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ऐ जिंदगी, मेरे हौसले तुझसे भी बड़े हैं...
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गौरी त्रिवेदी
लखनऊ। ‘हर रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़े हैं, ऐ जिंदगी देख मेरे हौसले तुझसे भी बड़े हैं।’ ये पंक्तियां वर्षा श्रीवास्तव, भानुमती, तुलसी सोनकर, पूनम सैनी और रिंकी सिंह जैसी उन सभी महिलाओं पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं जिन्होंने मुश्किलों के आगे घुटने टेकने के बजाय उनका डटकर सामना किया। ये महिलाएं राजधानी में डंडइया स्थित कोको पेट्रोल पंप पर काम करती हैं। खास बात है कि यहां काम करने वाली सभी महिलाएं हैं। उन्हें यहां पेट्रोल भरते देख वाहन चालकों को अचरज भी होता है। ...लेकिन उनके संघर्ष की कहानी से शायद ही कोई वाकिफ हो। हम आज आपको बता रहे हैं उनके यहां पहुंचने से पहले दुश्वारियों की कहानी, उन्हीं की जुबानी। मशहूर शायर राहत इंदौरी का ये शेर उनके जज्बात को बखूबी बयां करता है :
न हमसफर न किसी हमनशीं से निकलेगा,
हमारे पांव का कांटा हमीं से निकलेगा।
भानुमती
जिंदगी जितना तपाएगी, उतना निखरूंगी
मैं फैजाबाद की रहने वाली हूं। आर्थिक तंगी से परेशान होकर काम की तलाश में मां के साथ लखनऊ आ गई। जब यहां आई तो मुझे लोगों से बात करने में हिचक महसूस होती थी। किसी अनजान व्यक्ति से बात करने में घबराती थी। केवल हौसला लेकर आई थी और उसी के बल पर पेट्रोल पंप पर काम करने का फैसला किया। मैं इस पेट्रोल पंप पर काम करने वाली पहली महिला हूं। उसके बाद मुझे देखकर कई महिलाएं आ रही हैं। यहां का परिवेश अच्छा जिससे हमें काफी कुछ सीखने को मिला। हालांकि कई बार किसी कस्टमर के दुर्व्यवहार की वजह से हमारा आत्मविश्वास जब भी डगमगाता है तो हमारी सीनियर मैम उत्साह बढ़ाती हैं। मुझे पता है कि जिंदगी जितना तपाएगी, मैं उतना ही निखरकर सामने आऊंगी। कोको पेट्रोल पंप ने मुझमें आत्मविश्वास भरा है।
वर्षा श्रीवास्तव
कुछ भी हो, अपने पैरों पर खड़ी होकर रहूंगी
पूरी तरीके से महिलाओं की ओर से संचालित इस पेट्रोल पंप पर काम करके काफी खुश हूं। मैं इलाहाबाद की रहने वाली हूं। घर में पति हैं जो ड्राइवर हैं। घर खर्च और बेहतर जिंदगी के लिए यहां काम करने का निश्चय किया। मैं समझती हूं कि आज के दौर में महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होना बहुत जरूरी है। मैं उन तमाम महिलाओं से कहना चाहती हूं कि काम कोई भी हो, छोटा या बड़ा नहीं होता। जो महिलाएं फील्ड के काम से डरती हैं, वे हमें देखें। दिनभर खड़े होकर काम करना और हर प्रकार के व्यक्तियों से मिलना और उन्हें डील करना आसान नहीं होता लेकिन बुलंद इरादों से काम करना आसान हो जाता है।
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तुलसी सोनकर
कभी नहीं छोड़ी सीखने की ललक
मेरे पति के साथ दुर्घटना हो जाने के बाद परिवार में कोई ऐसा नहीं था जो हमें कमाकर खिला सके। ऐसे में मैंने हिम्मत जुटाकर काम करने का फैसला किया। घर की जिम्मेदारियों के साथ ही बाहर जाकर कमाना मुश्किल तो हैं लेकिन नामुमकिन नहीं। मेरा मानना है कि जीवन में हमेशा सीखने की ललक रहनी चाहिए। खासकर लड़कियों और महिलाओं को बाहर की दुनिया से भी रूबरू होना चाहिए, ताकि मुसीबत की घड़ी में वे अपने परिवार को संभाल सकें। पेट्रोल पंप पर रोज इतने सारे लोगों से मिलकर बहुत कुछ सीखने को मिलता है और यह मुझे संतुष्टि भी देता है। अब ऐसा कोई क्षेत्र बाकी नहीं है जहां महिलाएं अपनी योग्यता नहीं साबित कर रही हैं।
पूनम सैनी
पति ने साथ छोड़ा पर हिम्मत ने नहीं
मैं लखनऊ की ही रहने वाली हूं। मेरे अंदर हमेशा से कुछ न कुछ करने का जज्बा रहा है। पति ने जब साथ छोड़ दिया तो लगा कि जैसे जिंदगी में कुछ बचा ही नहीं लेकिन हिम्मत बनाए रखी। पति मुझे छोड़कर चला गया तो घर की जिम्मेदारियों को खुद संभाला। पेट्रोल पंप पर काम करने के दौरान काफी कुछ सीख रही हूं। आज खुश हूं कि दोहरी जिम्मेदारी निभाकर किसी पर निर्भर नहीं हूं।
रिंकी सिंह
अपनी तो कट गई, अब बच्चों की खातिर मेहनत
मैं बाराबंकी के हैदरगढ़ की रहने वाली हूं। मेरे जीवन में मुझे सशक्त बनाने वाले मेरे पति हैं। मैं कभी काम करना ही नहीं चाहती थी। बच्चों का भविष्य संवारने के लिए पति ने मुझे भी काम करने के लिए प्रेरित किया। हमें लगता है कि हमारी जिंदगी तो कैसे भी कट रही है लेकिन बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी है। नौकरी करके अच्छा महसूस होता है और लगता है कि मैं भी कुछ कर सकती हूं। पेट्रोल पंप पर महिलाओं के लिए नौकरी करना सरल नहीं है लेकिन यहां सीखने को भी बहुत मिला।
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लखनऊ। ‘हर रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़े हैं, ऐ जिंदगी देख मेरे हौसले तुझसे भी बड़े हैं।’ ये पंक्तियां वर्षा श्रीवास्तव, भानुमती, तुलसी सोनकर, पूनम सैनी और रिंकी सिंह जैसी उन सभी महिलाओं पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं जिन्होंने मुश्किलों के आगे घुटने टेकने के बजाय उनका डटकर सामना किया। ये महिलाएं राजधानी में डंडइया स्थित कोको पेट्रोल पंप पर काम करती हैं। खास बात है कि यहां काम करने वाली सभी महिलाएं हैं। उन्हें यहां पेट्रोल भरते देख वाहन चालकों को अचरज भी होता है। ...लेकिन उनके संघर्ष की कहानी से शायद ही कोई वाकिफ हो। हम आज आपको बता रहे हैं उनके यहां पहुंचने से पहले दुश्वारियों की कहानी, उन्हीं की जुबानी। मशहूर शायर राहत इंदौरी का ये शेर उनके जज्बात को बखूबी बयां करता है :
न हमसफर न किसी हमनशीं से निकलेगा,
हमारे पांव का कांटा हमीं से निकलेगा।
भानुमती
जिंदगी जितना तपाएगी, उतना निखरूंगी
मैं फैजाबाद की रहने वाली हूं। आर्थिक तंगी से परेशान होकर काम की तलाश में मां के साथ लखनऊ आ गई। जब यहां आई तो मुझे लोगों से बात करने में हिचक महसूस होती थी। किसी अनजान व्यक्ति से बात करने में घबराती थी। केवल हौसला लेकर आई थी और उसी के बल पर पेट्रोल पंप पर काम करने का फैसला किया। मैं इस पेट्रोल पंप पर काम करने वाली पहली महिला हूं। उसके बाद मुझे देखकर कई महिलाएं आ रही हैं। यहां का परिवेश अच्छा जिससे हमें काफी कुछ सीखने को मिला। हालांकि कई बार किसी कस्टमर के दुर्व्यवहार की वजह से हमारा आत्मविश्वास जब भी डगमगाता है तो हमारी सीनियर मैम उत्साह बढ़ाती हैं। मुझे पता है कि जिंदगी जितना तपाएगी, मैं उतना ही निखरकर सामने आऊंगी। कोको पेट्रोल पंप ने मुझमें आत्मविश्वास भरा है।
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वर्षा श्रीवास्तव
कुछ भी हो, अपने पैरों पर खड़ी होकर रहूंगी
पूरी तरीके से महिलाओं की ओर से संचालित इस पेट्रोल पंप पर काम करके काफी खुश हूं। मैं इलाहाबाद की रहने वाली हूं। घर में पति हैं जो ड्राइवर हैं। घर खर्च और बेहतर जिंदगी के लिए यहां काम करने का निश्चय किया। मैं समझती हूं कि आज के दौर में महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होना बहुत जरूरी है। मैं उन तमाम महिलाओं से कहना चाहती हूं कि काम कोई भी हो, छोटा या बड़ा नहीं होता। जो महिलाएं फील्ड के काम से डरती हैं, वे हमें देखें। दिनभर खड़े होकर काम करना और हर प्रकार के व्यक्तियों से मिलना और उन्हें डील करना आसान नहीं होता लेकिन बुलंद इरादों से काम करना आसान हो जाता है।
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तुलसी सोनकर
कभी नहीं छोड़ी सीखने की ललक
मेरे पति के साथ दुर्घटना हो जाने के बाद परिवार में कोई ऐसा नहीं था जो हमें कमाकर खिला सके। ऐसे में मैंने हिम्मत जुटाकर काम करने का फैसला किया। घर की जिम्मेदारियों के साथ ही बाहर जाकर कमाना मुश्किल तो हैं लेकिन नामुमकिन नहीं। मेरा मानना है कि जीवन में हमेशा सीखने की ललक रहनी चाहिए। खासकर लड़कियों और महिलाओं को बाहर की दुनिया से भी रूबरू होना चाहिए, ताकि मुसीबत की घड़ी में वे अपने परिवार को संभाल सकें। पेट्रोल पंप पर रोज इतने सारे लोगों से मिलकर बहुत कुछ सीखने को मिलता है और यह मुझे संतुष्टि भी देता है। अब ऐसा कोई क्षेत्र बाकी नहीं है जहां महिलाएं अपनी योग्यता नहीं साबित कर रही हैं।
पूनम सैनी
पति ने साथ छोड़ा पर हिम्मत ने नहीं
मैं लखनऊ की ही रहने वाली हूं। मेरे अंदर हमेशा से कुछ न कुछ करने का जज्बा रहा है। पति ने जब साथ छोड़ दिया तो लगा कि जैसे जिंदगी में कुछ बचा ही नहीं लेकिन हिम्मत बनाए रखी। पति मुझे छोड़कर चला गया तो घर की जिम्मेदारियों को खुद संभाला। पेट्रोल पंप पर काम करने के दौरान काफी कुछ सीख रही हूं। आज खुश हूं कि दोहरी जिम्मेदारी निभाकर किसी पर निर्भर नहीं हूं।
रिंकी सिंह
अपनी तो कट गई, अब बच्चों की खातिर मेहनत
मैं बाराबंकी के हैदरगढ़ की रहने वाली हूं। मेरे जीवन में मुझे सशक्त बनाने वाले मेरे पति हैं। मैं कभी काम करना ही नहीं चाहती थी। बच्चों का भविष्य संवारने के लिए पति ने मुझे भी काम करने के लिए प्रेरित किया। हमें लगता है कि हमारी जिंदगी तो कैसे भी कट रही है लेकिन बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी है। नौकरी करके अच्छा महसूस होता है और लगता है कि मैं भी कुछ कर सकती हूं। पेट्रोल पंप पर महिलाओं के लिए नौकरी करना सरल नहीं है लेकिन यहां सीखने को भी बहुत मिला।