरी पर 40 से 60 हजार रुपए या उससे ज्यादा खर्च करना पड़ता है। हमीदिया में यह इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा। उन्होंने बताया कि हमने ऑपरेशन करना शुरू कर दिया है।
ज्यादा सुरक्षित,सटीक और तेज होंगे ऑपरेशन
डॉ शबाना सुल्तान ने बताया कि नई हाईटेक मशीन से ऑपरेशन पहले से ज्यादा सुरक्षित, सटीक और तेज होंगे। मशीन में हार्मोनिक स्केल पेल, टेलिस्कोप, अल्ट्रा-क्लियर कैमरा, हाई-रेजोल्यूशन मॉनिटर, लाइट सोर्स और माइक्रो हैंड इंस्ट्रूमेंट्स जैसे मॉडर्न उपकरण लगे हैं। ऑपरेशन के दौरान पेट या गर्भाशय के पास मात्र एक छोटा-सा कट लगाया जाता है, जिसमें कैमरे वाली पतली ट्यूब डाली जाती है। उन्होंने बताया कि कैमरे से शरीर के अंदरूनी हिस्सों को स्क्रीन पर साफ-साफ देख पाते हैं।
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इन मरीजों के होंगे ऑपरेशन
1- हिस्ट्रैक्टोमी बच्चेदानी निकालने की सर्जरी
2- गर्भाशय से ट्यूमर या फाइब्रायड हटाना
3- पेल्विक इन्फेक्शन का इलाज
4- बांझपन से जुड़े जटिल ऑपरेशन
यह भी पढ़ें-कमलनाथ के क्षेत्र में सबसे कम युवाओं ने ली कांग्रेस की सदस्यता, 15 लाख युवा जुड़े
संक्रमण का खतरा कम जल्दी डिस्चार्ज होते हैं मरीज
चिकित्सकों के अनुसार लेप्रोस्कोपिक तकनीक से खून बहुत कम बहता है, संक्रमण का खतरा घट जाता है और मरीज की रिकवरी तेज होती है। पहले जहां मरीज को हफ्तों अस्पताल में रहना पड़ता था, अब ज्यादातर महिलाएं 2-3 दिन में डिस्चार्ज हो सकती हैं।
यह भी पढ़ें-रेलवे ने लागू की राउंड ट्रिप पैकेज स्कीम, रिटर्न जर्नी पर मिलेगा 20% डिस्काउंट, प्रायोगिक तौर पर स्कीम
8 इंच तक लगाना पड़ता था कट
डॉ. शबाना सुल्तान ने बताया कि अभी तक ओपन सर्जरी में 6 से 8 इंच का कट लगता है। वहीं, लेप्रोस्कोपिक सर्जरी 0.5 से 1 सेमी से पूरी सर्जरी होती है।
पारंपरिक सर्जरी में अधिक दर्द और खून ज्यादा बहता है। लेप्रोस्कोपी तकनीक खासकर उन मरीजों के लिए वरदान है, जो दिल, डायबिटीज या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। क्योंकि इसमें शरीर पर कम असर पड़ता है।
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ज्यादा सुरक्षित,सटीक और तेज होंगे ऑपरेशन
डॉ शबाना सुल्तान ने बताया कि नई हाईटेक मशीन से ऑपरेशन पहले से ज्यादा सुरक्षित, सटीक और तेज होंगे। मशीन में हार्मोनिक स्केल पेल, टेलिस्कोप, अल्ट्रा-क्लियर कैमरा, हाई-रेजोल्यूशन मॉनिटर, लाइट सोर्स और माइक्रो हैंड इंस्ट्रूमेंट्स जैसे मॉडर्न उपकरण लगे हैं। ऑपरेशन के दौरान पेट या गर्भाशय के पास मात्र एक छोटा-सा कट लगाया जाता है, जिसमें कैमरे वाली पतली ट्यूब डाली जाती है। उन्होंने बताया कि कैमरे से शरीर के अंदरूनी हिस्सों को स्क्रीन पर साफ-साफ देख पाते हैं।
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इन मरीजों के होंगे ऑपरेशन
1- हिस्ट्रैक्टोमी बच्चेदानी निकालने की सर्जरी
2- गर्भाशय से ट्यूमर या फाइब्रायड हटाना
3- पेल्विक इन्फेक्शन का इलाज
4- बांझपन से जुड़े जटिल ऑपरेशन
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संक्रमण का खतरा कम जल्दी डिस्चार्ज होते हैं मरीज
चिकित्सकों के अनुसार लेप्रोस्कोपिक तकनीक से खून बहुत कम बहता है, संक्रमण का खतरा घट जाता है और मरीज की रिकवरी तेज होती है। पहले जहां मरीज को हफ्तों अस्पताल में रहना पड़ता था, अब ज्यादातर महिलाएं 2-3 दिन में डिस्चार्ज हो सकती हैं।
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8 इंच तक लगाना पड़ता था कट
डॉ. शबाना सुल्तान ने बताया कि अभी तक ओपन सर्जरी में 6 से 8 इंच का कट लगता है। वहीं, लेप्रोस्कोपिक सर्जरी 0.5 से 1 सेमी से पूरी सर्जरी होती है।
पारंपरिक सर्जरी में अधिक दर्द और खून ज्यादा बहता है। लेप्रोस्कोपी तकनीक खासकर उन मरीजों के लिए वरदान है, जो दिल, डायबिटीज या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। क्योंकि इसमें शरीर पर कम असर पड़ता है।
