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Lucknow News: पीरियड लीव नहीं, कार्यस्थल पर सुविधाएं हैं असली समाधान

Sun, 18 Jan 2026 02:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jan 2026 02:48 AM IST
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Workplace facilities, not period leave, are the real solution
लखनऊ विश्वविद्यालय
लखनऊ। महिलाओं के मासिक धर्म पर पीरियड लीव को समाधान मानने के बजाय यदि कार्यस्थलों पर आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं तो यह अधिक व्यावहारिक और समानता आधारित कदम होगा। लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय की ओर से किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि पीरियड लीव की व्यवस्था कई मामलों में महिलाओं के लिए आर्थिक नुकसान और कार्यस्थल पर भेदभाव का कारण बन सकती है।
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यह अध्ययन विधि संकाय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऋचा सक्सेना द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत 100 महिला कर्मचारियों के कार्यस्थलों पर किया गया। अध्ययन में मासिक धर्म के दौरान आने वाली चुनौतियों, मौजूदा नीतियों और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण किया गया।
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डॉ. सक्सेना ने बताया कि मासिक धर्म केवल महिलाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह ट्रांसजेंडर, इंटरसेक्स और नॉन-बाइनरी व्यक्तियों को भी प्रभावित करने वाली एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जिसे कार्यस्थल की नीतियों में संवेदनशीलता के साथ समझा जाना चाहिए।
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अध्ययन के अनुसार दो प्रमुख समस्याएं सामने आईं

- सुरक्षित जल, स्वच्छ शौचालय और सुलभ मासिक धर्म उत्पादों की कमी
- कार्यस्थलों पर सहयोगात्मक वातावरण और सुविधाओं का अभाव

अंतरराष्ट्रीय और भारतीय परिप्रेक्ष्य

डॉ. सक्सेना के अनुसार जापान, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, ताइवान, चीन और हाल ही में स्पेन जैसे देशों में पेड पीरियड लीव लागू है। भारत में वर्ष 2017 में संसद में पेश प्रस्ताव को वापस ले लिया गया था। हालांकि बिहार, केरल और दिल्ली जैसे राज्यों तथा कुछ निजी कंपनियों ने अपने स्तर पर मासिक धर्म अवकाश की व्यवस्था की है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से इस विषय पर मॉडल नीति तैयार करने का सुझाव भी दिया है।

लीव के विकल्प से हो सकता है नुकसान
अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि पीरियड लीव नीति को बिना समुचित सोच-विचार के लागू किया गया, तो यह लैंगिक समानता को नुकसान पहुंचा सकती है। खासकर निजी क्षेत्र में महिलाओं की नियुक्ति और पदोन्नति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।

अवकाश नहीं, सुविधाओं पर हो फोकस

अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि कार्यस्थलों पर सुरक्षित और स्वच्छ वॉशरूम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मासिक धर्म उत्पादों की आसान और सस्ती उपलब्धता सुनिश्चित हो। सामाजिक कलंक और मिथकों को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं।


कोट
मासिक धर्म महिला का निजी विषय है। बार-बार अवकाश के लिए सूचना देना कई बार असहज स्थिति पैदा करता है। इससे बेहतर है कि कार्यस्थलों पर सुविधाएं और संवेदनशीलता बढ़ाई जाए।

- डॉ. ऋचा सक्सेना, एसोसिएट प्रोफेसर, विधि संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय
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