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MP News: रीवा में अफ्रीकन स्वाइन फीवर से 13 दिन में 2200 सूअरों की मौत, संक्रमित जानवरों को मारने के आदेश

Wed, 24 Aug 2022 11:09 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Wed, 24 Aug 2022 11:09 AM IST
सार

वायरस असम, नागालैंड, उत्तर प्रदेश से होते हुए मध्यप्रदेश के रीवा में दस्तक दे चुका है। उत्तराखंड में भी वायरस फैलने की बात कही जा रही है।

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2200 pigs died in 13 days due to African swine fever in Rewa, orders to kill infected animals
रीवा में फैला अफ्रीकन स्वाइन फीवर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश के रीवा शहर में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के अटैक से 13 दिनों में 2200 सूअरों की मौत हो गई है। तेजी से फैलते वायरस को देखते हुए जिला प्रशासन ने पशु चिकित्सा विभाग के साथ बैठक कर संक्रमित सूअरों को वैक्सीन लगाकर मारने का फैसला किया है। इसके लिए आदेश भी दिए हैं। सूअर पालकों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए विभाग ने मुआवजे का एलान किया है। जानकारी के अनुसार सूअर मालिकों को 100 रुपये से लेकर 150 रुपये किलो वजन के हिसाब से मुआवजा दिया  जाएगा। साथ ही सूअर पालकों को रोजगार मुहैया कराने के लिए भी शासन-प्रशासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
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पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक डॉ. राजेश मिश्रा ने बताया कि बड़ी संख्या में सूअरों की मौत होने के बाद वार्ड क्रमांक-15 से 11 सूअरों के सैंपल 14 अगस्त को कलेक्ट किए गए, जिन्हें 15 अगस्त को जांच के लिए भोपाल भेजा गया था। 17 और 18 अगस्त को भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान में सैंपलों की जांच की गई, जिसमें जानलेवा अफ्रीकन स्वाइन फीवर नाम के वायरस की पुष्टि हुई। यह वायरस असम, नागालैंड, उत्तर प्रदेश से होते हुए मध्यप्रदेश के रीवा में दस्तक दे चुका है। उत्तराखंड में भी वायरस फैलने की बात कही जा रही है।
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फिलहाल रीवा जिले के शहरी क्षेत्र में ही सूअरों में वायरस का प्रकोप देखा जा रहा है। एक सर्वे के मुताबिक अकेले रीवा शहर में 15 हजार सूअर हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के सूअरों को मिलाकर 30 हजार तक संख्या पहुंच जाती है। जानकारों के अनुसार अभी संक्रमण सिर्फ 300 से 500 सूअरों में फैला है, जिनको वैक्सीन लगाकर मारा जा रहा है। मंगलवार को 12 सूअरों को मारा गया है। चिह्नित सूअरों की बस्ती में घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है। अफ्रीकन स्वाइन फीवर वाले सूअरों में तेज बुखार, उल्टी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यदि संक्रमित सूअरों को नष्ट नहीं किया गया तो सभी सूअर वायरस के शिकार हो जाएंगे। 
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फिलहाल रीवा का वार्ड-15 अफ्रीकन स्वाइन फीवर का हॉटस्पॉट बना हुआ है। रतहरा बंसल बस्ती के 90 फीसदी सूअर वायरस की चपेट में हैं। इसे रेड जोन बनाकर एक किमी के दायरे में सभी सूअरों की जांच की जा रही है। स्वस्थ्य सूअरों को रोग से बचाव के लिए वैक्सीन लगाई जा रही है। शहर का वार्ड-15 डेंजर जोन में है, जबकि वार्ड-14, वार्ड-25 और वार्ड-26 के 90 से 95 फीसदी सूअर संक्रमित हैं। 41 वार्डों के सूअरों का सैंपल दूसरे चरण में लिया जाएगा। सूअर पालकों के अनुसार रीवा शहर के धोबिया टंकी, बिछिया नदी, नारायण चक्की, पांडेन टोला में भी बड़ी संख्या में सूअरों की मौत हुई है। वार्ड - 16, 21, 23, 30, 31, 32, 44 और 45 में भी सूअरों की मौत के मामले सामने आए हैं। नगर निगम द्वारा अफ्रीकन स्वाइन फीवर से मरने वाले सूअरों को उठाने के लिए 8 वाहन रिजर्व किए गए हैं।

 
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