लखनऊ मेट्रो के लिए अंडरग्राउंड रूट पर काम शुरू
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अंडरग्राउंड रूट पर लखनऊ मेट्रो ने सोमवार को भूमि पूजन के साथ विधिवत काम शुरू करा दिया। प्राथमिकता सेक्शन से आगे अब चारबाग से केडी सिंह बाबू स्टेडियम के बीच सबसे पहले सचिवालय पर मेट्रो स्टेशन और सुरंग की खोदाई के लिए टनल बोरिंग मशीन उतारने के लिए शाफ्ट का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए मेट्रो ने खोदाई शुरू करा दी।
सोमवार को लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) के निदेशकों ने भूमिगत रूट के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया। इस दौरान एमडी कुमार केशव के दिल्ली में होने की वजह से निदेशक वर्क्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर दलजीत सिंह और निदेशक वित्त महेंद्र कुमार ने भूमि पूजन संपन्न कराया।
निदेशक दलजीत सिंह ने बताया कि अब सचिवालय मेट्रो स्टेशन का निर्माण विधिवत रूप से शुरू करा दिया गया है। मेट्रो स्टेशन के निर्माण के साथ ही 20 गुणा 20 वर्गमीटर चौड़ाई का एक गड्ढा खोदकर शाफ्ट का निर्माण भी किया जाएगा। इस शाफ्ट से ही सुरंग की खुदाई के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) को अंदर उतारा जाना है।
लखनऊ मेट्रो का यह सबसे कठिन काम
दलजीत सिंह ने बताया कि नार्थ-साउथ कॉरिडोर पर लखनऊ मेट्रो का यह सबसे कठिन काम है। इसकी शुरूआत सचिवालय से की गई है।
भूमिगत रूट और तीन स्टेशनों के निर्माण पर 1190 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। तुर्की की कंपनी गुलेरमैक और टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को इसके लिए चुना गया है।
अगले चरण में बुधवार से हुसैनगंज और 20 अगस्त से हजरतगंज मेट्रो स्टेशन पर काम शुरू करा दिया जाएगा। इससे पहले यहां यूटिलिटी शिफ्टिंग का काम कराया जाएगा।
वहीं, सुरंग का निर्माण अभी सचिवालय से हजरतगंज मार्केट की तरफ चलेगा। इसके बाद सचिवालय से चारबाग के लिए खोदाई शुरू की जाएगी।
एलीवेटेड से कठिन होगी अंडरग्राउंड रूट की राह
- एलीवेटेड रूट से करीब तीन-चार गुना धीमी गति से भूमिगत रूट पर काम होगा।
- टीबीएम करेगी खोदाई, एक सुरंग ट्रेन के आने और दूसरी सुरंग ट्रेन के जाने केलिए बनेगी।
- सचिवालय भूमिगत रूट पर बनने वाला पहला स्टेशन होगा, इसके बाद हुसैनगंज और हजरतगंज का निर्माण शुरू होगा।
- सचिवालय को भूमिगत रूट पर काम का केंद्र बनाया गया है, यहां से सुरंग की खोदाई दो हिस्सों में बांटी गई है। पहले सचिवालय से केडी सिंह बाबू स्टेडियम, फिर सचिवालय से चारबाग स्टेशन।
- सुरंग करीब 13-16 मीटर गहरी होगी, वहीं मेट्रो स्टेशन 16-17 मीटर गहराई पर बनाए जाएंगे। इन भूमिगत स्टेशनों को सपोर्ट देने के लिए 24 मीटर गहरी डायफ्रॉम वॉल बनाई जाएगी। यह वॉल 80 सेमी. से एक मीटर मोटी होगी।