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Bhopal News: झीलों में बिना परमिट चल रहीं नाव, पर्यटकों की जान से खिलवाड़,50 से ज्यादा बोट, BMC रिकॉर्ड में 30
Tue, 05 May 2026 07:11 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 05 May 2026 07:11 PM IST
सार
भोपाल की झीलों में बड़ी संख्या में बोट बिना परमिट और बिना पर्याप्त सुरक्षा के चलाई जा रही हैं, जिससे पर्यटकों की जान खतरे में है। प्रशासन की ढिलाई के चलते नियमों का पालन नहीं हो रहा और अवैध संचालन जारी है। समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।
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बड़े तालाब में संचालित नाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जबलपुर के बरगी डैम हादसे के बाद जहां पूरे प्रदेश में जल सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी है, वहीं राजधानी भोपाल की झीलों की हकीकत चौंकाने वाली और बेहद खतरनाक है। शहर के बड़े तालाब, छोटा तालाब और सैर-सपाटा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बिना वैध परमिट, बिना फिटनेस जांच और बिना सुरक्षा मानकों के दर्जनों नावें चलाई जा रही हैं। यह स्थिति सीधे-सीधे पर्यटकों और स्थानीय लोगों की जान को जोखिम में डाल रही है। जानकारी के अनुसार, इन झीलों में 50 से अधिक निजी नावें रोजाना संचालित हो रही हैं, जबकि भोपाल नगर निगम के पास इनमें से केवल करीब 30 नावों का ही आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है। इसका सीधा मतलब है कि बड़ी संख्या में नावें पूरी तरह अवैध रूप से चल रही हैं और इन पर किसी भी प्रकार की प्रशासनिक निगरानी नहीं है।
कई साल से लाइसेंस रिन्यू नहीं, फिर भी बेखौफ संचालन
जांच में सामने आया है कि कई निजी नाव संचालकों ने वर्षों से अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया, न ही किसी प्रकार की तकनीकी जांच कराई है। इसके बावजूद बोट क्लब, शीतल दास की बगिया, कमला पार्क और सैर-सपाटा क्षेत्र में ये नावें बेरोकटोक चलाई जा रही हैं। नियमों की इस खुली अनदेखी के बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा न तो निरीक्षण किया जा रहा है और न ही कोई ठोस कार्रवाई, जिससे प्रशासन की निष्क्रियता साफ नजर आती है।
प्रतिबंध बना दिखावा, सिस्टम पूरी तरह फेल
बरगी डैम हादसे के बाद एहतियात के तौर पर बड़ा तालाब में निजी नावों के संचालन पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की गई थी। कुछ दिनों तक नावें किनारे जरूर खड़ी रहीं, लेकिन उसके बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। न किसी पर जुर्माना लगाया गया, न लाइसेंस की जांच की गई और न ही नावों की जब्ती की कार्रवाई हुई। इससे साफ है कि प्रतिबंध केवल कागजों में ही सीमित रहा और जमीनी स्तर पर उसका कोई असर नहीं दिखा।
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सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू सुरक्षा का
कई नावों में लाइफ जैकेट उपलब्ध ही नहीं हैं।जहां मौजूद हैं, वे जर्जर और अनुपयोगी हालत में हैं। कई जैकेट की बेल्ट टूटी हुई, कुछ पूरी तरह फटी हुई पाई गईं।क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जा रहा है। इन खामियों के बावजूद पर्यटकों को नाव में बैठाकर झील में ले जाया जा रहा है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की लापरवाही सीधे-सीधे आपदा को न्योता देने जैसी है।
यह भी पढ़ें-पहली परीक्षा में 75% या अधिक वालों को ही मिलेगा लैपटॉप, छात्रोंं की बढ़ी संख्या,जाने कब मिलेगा लैपटॉप
पर्यटन पर भी असर, भरोसा हो रहा कमजोर
झीलों में अव्यवस्था और सुरक्षा की कमी का असर पर्यटन पर भी पड़ रहा है। बाहर से आने वाले पर्यटक जहां बोटिंग का आनंद लेने आते हैं, वहीं इस तरह की खबरों और अव्यवस्थित संचालन से उनका भरोसा कमजोर हो रहा है। कुछ समय के लिए नावें बंद होने से झील किनारे सन्नाटा भी देखा गया, जिससे स्थानीय व्यवसायों पर भी असर पड़ा।
निगम के दावे और जमीनी सच्चाई में बड़ा अंतर
नगर निगम के लेक कंजरवेशन सेल के प्रभारी प्रमोद मालवीय का कहना है कि बिना लाइसेंस नावें चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और नावें जब्त की जाएंगी। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी झीलों में अवैध नावों का संचालन जारी है, जिससे साफ होता है कि प्रशासनिक दावे और जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर है।
यह भी पढ़ें-पहले 90° ब्रिज, अब बंद रास्ते वाला शौचालय, राजधानी भोपाल में प्लानिंग का एक और फेल मॉडल
बड़ा हादसा होने का इंतजार?
भोपाल की झीलें, जो शहर की पहचान और पर्यटन का प्रमुख केंद्र हैं, अब लापरवाही और अव्यवस्था की वजह से खतरे का केंद्र बनती जा रही हैं। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई, नियमित जांच और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
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कई साल से लाइसेंस रिन्यू नहीं, फिर भी बेखौफ संचालन
जांच में सामने आया है कि कई निजी नाव संचालकों ने वर्षों से अपने लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया, न ही किसी प्रकार की तकनीकी जांच कराई है। इसके बावजूद बोट क्लब, शीतल दास की बगिया, कमला पार्क और सैर-सपाटा क्षेत्र में ये नावें बेरोकटोक चलाई जा रही हैं। नियमों की इस खुली अनदेखी के बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा न तो निरीक्षण किया जा रहा है और न ही कोई ठोस कार्रवाई, जिससे प्रशासन की निष्क्रियता साफ नजर आती है।
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प्रतिबंध बना दिखावा, सिस्टम पूरी तरह फेल
बरगी डैम हादसे के बाद एहतियात के तौर पर बड़ा तालाब में निजी नावों के संचालन पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की गई थी। कुछ दिनों तक नावें किनारे जरूर खड़ी रहीं, लेकिन उसके बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। न किसी पर जुर्माना लगाया गया, न लाइसेंस की जांच की गई और न ही नावों की जब्ती की कार्रवाई हुई। इससे साफ है कि प्रतिबंध केवल कागजों में ही सीमित रहा और जमीनी स्तर पर उसका कोई असर नहीं दिखा।
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सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू सुरक्षा का
कई नावों में लाइफ जैकेट उपलब्ध ही नहीं हैं।जहां मौजूद हैं, वे जर्जर और अनुपयोगी हालत में हैं। कई जैकेट की बेल्ट टूटी हुई, कुछ पूरी तरह फटी हुई पाई गईं।क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया जा रहा है। इन खामियों के बावजूद पर्यटकों को नाव में बैठाकर झील में ले जाया जा रहा है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की लापरवाही सीधे-सीधे आपदा को न्योता देने जैसी है।
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पर्यटन पर भी असर, भरोसा हो रहा कमजोर
झीलों में अव्यवस्था और सुरक्षा की कमी का असर पर्यटन पर भी पड़ रहा है। बाहर से आने वाले पर्यटक जहां बोटिंग का आनंद लेने आते हैं, वहीं इस तरह की खबरों और अव्यवस्थित संचालन से उनका भरोसा कमजोर हो रहा है। कुछ समय के लिए नावें बंद होने से झील किनारे सन्नाटा भी देखा गया, जिससे स्थानीय व्यवसायों पर भी असर पड़ा।
निगम के दावे और जमीनी सच्चाई में बड़ा अंतर
नगर निगम के लेक कंजरवेशन सेल के प्रभारी प्रमोद मालवीय का कहना है कि बिना लाइसेंस नावें चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और नावें जब्त की जाएंगी। लेकिन हकीकत यह है कि आज भी झीलों में अवैध नावों का संचालन जारी है, जिससे साफ होता है कि प्रशासनिक दावे और जमीनी स्थिति में बड़ा अंतर है।
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बड़ा हादसा होने का इंतजार?
भोपाल की झीलें, जो शहर की पहचान और पर्यटन का प्रमुख केंद्र हैं, अब लापरवाही और अव्यवस्था की वजह से खतरे का केंद्र बनती जा रही हैं। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई, नियमित जांच और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
