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वसंत पंचमी कब? खत्म हुआ भ्रम, जानिए कब कर सकते हैं पूजा और दान; ये है पूजन और स्नान का शुभ मूर्हूत

Sun, 02 Feb 2025 08:28 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
अमर उजाला, सिटी रिपोर्टर, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 02 Feb 2025 08:28 AM IST
सार

vasant Panchami: इस बार वसंत पंचमी कब है इस बात का भ्रम बना हुआ है। कुछ जगहों पर यह दो फरवरी को मनाया जा रहा है, कहीं पर तीन फरवरी को। 
 

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When is Vasant Panchami? Confusion is over, know when you can do worship and donation; This is the auspicious
वसंत पंचमी राशि अनुसार उपाय - फोटो : amar ujala

विस्तार

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। अबूझ मुहूर्त होने की वजह से इस दिन विवाह, ग्रह प्रवेश, विद्यारंभ, वाहन खरीदना आदि कार्य शुभ माने जाते हैं लेकिन इस वर्ष पंचमी तिथि और मुहूर्त को लेकर लोगों में भ्रम है।

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तिथि एवं शुभ मुहूर्त
द्रग पंचाग और चिंताहरण पंचाग के अनुसार वसंत पंचमी तिथि का आरंभ 2 फरवरी को सुबह 9:14 पर होगा और समापन 3 फरवरी को सूर्याेदय होते ही सुबह 6:52 बजे पर होगा। वहीं काशी पंचाग के अनुसार पंचमी तिथि 2 फरवरी को 11.53 बजे लगेगी और 3 फरवरी को 9.36 पर समाप्त हो जाएगी। अलीगंज स्थित स्वास्तिक ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि 2 फरवरी को पंचमी मनाना श्रेष्ठ रहेगा। इस दिन चंद्रमा मीन राशि व उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में होगा। साथ ही शिव और सिद्ध योग का शुभ संयोग भी रहेगा।
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कुछ क्षेत्रों में उदया तिथि के अनुसार त्योहार मनाने की परंपरा है जिसके अनुसार बसंत पंचमी 3 फरवरी, सोमवार को भी मनाई जा सकती है। हालांकि पंचांग के अनुसार 2 फरवरी को पंचमी तिथि का मध्याह्न काल में होना इसे अधिक उपयुक्त बनाता है।'''' -पंडित अनुराग मिश्रा (शनि मंदिर कुड़ियाघाट)

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ये है पूजा विधि

पंडित प्रशांत द्विवेदी पंकज ने बताया इस दिन को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। नामकरण, अन्नप्राशन, कर्णवेधन, मुंडन, पाटी पूजन जैसे संस्कारों के लिए यह दिन शुभ है। सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल पर पीला वस्त्र बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। कलश स्थापना, भगवान गणेश और नवग्रह की पूजा के बाद मां सरस्वती की विधिपूर्वक पूजा करें। इसके बाद मां को पीले फल, मिष्ठान्न और पीले फूल अर्पित करें। साथ ही संगीत वाद्य यंत्रों का पूजन करें और मां सरस्वती की आरती करें।

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