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नई स्टार्टअप नीति को वेंचर फंड का मिला बड़ा सहारा, 250 करोड़ रुपये के निवेश के लिए मिले चार प्रस्ताव
Sat, 22 Aug 2020 11:20 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 22 Aug 2020 11:20 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : ANI
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योगी सरकार की नई स्टार्टअप नीति को वेंचर फंड का बड़ा सहारा मिला है। देश के प्रमुख वेंचर फंड्स और एआईएफ ने वेंचर फंड में निवेश के लिए दिलचस्पी दिखाई है। प्रारंभिक कार्पस फंड के लिए नियुक्त फंड मैनेजर सिडबी को अब तक 285 करोड़ रुपये के चार आवेदन मिले चुके हैं।
सिडबी और स्टार्टअप नोडल संस्था की इसी महीने होने वाली वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कमेटी की बैठक में आवेदनों पर निर्णय किया जाएगा। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि जिन स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स के प्रस्ताव पहले ही अनुमोदित हो चुके हैं, उनके लिए सरकार ने नोडल संस्था को 41 लाख रुपये जारी किए हैं।
इससे स्टार्टअप्स को भरण-पोषण भत्ते, व्यवसायीकरण के स्तर पर सीड कैपिटल सहायता और इनक्यूबेटर्स को उनके परिसर में आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए आर्थिक मदद की जाएगी। सरकार ने स्टार्टअप को उनकी परिकल्पना के स्तर के आधार पर फंडिंग, पेटेंट पंजीयन, घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में शामिल होने के लिए अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) की मदद से 150 करोड़ का कार्र्पस फंड स्थापित किया है।
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प्रदेश में 100 इनक्यूबेटर्स स्थापित होंगे
हर जिले में एक इनक्यूबेटर की स्थापना होगी। प्रदेश में कम से कम सौ इनक्यूबेटर स्थापित किए जाएंगे। लखनऊ में सबसे बड़े इनक्यूबेटर की स्थापना की जाएगी। इससे स्टार्टअप के विकास और सुदृढ़ ईको सिस्टम का निर्माण तेजी से किया जा सकेगा। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, हाईटेक इंस्टीट्यूट, एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज, कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज, जयपुरिया मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट जैसे अन्य शिक्षण संस्थानों ने इनक्यूबेटर की स्थापना का प्रस्ताव दिया है।
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सिडबी और स्टार्टअप नोडल संस्था की इसी महीने होने वाली वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कमेटी की बैठक में आवेदनों पर निर्णय किया जाएगा। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि जिन स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स के प्रस्ताव पहले ही अनुमोदित हो चुके हैं, उनके लिए सरकार ने नोडल संस्था को 41 लाख रुपये जारी किए हैं।
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इससे स्टार्टअप्स को भरण-पोषण भत्ते, व्यवसायीकरण के स्तर पर सीड कैपिटल सहायता और इनक्यूबेटर्स को उनके परिसर में आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए आर्थिक मदद की जाएगी। सरकार ने स्टार्टअप को उनकी परिकल्पना के स्तर के आधार पर फंडिंग, पेटेंट पंजीयन, घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में शामिल होने के लिए अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) की मदद से 150 करोड़ का कार्र्पस फंड स्थापित किया है।
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प्रदेश में 100 इनक्यूबेटर्स स्थापित होंगे
हर जिले में एक इनक्यूबेटर की स्थापना होगी। प्रदेश में कम से कम सौ इनक्यूबेटर स्थापित किए जाएंगे। लखनऊ में सबसे बड़े इनक्यूबेटर की स्थापना की जाएगी। इससे स्टार्टअप के विकास और सुदृढ़ ईको सिस्टम का निर्माण तेजी से किया जा सकेगा। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, हाईटेक इंस्टीट्यूट, एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज, कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज, जयपुरिया मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट जैसे अन्य शिक्षण संस्थानों ने इनक्यूबेटर की स्थापना का प्रस्ताव दिया है।
महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर्स को प्रोत्साहन
स्टार्ट अप नीति में महिलाओं, दिव्यांगजन और ट्रांसजेंडर्स को विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान है। उनके लिए रोजगार सृजन के अवसर भी सृजित करने का ध्यान रखा गया है। सरकार का दावा है कि इन समुदायों को व्यवसाय की मुख्य धारा में लाने के लिए देश में पहली बार अनूठी पहल की गई है।
बुंदेलखंड व पूर्वांचल के लिए विशेष छूट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पूर्वांचल और बुंदेलखंड में क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने पर जोर है। इसके तहत बुंदेलखंड और पूर्वांचल में स्टार्टअप और इनक्यूबेटर्स स्थापित करने पर विशेष छूट और अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। इससे पूरे प्रदेश में समान रूप से स्टार्टअप ईको सिस्टम स्थापित करने में मदद मिलेगी। अभी नोएडा जैसे शहरों में ही इसका वर्चस्व है।
बुंदेलखंड व पूर्वांचल के लिए विशेष छूट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पूर्वांचल और बुंदेलखंड में क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने पर जोर है। इसके तहत बुंदेलखंड और पूर्वांचल में स्टार्टअप और इनक्यूबेटर्स स्थापित करने पर विशेष छूट और अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। इससे पूरे प्रदेश में समान रूप से स्टार्टअप ईको सिस्टम स्थापित करने में मदद मिलेगी। अभी नोएडा जैसे शहरों में ही इसका वर्चस्व है।