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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   200 Years of Hindi Journalism: 'Pranam Udant Martand' Celebrations Begin; Discussion Held on Challenges Posed

हिंदी पत्रकारिता के 200 साल: शुरू हुआ प्रणाम उदन्त मार्तण्ड समारोह, AI और डिजिटल मीडिया की चुनौतियों पर चर्चा

Fri, 08 May 2026 08:25 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 08 May 2026 08:25 PM IST
सार

भोपाल के भारत भवन में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर तीन दिवसीय प्रणाम उदन्त मार्तण्ड समारोह समारोह शुरू हुआ। आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण ने कहा कि उदन्त मार्तण्ड ने 200 साल पहले ही हिंदुस्तानियों के हित के हेत के जरिए पत्रकारिता की दिशा तय कर दी थी। कार्यक्रम में पत्रकारिता, एआई और डिजिटल मीडिया की चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। 

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200 Years of Hindi Journalism: 'Pranam Udant Martand' Celebrations Begin; Discussion Held on Challenges Posed
प्रणाम उदन्त मार्तण्ड समारोह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर भोपाल के भारत भवन में शुक्रवार से तीन दिवसीय समारोह प्रणाम उदन्त मार्तण्ड शुरू हुआ। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय और वीर भारत न्यास के संयुक्त आयोजन में देशभर के पत्रकार, संपादक, लेखक, शिक्षाविद और विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम 10 मई तक चलेगा।
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हिंदुस्तानियों के हित के हेत ने तय की पत्रकारिता की दिशा
अयोध्या के हनुमत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण ने कहा कि हिंदी के पहले समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड ने 200 साल पहले ही पत्रकारिता का नैरेटिव तय कर दिया था। उन्होंने कहा कि पंडित युगलकिशोर शुक्ल ने हिंदुस्तानियों के हित के हेत लिखकर पत्रकारिता का उद्देश्य साफ कर दिया था कि पत्रकारिता समाज और देशहित के लिए होनी चाहिए। आचार्य ने कहा कि उदन्त का अर्थ समाचार और मार्त्तण्ड का अर्थ सूर्य होता है। जैसे सूरज लोगों को जगाता है, वैसे ही यह समाचार पत्र समाज को जगाने के लिए शुरू किया गया था।
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परिवार ही मनुष्य निर्माण की सबसे बड़ी प्रयोगशाला
विशेष सत्र उत्तिष्ठ भारत में आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण ने कहा कि परिवार मनुष्य निर्माण की सबसे मजबूत प्रयोगशाला है, लेकिन आज परिवारों में संवाद और विश्वास कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज लोग जीवन मूल्यों के बजाय बाजार के हिसाब से खुद को तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेनरेशन गैप केवल बहाना है, असली जरूरत परिवारों में संवाद बढ़ाने की है। आचार्य ने कहा कि संबंध तर्क से नहीं, निभाने की भावना से चलते हैं।
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प्रेम भोग नहीं, समर्पण है
प्रेम पर पूछे गए सवाल के जवाब में आचार्य ने कहा कि प्रेम केवल आकर्षण या भोग नहीं होता। माता-पिता बच्चों को जन्म से पहले से बिना स्वार्थ प्रेम देते हैं, इसलिए वे बच्चों का बुरा कभी नहीं सोच सकते। उन्होंने राम और सीता के प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान राम ने कभी सीता का परित्याग नहीं किया। लोगों को टीवी सीरियल और फिल्मों के बजाय मूल ग्रंथ पढ़कर धर्म को समझना चाहिए।

युवा वही जो अपनी ऊर्जा संभाल सके
आचार्य ने कहा कि युवा होने का मतलब केवल उम्र बढ़ना नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा और जिम्मेदारी को समझना है। अगर युवा अपनी शक्ति पहचान ले तो समाज और देश में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण ने कहा कि पत्रकार केवल खबर देने वाला नहीं, बल्कि समाज की नब्ज पहचानने वाला वैद्य होता है। पत्रकारिता का काम सत्ता या विपक्ष का झंडा उठाना नहीं, बल्कि सत्य और समाजहित की रक्षा करना है।

एआई और डीपफेक को बताया बड़ा खतरा
विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक पत्रकारिता के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सावधान रहने की सलाह देते हुए कहा कि गलत जानकारी और फर्जी कंटेंट से करियर और समाज दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

नेशन फर्स्टके सिद्धांत पर हो पत्रकारिता
पूर्व सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने कहा कि पहले पत्रकारिता एक मिशन हुआ करती थी। आज पत्रकारों को किसी विचारधारा से ऊपर उठकर “नेशन फर्स्ट” यानी राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, लेकिन सांस्कृतिक रूप से भी मजबूत बने रहना जरूरी है।

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दक्षिण भारत में भी मजबूत रही हिंदी पत्रकारिता
लेखक और प्राध्यापक डॉ. सी. जयशंकर बाबू ने कहा कि दक्षिण भारत में भी हिंदी पत्रकारिता की लंबी और मजबूत परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि तमिल और अन्य दक्षिण भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों में भी हिंदी को जगह मिलती रही है।


डिजिटल दौर में टीवी पत्रकारिता पर चर्चा
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण दुबे, बृजेश राजपूत, सलमान रावी, दीप्ति चौरसिया, सुधीर दीक्षित और अनुराग द्वारी ने डिजिटल दौर में टीवी पत्रकारिता की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बावजूद टीवी पत्रकारिता की विश्वसनीयता अभी भी बनी हुई है।

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पुस्तकों और समाचार पत्रों का हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों द्वारा तैयार पुस्तकों और समाचार पत्रों का भी विमोचन किया गया। इनमें माखन के लाल, कार्टून कथा, प्रणाम उदन्त मार्तण्ड, अभ्युदय और पहल शामिल हैं। कार्टून कथा में नौ कार्टूनिस्टों के कार्टून शामिल किए गए हैं, जबकि पहल ईरान, इजराइल और अमेरिका के युद्ध विषय पर आधारित प्रायोगिक समाचार पत्र है।
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