भोपाल गैस त्रासदी : एक पीड़िता की जुबानी, हमने अब तक जिंदा रखी है लड़ाई
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कल यानी तीन दिसंबर की तारीख उस त्रासदी की गवाह है जिसने हजारों लोगों की जान ले ली थी और इससे कहीं ज्यादा संख्या में लोगों को एक भयावह स्मृति दे दी जो उनके जेहन से कभी न उतर सकी। भोपाल में तीन दिसंबर 1984 को यूनियन कार्बाइड कंपनी के कारखाने से एक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था। आज भी इस त्रासदी से प्रभावित हुए लोगों से इसका जिक्र किया जाता है तो उनके मुंह से शब्दों से पहले आंखों से आंसू निकल पड़ते हैं।
इन्हीं पीड़ितों सें से एक हैं हाजरा बी। हाजरा बी ने इस त्रासदी में अपना पूरा परिवार खो दिया था, लेकिन अगर कुछ पाया तो संघर्ष करने का जज्बा। तब से अब तक केमिकल को पानी में मिलने से रोकने के लिए उन्होंने कई प्रदर्शन किए, कई लड़ाईयां लड़ीं। आज भी उनका संघर्ष जारी है। हाजरा बी का कहना है, 'हमने अब तक इस लड़ाई को जिंदा रखा है। हमने अपना खुद का एक संग्रहालय तैयार किया, इसमें इस घटना के कई पीड़ितों की तस्वीरें लगाई गई हैँ। इन तस्वीरों के साथ हमने उनकी यादों को और उन गीतों को सहेज रखा है जिन्हें संघर्ष के समय में हम गाया करते थे।'
हजरा बी बताती हैं कि कि सरकार ने इस बात के इंतजाम किए थे जिससे केमिकल सप्लाई वाले पानी में न मिले। लेकिन, फिर भी जब इसे उड़ेला जाता है, केमिकल भूगर्भीय जल में मिल ही जाता है। सरकार इस बात को मान नहीं रही थी। जिस पर हमने पांच महीने तक जंतर-मंतर में प्रदर्शन किया। इसके बाद इसकी जांच हुई और प्रदूषण की पुष्टि हुई।
Hazara Bi, victim: Govt made arrangements to stop chemicals from getting in water supply, yet when it pours, chemicals get mixed with ground water. Govt didn’t accept it, we protested at Jantar Mantar for 5 months, only after that it was investigated&contamination was confirmed. pic.twitter.com/xG9Q13n8CQ
— ANI (@ANI) December 2, 2018
