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Bhopal News: भोपाल-बीना-इटारसी रेल लाइन पर बड़ी सौगात, 237 KM की चौथी लाइन को कैबिनेट की मंजूरी,यह मिलेगा फायदा

Tue, 07 Oct 2025 07:54 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Tue, 07 Oct 2025 07:54 PM IST
सार

मंगलवार को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मध्य प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण विकास परियोजना को मंजूरी दी है। इटारसी-भोपाल-बीना के बीच 237 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। इस परियोजना की कुल लागत 4,329 करोड़ आंकी गई है।

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Bhopal News: A major gift for the Bhopal-Bina-Itarsi rail line, the cabinet approved the fourth line of 237 km
इटारसी-भोपाल-बीना रेल लाइन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मध्य प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण विकास परियोजना को मंजूरी दी है। इस फैसले के तहत इटारसी-भोपाल-बीना के बीच 237 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन परियोजना को हरी झंडी मिल गई है। इस परियोजना की कुल लागत 4,329 करोड़ आंकी गई है। यह परियोजना न केवल रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, बल्कि मध्य प्रदेश के लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्था पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। यह चौथी रेल लाइन पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल के लिए एक बड़ी सौगात मानी जा रही है।
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सीएम ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को किया धन्यवाद 
मध्यप्रदेश को मिली इस सौगात के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार मानते हुए धन्यवाद किया है। पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार इन परियोजनाओं का उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारक परामर्श द्वारा मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाना है। ये परियोजनाएं नागरिकों, वस्तुओं और सेवाओं को निर्बाध संपर्क प्रदान करेंगी।
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 परियोजना से होने वाले प्रमुख लाभ

 1. ट्रेन संचालन में तेजी और समय की बचत चौथी लाइन बनने से भीड़भाड़ और ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। वर्तमान में बीना-भोपाल-इटारसी खंड पर भारी ट्रैफिक है। नई लाइन से ट्रेन संचालन अधिक सुगम, समयबद्ध और कुशल होगा।
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 2. व्यापार और कृषि को मिलेगा बढ़ावा यह रूट कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, फ्लाई ऐश, स्टील जैसे माल के परिवहन में अहम भूमिका निभाता है। चौथी लाइन से मालगाड़ियों की संख्या और गति बढ़ेगी, जिससे स्थानीय उद्योग, कृषि उत्पादकता और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

 3. पर्यावरण संरक्षण में योगदान नई लाइन बनने से हर साल लगभग 139 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन की कमी होगी, जो 6 करोड़ पेड़ों के लगाने के बराबर है। साथ ही, यह रेलवे को और अधिक ऊर्जा कुशल व पर्यावरण-अनुकूल बनाएगा।

 4. पर्यटन को मिलेगा नया पंख यह रेल खंड सांची स्तूप, भीमबेटका, सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व, हजारा जलप्रपात और नवेगांव नेशनल पार्क जैसे विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से होकर गुजरता है। चौथी लाइन से यहां की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे देश-दुनिया से अधिक पर्यटक इन स्थलों तक पहुँच सकेंगे।

 5. 85 लाख से ज्यादा लोगों को सीधा फायदा परियोजना से 18 जिलों और 3,600 से अधिक गांवों को लाभ मिलेगा। इनमें विदिशा और राजनांदगांव जैसे आकांक्षी जिले भी शामिल हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।

6. रोजगार और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, क्षेत्र में स्वरोज़गार और लघु उद्योगों के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी के "आत्मनिर्भर भारत" मिशन की दिशा में एक मजबूत कदम है।


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 अन्य प्रमुख तथ्य

- कुल लागत: ₹4,329 करोड़
- माल ढुलाई क्षमता में वृद्धि: 78 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA)
- तेल आयात में बचत: 28 करोड़ लीटर प्रति वर्ष
- राज्यों को कवर: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़
- कुल दूरी बढ़ोतरी: 894 किमी रेलवे नेटवर्क में इज़ाफा

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पर्यटकों को करेगा आकर्षित
मध्यप्रदेश में परियोजना खंड सांची, सतपुड़ा बाघ अभयारण्य, प्रागैतिहासिक मानव जीवन के प्रमाणों और प्राचीन शैल चित्रकला के लिए प्रसिद्ध भीमबेटका शैलाश्रय, हज़ारा जलप्रपात, नवेगांव राष्ट्रीय उद्यान आदि प्रमुख स्थलों को भी रेल संपर्क प्रदान करेगा, जो देश भर के पर्यटकों को आकर्षित करेगा। यह कोयला, कंटेनर, सीमेंट, फ्लाई ऐश, खाद्यान्न, इस्पात आदि वस्तुओं के परिवहन के लिए भी आवश्यक मार्ग है। पटरियों की संख्या बढ़ाए जाने से प्रति वर्ष 78 मिलियन टन की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी। रेलवे के पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन देश के जलवायु लक्ष्यों और परिचालन लागत को कम करने, तेल आयात (28 करोड़ लीटर) में कमी लाने और कार्बन उत्सर्जन 139 करोड़ किलोग्राम कम करने में मदद करेगा जो 6 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।
 
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