पति नहीं आ सका तो बहू ने बेटा बन किया सास का अंतिम संस्कार, जब सुहाग भी उजड़ा तो...
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गोंडा के वजीरगंज के बभनी गांव में बीते दिनों सास को मुखाग्नि देने वाली बहू गुड़िया के पति की भी मौत मुंबई से लौटते समय सोमवार रात को ट्रेन में हो गई। इसकी खबर मिलते ही गुड़िया पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पहले सास और अब सुहाग को खोकर वह बेहाल हो गई है। यह दर्दनाक खबर पाकर पूरा गांव गुड़िया के दरवाजे पर जुट गया है।
बता दें कि सास को मुखाग्नि देने वाली बहू की खबर पाकर समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री और कमिश्नर उसके घर भी गये थे। सरकार और प्रशासन की ओर से सहायता दी गई थी। मंगलवार को सुबह गांव वालों ने बताया कि मुंबई से लौट रहे गुड़िया के पति राजित राम (36) की ट्रेन में ही मौत हो गई है।
बताया जाता है कि गुड़िया का पति बीमारी के कारण वहां के एक निजी अस्पताल में भर्ती था। इसीलिए मां को मुखाग्नि देने नही आ सका था, जिसके बाद पत्नी गुड़िया ने बेटे और बहू दोनों का फर्ज निभाते हुए मुखाग्नि दी थी।
प्रधान ने बताया कि पति राजितराम अपनी मां की मौत के सदमें से कई दिनों से अस्पताल में बेहोशी की हालत में था। जब उसे होश आया तो अपने घर आना चाहा। वह अपने दस वर्षीय बेटे आकाश के साथ लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस ट्रेन से घर को चल दिया। लखनऊ में ट्रेन में ही उसकी हालत ज्यादा बिगड़ी और बाराबंकी के पास ट्रेन में ही दम तोड़ दिया। पत्नी गुड़िया ने आज सास के बाद पति को भी अयोध्या में सरयू तट पर मुखाग्नि दी। गुड़िया के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
अब कोई सांत्वना देने वाला भी नहीं रहा
सास के अंतिम संस्कार के बाद उनके क्रियाकर्म के लिए वह संशाधन जुटा रही थी कि पति ने भी परलोक सिधार दिया। शायद इस तरह का वाकया किसी के साथ हुआ हो पर गुड़िया के आगे पीछे अब कोई सांत्वना देने वाला भी नहीं है।
चार बच्चों के पालनपोषण की जिम्मेदारी कंधे पर
राजितराम अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। राजितराम की पत्नी गुड़िया से चार संताने हैं। सबसे बड़ी बेटी है। बड़ी बेटी सरस्वती 14 वर्ष की है, जबकि इसके बाद बेटा आकाश दस वर्ष का है। यह अपने पिता के साथ मुंबई गया था। रास्ते में राजितराम की मौत हो गई। दूसरा बेटा विकास पांच वर्ष का तथा तीसरा बेटा प्रकाश मात्र डेढ़ वर्ष का है। गुड़िया की हालत बहुत ही दयनीय है। गरीबी के कारण राजितराम मुंबई में कमाने गया था।