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भारतीय शिक्षा बोर्ड से मिटाएंगे मैकाले के पाप को : बाबा रामदेव
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समारोह का संबोधित करते बाबा रामदेव और कुर्सी पर बैठीं माध्यमि शिक्षा मंत्री गुलाब देवी।
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ। राजधानी के गोलागंज में मंगलवार को भारतीय शिक्षा बोर्ड के प्रांतीय कार्यालय के उद्घाटन के दौरान शिक्षा व्यवस्था और उसकी दिशा को लेकर एक बार फिर ‘मैकाले मॉडल’ पर बहस तेज हो गई। योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि मैकाले ने जो पाप किया था उसे भारतीय शिक्षा बोर्ड के जरिये ही खत्म किया जा सकता है। आज 190 वर्ष बाद मैकाले के पाप को हम याद कर रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि 21वीं सदी में भारतीय शिक्षा बोर्ड से जो यात्रा प्रारंभ हुई है, वह नए भारत का निर्माण करेगी।
योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड से पढ़ने वाले बच्चे आतंकवादी नहीं बनेंगे। क्रूर नहीं होंगे। हिंसक नहीं होंगे। मानवीय संस्कृति की हत्या करने वाले नहीं होंगे। आज पूरी दुनिया की स्थिति शिक्षा को लेकर बेहद खराब हो चुकी है। आज की शिक्षा प्रणाली, जिसकी जड़ें लॉर्ड मैकाले की नीतियों में हैं, बच्चों को अपनी संस्कृति और संस्कारों से दूर कर रही है। मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से बच्चे डिजिटल लत के शिकार हो चुके हैं, जिसका असर उनके व्यवहार और मूल्यों पर साफ दिखाई दे रहा है। माता-पिता चिंतित हैं कि वर्तमान शिक्षा से उनका बच्चा क्या बनेगा, क्योंकि वह अपनी संस्कृति और परंपराओं को भूलता जा रहा है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने भी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में दी जा रही शिक्षा दिशाहीन होती जा रही है और बच्चों को पाश्चात्य संस्कृति की ओर प्रेरित कर रही है। आज के बच्चे अपने माता-पिता को सुबह उठकर प्रणाम करना तक भूल रहे हैं। क्या हमने ऐसी शिक्षा की कल्पना की थी? उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार भारतीय शिक्षा बोर्ड को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। इस अवसर पर डॉ. महेंद्र सिंह, अवध ओझा, आचार्य स्वदेश, साध्वी देवप्रिया, पुष्कर द्विवेदी, राकेश और संत आलोक दास सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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महिलाओं को दया का पात्र न समझें : रामदेव
बाबा रामदेव ने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग थी। महिलाएं पराक्रम, शौर्य, वीरता और स्वाभिमान से समाज और देश की तरक्की में 50 प्रतिशत का योगदान दे रही हैं। अगर उन्हें 33 प्रतिशत का आरक्षण नहीं मिला तो वो खुद 50 प्रतिशत आरक्षण ले लेंगी। महिलाओं को दया का पात्र नहीं समझना चाहिए।
योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड से पढ़ने वाले बच्चे आतंकवादी नहीं बनेंगे। क्रूर नहीं होंगे। हिंसक नहीं होंगे। मानवीय संस्कृति की हत्या करने वाले नहीं होंगे। आज पूरी दुनिया की स्थिति शिक्षा को लेकर बेहद खराब हो चुकी है। आज की शिक्षा प्रणाली, जिसकी जड़ें लॉर्ड मैकाले की नीतियों में हैं, बच्चों को अपनी संस्कृति और संस्कारों से दूर कर रही है। मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से बच्चे डिजिटल लत के शिकार हो चुके हैं, जिसका असर उनके व्यवहार और मूल्यों पर साफ दिखाई दे रहा है। माता-पिता चिंतित हैं कि वर्तमान शिक्षा से उनका बच्चा क्या बनेगा, क्योंकि वह अपनी संस्कृति और परंपराओं को भूलता जा रहा है।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने भी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में दी जा रही शिक्षा दिशाहीन होती जा रही है और बच्चों को पाश्चात्य संस्कृति की ओर प्रेरित कर रही है। आज के बच्चे अपने माता-पिता को सुबह उठकर प्रणाम करना तक भूल रहे हैं। क्या हमने ऐसी शिक्षा की कल्पना की थी? उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार भारतीय शिक्षा बोर्ड को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। इस अवसर पर डॉ. महेंद्र सिंह, अवध ओझा, आचार्य स्वदेश, साध्वी देवप्रिया, पुष्कर द्विवेदी, राकेश और संत आलोक दास सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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महिलाओं को दया का पात्र न समझें : रामदेव
बाबा रामदेव ने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग थी। महिलाएं पराक्रम, शौर्य, वीरता और स्वाभिमान से समाज और देश की तरक्की में 50 प्रतिशत का योगदान दे रही हैं। अगर उन्हें 33 प्रतिशत का आरक्षण नहीं मिला तो वो खुद 50 प्रतिशत आरक्षण ले लेंगी। महिलाओं को दया का पात्र नहीं समझना चाहिए।