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बच्चों में गैरबराबरी खत्म करने को बनाया जिंदगी का मकसद

Sat, 29 Jun 2019 01:54 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jun 2019 01:54 AM IST
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work for poor children by Amrita das
फोटो---आरिफजी
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शख्सियत बेमिसाल
अमृता दास, कॅरिअर काउंसलर
बच्चों में गैरबराबरी खत्म करने को बनाया जिंदगी का मकसद
क्रिएटिव आइडिया को हकीकत में बदलने का हुनर जानने वाले बच्चों के लिए कॅरिअर बहुत आसान होता है।
ये कहना और मानना है कॅरिअर काउंसलर डॉ. अमृता दास का। इस फील्ड में पूरे मुल्क में एक खास पहचान रखने वाली डॉ. दास के सुझाए रास्ते पर चलकर कई विद्यार्थी आज सफलता के शिखर पर हैं। गरीब बच्चों को उनके सीमित साधनों में कॅरिअर के नए विकल्प बता कर बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा करने को उन्होंने जिंदगी का मकसद बना लिया है। पेश है उनसे हुई बातचीत के खास अंश:
मैं जब इस फील्ड में आई तो ज्यादातर लोगों के कॅरिअर काउंसलिग की फील्ड बिल्कुल नई थी। मुझे भी लोगों ने दूसरे विकल्प चुनने को कहा पर मैं डटी रही। मेरी प्रारंभिक शिक्षा लॉरेटो कॉन्वेंट और उसके बाद आईटी कॉलेज में हुई। एमए में टॉपर होने के साथ ही मुझे दो स्वर्ण पदक भी मिले। इसके बाद डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करने के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल स्टडीज (आईसीएसआर) की फेलोशिप से लंदन स्थित स्कूल ऑफ ओरियंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज चली गई।
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परिवार के बारे में
डॉक्टर अमृता दास बतातीं हैं, मेरा जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहां शिक्षा को बहुत अहमियत दी जाती थी। पिता एके दास उत्तर प्रदेश पुलिस के पहले डायरेक्टर जनरल थे। मां समाजसेविका और दादी डॉ. पीएन दास आईटी कॉलेज की पहली भारतीय प्रिंसिपल थीं। दादा केके दास भी आईसीएस अधिकारी थे और उत्तर प्रदेश में मुख्य सचिव के पद पर रह चुके थे।
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क्यों चुना काउंसलर का कॅरिअर
उस दौर में संचार क्रांति नहीं हुई थी, आईसीएसआर की जानकारी लेने के लिए मुझे बहुत भटकना पड़ा। मैंने निर्णय लिया कि जिस तरह से मुझे परेशान होना पड़ा, दूसरों को परेशान नहीं होने दूंगी। लंदन से लौटने पर नौकरी के कई प्रस्ताव थे। आखिरकार मैंने कॅरिअर काउंसिलग के क्षेत्र में जाने की इच्छा मां के सामने रखी। उन्होंने इसका स्वागत किया। चूंकि यह नया क्षेत्र था, इसलिए इसमें काम करना आसान नहीं था। अब देश ही नहीं बल्कि दुर्बई, मस्कट, नेपाल, चिटगांव समेत दुनिया के कई देशों में स्कूलों के साथ मिलकर छात्रों को सहीं कॅरिअर चुनने में मदद कर रही हूं।
गरीब बच्चों का बन रहीं सहारा
मैं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मैं निशुल्क परामर्श देती हूं। उन्हें गाइड करते समय मैं इस बात का खास ख्याल रखती हूं कि सीमित साधनों के बावजूद भी सफलता उनके कदम चूमे। गरीब तबके के लोग बेटों को तो पढ़ाते हैं, पर बेटियों को पढ़ाने में हिचकते हैं। मेरी कोशिश होती है कि ऐसे लोगों के दिमाग से असमानता की ये खाई पाट कर बेटी को भी बेटे के बराबर मौके दिला सकूं।

मेरे स्टूडेंट आगे बढ़ाएंगे मेरा मिशन
आजकल कॅरिअर के बहुत सारे नए विकल्प सामने हैं, पर बच्चों को उनका ज्ञान नहीं होता है। ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक सही विकल्प पहुंचे, इसके लिए मैंने कॅरिअर काउंसलिंग का एक डिप्लोमा कोर्स भी शुरू किया है। मेरे ये स्टूडेंट मेरा मिशन आगे बढ़ाएंगे, ऐसा मुझे विश्वास है।
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