सपा सरकार के एक और फैसले को योगी सरकार ने पलटा, नियमित करने का आदेश रद्द
-
- 1
-
Link Copied
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीजनल संग्रह अमीनों व अनुसेवकों को उम्र में छूट देकर नियमित नियुक्ति देने से जुड़ा शासनादेश रद्द कर दिया है।
सपा शासनकाल में यह कार्यवाही शुरू की गई थी। इसमें लखनऊ सहित कई जिलों के सीजनल कर्मी नियमित हुए थे। योगी सरकार के इस फैसले से सामयिक संग्रह अमीनों व सामयिक अनुसेवकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके नियमितीकरण की कार्यवाही जहां की तहां रुक गई है।
पिछली अखिलेश यादव सरकार ने सामयिक संग्रह अमीनों के लंबे धरना-प्रदर्शन और आंदोलन के बाद इन्हें नियमित करने का फैसला किया था। इसमें 45 वर्ष से अधिक उम्र वाले कर्मियों को उम्र में छूट देकर नियिमत करने की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई थी।
तत्कालीन सपा सरकार ने अपनी पूर्ववर्ती बसपा सरकार में 30 मई 2008 को जारी हुए एक शासनादेश का सहारा लिया था। तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व, बलविंदर कुमार की ओर से जारी इस शासनादेश में सामयिक संग्रह अमीनों/ सामयिक संग्रह अनुसेवकों को उम्र में छूट देकर नियमित करने की व्यवस्था है।
इसके मुताबिक ऐसे सामयिक संग्रह अमीन, जिनकी आयु चयन की कार्यवाही के समय 45 वर्ष से अधिक हो गई है और वे इस पद के लिए अन्य प्रावधानों के अनुसार योग्य हों तो प्रश्नगत रिक्तियों के सापेक्ष पदों को तब तक न भरा जाए जब तक 45 वर्ष से अधिक आयु के उपयुक्त पाए गए सामयिक संग्रह अमीनों की आयु सीमा में छूट दिए जाने के संबंध में शासन से केस-टू-केस बेसिस पर निर्देश जारी न कर दिए जाएं।
इस शासनादेश के हिसाब से सरकार ने 45 वर्ष से कम उम्र वालों के साथ 45 वर्ष से अधिक उम्र वाले कर्मियों को भी नियमित करने की कार्यवाही शुरू की। जिलों ने अधिक उम्र वाले कर्मियों को नियमित करने के लिए बाकायदा सरकार से सहमति ली और काफी कर्मी नियमित हो गए। लेकिन सभी जिलों में समयबद्ध ढंग से कार्यवाही न किए जाने से बड़ी संख्या में सीजनल कर्मी नियमित नहीं हो सके। इस बीच नई सरकार आ गई।
योगी सरकार ने अखिलेश सरकार के इस फैसले का परीक्षण किया और राजस्व विभाग की नियमावलियों के विपरीत होने का हवाला देते हुए नियमित करने से जुड़े शासनादेश को ही निरस्त करने का फैसला किया।
प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. रजनीश दुबे ने 30 मई 2008 के शासनादेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है। उन्होंने राजस्व विभाग की नियमावलियों में दी गई व्यवस्था के अनुसार सामयिक संग्रह अमीनों व सामयिक संग्रह अनुसेवकों के चयन का निर्देश दिया है।
योगी सरकार का तर्क
राजस्व विभाग की यूपी संग्रह अमीन सेवा नियमावली-1974, यथा संशोधित नियमावली-2015 तथा यूपी संग्रह अनुसेवक सेवा नियमावली-2004 तथा संशोधित नियमावली-2016 में सामयिक संग्रह अमीनों व सामयिक संग्रह अनुसेवकों के चयन के लिए विभागीय आवश्यकताओं के दृष्टिगत विशिष्ट नियमावली है।
इन दोनों नियमावलियों में अधिकतम आयु 45 वर्ष का प्रावधान किया गया है।
इन सेवा नियमावलियों में आयु सीमा को शिथिल करने की कोई व्यवस्था नहीं है। कार्मिक विभाग की वर्ष 1992 की आयु सीमा में शिथिलीकरण विषय सामान्य नियमावली है। इसमें राज्यपाल को अधिकतम आयु सीमा को शिथिल करने का अधिकार दिया गया है। राजस्व विभाग का 30 मई 2008 का शासनादेश, विभाग की दोनों सेवा नियमावलियों के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
डेढ़ हजार कर्मियों को झटका
शासन ने 30 सितंबर 2016 को कार्मिक विभाग की नियमावली-1992 के अंतर्गत शक्ति का प्रयोग कर 30 मई 2008 के राजस्व विभाग के शासनादेश की शर्तों के अंतर्गत इन सभी को नियमित करने के लिए उम्र में छूट दे दी। इसी तरह के करीब 1500 सीजनल अमीनों व अनुसेवकों को उम्र में छूट देकर नियमित करने का प्रस्ताव लंबित है।
इन 900 कर्मियों का क्या होगा?
प्रदेश में करीब 700 सामयिक संग्रह अमीन व 200 संग्रह अनुसेवक 30 मई 2008 के शासनादेश से आयु सीमा में छूट पाकर नियमित हो चुके हैं। अब उनका क्या होगा, नए शासनादेश में इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है।
वर्षों पद खाली रहे, नहीं हुई भर्ती, अब कहां जाएंगे ये कर्मी
जानकार बताते हैं कि सीजनल संग्रह अमीनों व अनुसेवकों को नियमित करने की व्यवस्था दशकों पहले से है, मगर लालफीताशाही के चलते समय से नियमित करने की कार्यवाही नहीं हुई। नतीजतन पद खाली पड़े रहे और कर्मियों को 25-30 साल की सेवा सीजनल कर्मी के तौर पर काटनी पड़ी। यदि समय-समय पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार यह कार्यवाही होती तो आयु सीमा में छूट देने की नौबत ही न आती।
जिलाधिकारियों ने तो उम्र में छूट देने की जरूरत बताई थी
योगी सरकार आने पर जिलाधिकारियों से पूछा गया था कि वसूली के लिए उपलब्ध मांग को देखते हुए कार्यरत नियमित कर्मियों के अतिरिक्त क्या सीजनल कर्मियों को आयु सीमा में छूट देकर नियमित रूप से तैनात किए जाने का औचित्य बनता है। इस पर ज्यादातर जिलों के डीएम ने उम्र में छूट देने की स्पष्ट संस्तुति की थी। इनमें लखनऊ व उन्नाव सहित कई जिलों के डीएम शामिल थे।
बढ़ेगी मुकदमेबाजी
जानकार बताते हैं कि सरकार के इस फैसले से मुकदमेबाजी बढ़ेगी। वजह, जिन सीजनल कर्मियों को नियमित करने पर सरकार ने रोक लगाई है, वे वर्षों से कार्यरत हैं। इसके अलावा उन्हीं के साथ के तमाम कर्मी दूसरे जिलों में नियमित हो गए हैं। ऐसे में नियमित होने से बच रहे कर्मी अब अदालत की शरण लेने को मजबूर होंगे।