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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   A Toilet Trapped Within a Wall: First the 90-Degree Bridge, Now a Toilet with a Blocked Entrance—Yet Another F

दीवार में कैद शौचालय: पहले 90° ब्रिज, अब बंद रास्ते वाला शौचालय, राजधानी भोपाल में प्लानिंग का एक और फेल मॉडल

Tue, 05 May 2026 01:43 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 05 May 2026 01:43 PM IST
सार

भोपाल के वार्ड-40 में बन रहा सुलभ शौचालय दीवार के पीछे फंस गया है, जिससे उसका उपयोग संभव नहीं दिखता। स्थानीय लोगों की चेतावनी के बावजूद गलत जगह निर्माण किया गया, जिससे सरकारी पैसे और प्लानिंग दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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A Toilet Trapped Within a Wall: First the 90-Degree Bridge, Now a Toilet with a Blocked Entrance—Yet Another F
90 डिग्री ब्रिज के बाद अब दीवार में कैद हुआ शौचालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल में विकास कार्यों की प्लानिंग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला ऐसा सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान भी किया है और नाराज भी। वार्ड-40 में निर्माणाधीन सुलभ शौचालय के ठीक सामने दीवार खड़ी कर दी गई है, जिससे साफ है कि तैयार होने के बाद भी इसका इस्तेमाल आम लोग नहीं कर पाएंगे।

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शौचालय बना, लेकिन रास्ता ही बंद

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यह मामला जोन-11 के बाग उमराव दूल्हा और ऐशबाग इलाके का है, जहां पहले से ही 90 डिग्री एंगल वाले रेलवे ओवरब्रिज को लेकर विवाद हो चुका है। अब उसी क्षेत्र में शौचालय के पास दीवार खड़ी कर देने से इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग पर एक और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जानकारी के मुताबिक, जिस जगह सार्वजनिक सुलभ शौचालय बनाया जा रहा है, वह रेलवे की जमीन से सटी हुई है। हाल ही में रेलवे ने अपनी सीमा में बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी, जो सीधे शौचालय के सामने आ गई। ऐसे में साफ है कि शौचालय बनकर तैयार होने के बाद भी लोग वहां तक पहुंच ही नहीं पाएंगे।

रहवासियों ने पहले ही जताई थी आपत्ति
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस निर्माण को लेकर उन्होंने पहले ही आपत्ति दर्ज कराई थी। 11 फरवरी 2026 को जोनल अधिकारी को दिए गए आवेदन में स्पष्ट कहा गया था कि क्षेत्र में करीब 400 दुकानें संचालित हैं। यहां पार्किंग और शौचालय की सख्त जरूरत है। प्रस्तावित स्थान ट्रैफिक और उपयोग के लिहाज से सही नहीं है। रहवासियों ने यह भी सुझाव दिया था कि पास में मौजूद जर्जर पानी की टंकी को हटाकर वहां शौचालय बनाया जाए, लेकिन उनकी मांग को नजरअंदाज कर दिया गया।

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विकास या विडंबना?
स्थानीय निवासी अलमास अली के मुताबिक, रेलवे की जमीन पर बनाया जा रहा शौचालय अब बाउंड्रीवाल के भीतर कैद हो गया है। इसका कोई उपयोग नहीं रह जाएगा। लोग इसे विकास का अजीब नमूना बता रहे हैं, जहां सुविधा बनाने से पहले ही उसे बेकार कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, इस सुलभ शौचालय के निर्माण पर करीब 5 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर आम जनता इसका उपयोग ही नहीं कर पाएगी, तो यह खर्च सीधे-सीधे सरकारी धन की बर्बादी नहीं तो और क्या है?

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पहले ब्रिज, अब शौचालय
इसी इलाके में बना 90 डिग्री एंगल वाला रेलवे ओवरब्रिज पहले ही आलोचना झेल चुका है, जिसे अब सुधारने का काम चल रहा है। अब शौचालय के साथ हुई यह गलती बताती है कि निर्माण से पहले सही प्लानिंग और समन्वय की कमी लगातार बनी हुई है। पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना जमीन की स्थिति स्पष्ट किए और बिना फील्ड जांच के निर्माण की अनुमति कैसे दी गई? और जब स्थानीय लोगों ने पहले ही चेतावनी दे दी थी, तो उसे नजरअंदाज क्यों किया गया?





 
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