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भोपाल मास्टर प्लान-2047:किसानों  ने खोला मोर्चा, करीब 10 हजार आपत्तियों के बाद सरकार के सामने नई चुनौती

Sun, 25 Oct 2026 10:04 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sun, 25 Oct 2026 10:04 AM IST
सार

भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर करीब 10 हजार दावे-आपत्तियों के बाद सरकार के सामने किसानों, कारोबारियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की चुनौती है। किसानों के विरोध और BIZ-2 क्षेत्र में जमीन के उपयोग पर विवाद के बीच मास्टर प्लान का प्रकाशन फिर अटकने की आशंका जताई जा रही है।
 

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Bhopal Master Plan 2047: Farmers Launch Protest, 10,000 Objections Pose New Challenge for Government
भोपाल का नक्शा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल के मास्टर प्लान-2047 पर किसानों और कारोबारियों की आपत्तियों ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब 10 हजार दावे और सुझाव मिलने के बाद अब इनके निराकरण के आधार पर मास्टर प्लान के प्रकाशन पर फैसला होगा। किसानों का विरोध बढ़ने से इसके एक बार फिर अटकने की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले भी मास्टर प्लान का प्रारूप तीन बार निरस्त किया जा चुका है। ऐसे में सरकार के सामने विकास की योजना को आगे बढ़ाने के साथ किसानों, कारोबारियों और पर्यावरण से जुड़े सवालों का समाधान करने की चुनौती है। मास्टर प्लान के प्रारूप में भोजताल प्रभाव क्षेत्र-2 (BIZ-2), जलग्रहण क्षेत्र, बफर जोन, नदी किनारे के क्षेत्र और ग्रीन बेल्ट में जमीन के इस्तेमाल को लेकर सबसे ज्यादा विरोध सामने आया है। किसानों को आशंका है कि इन श्रेणियों में जमीन शामिल होने से खेती और निर्माण संबंधी गतिविधियों पर पाबंदियां बढ़ेंगी। दूसरी ओर, कारोबारियों को मौजूदा बाजारों और व्यावसायिक गतिविधियों पर असर पड़ने की चिंता है। 
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किसानों के विरोध से राजनीतिक चुनौती
मास्टर प्लान के खिलाफ भारतीय किसान संघ ने भी आंदोलन शुरू किया है। भोपाल के आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसानों का बड़ा वर्ग भाजपा का समर्थक रहा है। हुजूर, बैरसिया और गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्रों में भी ग्रामीण मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। किसानों की प्रमुख आपत्ति जमीन के वर्गीकरण को लेकर है। उनका कहना है कि जिन जमीनों पर उन्होंने खेती या अन्य गतिविधियों की योजना बनाई है, उन्हें जलग्रहण क्षेत्र, भोजताल प्रभाव क्षेत्र, नदी किनारे या ग्रीन बेल्ट में शामिल किया जा रहा है। वहीं, किसानों का आरोप है कि उनसे खरीदी गई कुछ जमीनों को आवासीय या कम घनत्व वाले आवासीय क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है, जबकि उनके पास बची जमीन पर अलग तरह की पाबंदियां प्रस्तावित हैं। अब इसको लेकर किसान प्रस्तावित मास्टर प्लान के ड्राफ्ट का विरोध कर रहे हैं।  
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जलग्रहण क्षेत्र में निर्माण की अनुमति देना मुश्किल
मास्टर प्लान के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों की मांगों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की है। किसान चाहते हैं कि उन्हें अपनी जमीन पर निर्माण की अनुमति मिले। लेकिन सरकारी स्तर पर यह चिंता भी है कि जलग्रहण क्षेत्र में निर्माण की छूट देने से पर्यावरण संबंधी नियमों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष सरकार की स्थिति पर सवाल उठ सकते हैं।  वहीं, अधिकारियों का कहना है कि बड़े तालाब से दूर स्थित जलग्रहण क्षेत्र में भी निर्माण की अनुमति देना आसान नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में प्रतिबंधों को लेकर फैसला करते समय पर्यावरणीय नियमों को ध्यान में रखना होगा। इसलिए किसानों की मांगों पर विचार के बावजूद सभी क्षेत्रों में निर्माण की अनुमति मिलना संभव नहीं माना जा रहा है।

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BIZ-2 में सबसे ज्यादा आपत्तियां
मास्टर प्लान के प्रारूप पर मिली करीब 10 हजार आपत्तियों में लगभग 60 प्रतिशत का संबंध भोजताल प्रभाव क्षेत्र-2 (BIZ-2) से बताया गया है। यह क्षेत्र बड़े तालाब, केरवा और कलियासोत डेम के जलग्रहण क्षेत्रों से जुड़ा है। करीब 6 हजार आपत्तियां किसानों और कारोबारियों की ओर से आई हैं, जबकि लगभग 4 हजार आपत्तियां पर्यावरण कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, नागरिकों, बिल्डरों और कॉलोनाइजरों सहित अन्य पक्षों ने दी हैं। 78 गांवों के किसानों ने अपनी जमीन को नदी किनारे, वन क्षेत्र, ग्रीन बेल्ट और आरक्षित श्रेणियों में शामिल किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इससे जमीन के उपयोग और भविष्य में निर्माण की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। 


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व्यापारियों को मौजूदा कारोबार पर असर की चिंता
मास्टर प्लान का उद्देश्य आवासीय भू-उपयोग वाली जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना भी है। सरकार कारोबारियों को राहत देने के विकल्पों पर विचार कर रही थी, लेकिन इसी बीच किसानों का विरोध तेज हो गया। व्यापारी मौजूदा बाजारों में कारोबार जारी रखने, भू-उपयोग परिवर्तन, फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और शुल्क संबंधी नियमों में बदलाव की मांग कर रहे हैं। कुछ व्यापारिक संगठनों ने एकमुश्त पांच प्रतिशत शुल्क लेकर भू-उपयोग परिवर्तन की व्यवस्था करने और सीलिंग की कार्रवाई रोकने की मांग भी उठाई है। व्यापारियों का दावा है कि मौजूदा नियमों से करीब 40 हजार कारोबारी प्रभावित हो सकते हैं।

मिसरोद की सड़क और अवैध निर्माण नियमित करने पर भी सवाल
मिसरोद में प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क को लेकर भी स्थानीय लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है। खास तौर पर खसरा नंबर 205 को लेकर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, कोलार, बावड़िया कलां, रोहित नगर, रचना नगर और लालघाटी के रहवासियों ने जमीन के उपयोग और निर्माण संबंधी प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। उन्हें आशंका है कि प्रस्तावित व्यवस्था से कुछ अनधिकृत निर्माण नियमित हो सकते हैं। लोगों ने नियमों को सभी पर समान रूप से लागू करने की मांग की है। पर्यावरण से जुड़े लोगों ने जलग्रहण क्षेत्रों और वन भूमि के आसपास निर्माण को लेकर आपत्ति दर्ज कराई हैं। 

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तीन बार निरस्त हो चुका है मास्टर प्लान का प्रारूप
भोपाल के मास्टर प्लान का प्रारूप पहले भी तीन बार निरस्त किया जा चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में प्रकाशित प्रारूप निरस्त हुआ था। वर्ष 2020 में भाजपा की सरकार बनने के बाद भी चौहान के कार्यकाल में प्रारूप निरस्त किया गया। इसके बाद वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने भी मास्टर प्लान निरस्त कर दिया था। अब एक बार फिर किसानों के विरोध और विभिन्न पक्षों की आपत्तियों के बीच इसके प्रकाशन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि, अभी इसे रोकने या निरस्त करने का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। 

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आपत्तियों की जांच के बाद होगा फैसला
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा समाप्त हो चुकी है और अब उनकी जांच की जा रही है। इसके बाद सुनवाई समिति आपत्तियों की समीक्षा करेगी। इस प्रक्रिया में दो सप्ताह से अधिक समय लग सकता है। सुनवाई और जांच के बाद सरकार तय करेगी कि मास्टर प्लान के प्रारूप में क्या बदलाव किए जाएं और उसे किस रूप में प्रकाशित किया जाए। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार किसानों को कितनी राहत दे पाती है और जलग्रहण क्षेत्रों में पर्यावरणीय प्रतिबंधों को बनाए रखते हुए मास्टर प्लान को आगे बढ़ाने का रास्ता कैसे निकालती है।
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