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राज और नीति : बिप्लब देव की नियुक्ति के बाद एक पुराना रिश्ता चर्चा में
सार
मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव के तहत बिप्लब कुमार देव को नया प्रदेश प्रभारी बनाया गया है। देव के शुरुआती राजनीतिक दौर में सतना सांसद गणेश सिंह के साथ काम करने का उल्लेख भी चर्चा में है। नियुक्ति के बाद दोनों के पुराने राजनीतिक-संगठनात्मक संबंध फिर चर्चा में आ गए हैं।
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राज और नीति : मप्र में सियासी और प्रशासनिक हलचल बताता कॉलम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव के साथ ही राजनीतिक गलियारों में एक पुराने रिश्ते की चर्चा फिर तेज हो गई है। भाजपा ने त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय महासचिव बिप्लब कुमार देव को मध्य प्रदेश भाजपा का नया प्रभारी बनाया है। खास बात यह है कि देव अपने राजनीतिक सफर के शुरुआती दौर में सतना सांसद गणेश सिंह के साथ निज सहायक के रूप में काम कर चुके हैं। इस नियुक्ति ने गणेश सिंह और देव के पुराने राजनीतिक-संगठनात्मक संबंध को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। देव की नई भूमिका को लेकर यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठ रहा है कि पुराने परिचय का प्रदेश भाजपा की राजनीति में कितना असर दिखाई देगा?
निकाय चुनाव की रणनीति पर पदाधिकारियों से होगी चर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी नगर निकाय और पंचायत के चुनाव की रणनीति बनाने के लिए अगले कुछ दिनों में प्रत्येक जिले के भाजपा संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे। भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित होने वाली इन बैठकों में उस जिले के प्रभारी मंत्री, सांसद और विधायकों को भी बुलाया जाएगा। इन बैठकों के लिए अभी प्रारंभिक रूप से हर जिले के लिए एजेंडे को तैयार किया जा रहा है।
भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में बढ़ा एमपी का दबदबा
भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय में मध्य प्रदेश का दबदबा बढ़ता जा रहा है। आशीष अग्रवाल राष्ट्रीय मीडिया सह संयोजक बनाए गए। अग्रवाल पूर्व में मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी भी रह चुके हैं। मध्य प्रदेश से जुड़े राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ भाजपा मुख्यालय के राष्ट्रीय प्रभारी हैं। खरगोन के सांसद और राष्ट्रीय महासचिव गजेंद्र पटेल को झारखंड का प्रभारी बनाया गया है। प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. अरविंद भदौरिया को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्य को पश्चिम बंगाल और राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय मंत्री कविता पाटीदार को राजस्थान का सह प्रभारी बनाया गया है। इंदौर के प्रदीप भंडारी भाजपा मुख्यालय में राष्ट्रीय सह मीडिया प्रभारी हैं। कहा जा सकता है कि भाजपा में, वर्तमान में जो महत्व मध्य प्रदेश को मिल रहा है वैसा महत्व पहले कभी नहीं मिला।
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आक्रामक मूड में हैं मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हाल ही में छह विभागों के कार्यों की समीक्षा में जिन अधिकारियों के कार्यों के प्रति नाराजगी जाहिर की, माना जा रहा है कि आगामी समय में होने वाले फेरबदल में उन पर गाज गिर सकती है। उन्होंने तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को नसीहत दे डाली है और उन्हें समय सीमा में कार्य को मूर्त रूप देने की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। दरअसल सरकारी विभागों में लेटलतीफी, अत्यधिक जरूरी मामलों को लंबित रखना और उन्हें योजनाबद्ध तरीके से मूर्त रूप नहीं देने से मुख्यमंत्री इन अधिकारियों से नाराज हैं। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में मुख्यमंत्री क्या एक्शन लेते हैं?
वन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में मनमानी
सिवनी सर्किल और पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, संजय टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, रीवा, भोपाल, ग्वालियर और शहडोल सर्किल में सीसीएफ का पद एक साल से अधिक समय से अतिरिक्त प्रभार में संचालित किया जा रहा है। अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का कोई प्रशासनिक मानदंड भी नहीं है। शीर्ष अधिकारियों के चहेते आईएफएस को प्रभार दिए जाने की मनचाही प्रक्रिया चल रही है। इसमें वरिष्ठता का ध्यान भी नहीं रखा जा रहा है। सबसे बड़ा उदाहरण सिवनी वन वृत का है। यहां अभी डीएफओ स्तर के अधिकारी को कैडर में दो पद शीर्ष सीसीएफ का प्रभार दिया गया है। इसकी प्रशासनिक गलियारों में आलोचना हो रही है।
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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निकाय चुनाव की रणनीति पर पदाधिकारियों से होगी चर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी नगर निकाय और पंचायत के चुनाव की रणनीति बनाने के लिए अगले कुछ दिनों में प्रत्येक जिले के भाजपा संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे। भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित होने वाली इन बैठकों में उस जिले के प्रभारी मंत्री, सांसद और विधायकों को भी बुलाया जाएगा। इन बैठकों के लिए अभी प्रारंभिक रूप से हर जिले के लिए एजेंडे को तैयार किया जा रहा है।
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भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में बढ़ा एमपी का दबदबा
भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय में मध्य प्रदेश का दबदबा बढ़ता जा रहा है। आशीष अग्रवाल राष्ट्रीय मीडिया सह संयोजक बनाए गए। अग्रवाल पूर्व में मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी भी रह चुके हैं। मध्य प्रदेश से जुड़े राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ भाजपा मुख्यालय के राष्ट्रीय प्रभारी हैं। खरगोन के सांसद और राष्ट्रीय महासचिव गजेंद्र पटेल को झारखंड का प्रभारी बनाया गया है। प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. अरविंद भदौरिया को आंध्र प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्य को पश्चिम बंगाल और राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय मंत्री कविता पाटीदार को राजस्थान का सह प्रभारी बनाया गया है। इंदौर के प्रदीप भंडारी भाजपा मुख्यालय में राष्ट्रीय सह मीडिया प्रभारी हैं। कहा जा सकता है कि भाजपा में, वर्तमान में जो महत्व मध्य प्रदेश को मिल रहा है वैसा महत्व पहले कभी नहीं मिला।
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आक्रामक मूड में हैं मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हाल ही में छह विभागों के कार्यों की समीक्षा में जिन अधिकारियों के कार्यों के प्रति नाराजगी जाहिर की, माना जा रहा है कि आगामी समय में होने वाले फेरबदल में उन पर गाज गिर सकती है। उन्होंने तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को नसीहत दे डाली है और उन्हें समय सीमा में कार्य को मूर्त रूप देने की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। दरअसल सरकारी विभागों में लेटलतीफी, अत्यधिक जरूरी मामलों को लंबित रखना और उन्हें योजनाबद्ध तरीके से मूर्त रूप नहीं देने से मुख्यमंत्री इन अधिकारियों से नाराज हैं। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में मुख्यमंत्री क्या एक्शन लेते हैं?
वन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में मनमानी
सिवनी सर्किल और पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, संजय टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, रीवा, भोपाल, ग्वालियर और शहडोल सर्किल में सीसीएफ का पद एक साल से अधिक समय से अतिरिक्त प्रभार में संचालित किया जा रहा है। अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का कोई प्रशासनिक मानदंड भी नहीं है। शीर्ष अधिकारियों के चहेते आईएफएस को प्रभार दिए जाने की मनचाही प्रक्रिया चल रही है। इसमें वरिष्ठता का ध्यान भी नहीं रखा जा रहा है। सबसे बड़ा उदाहरण सिवनी वन वृत का है। यहां अभी डीएफओ स्तर के अधिकारी को कैडर में दो पद शीर्ष सीसीएफ का प्रभार दिया गया है। इसकी प्रशासनिक गलियारों में आलोचना हो रही है।
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।