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Lucknow News: .....हम आंखों में हमारी सिर्फ हिंदुस्तान रखते हैं
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कवियों को सम्मानित किया गया।
लखनऊ। उर्दू अकादमी के प्रेक्षागृह में बुधवार को सजी कवि सम्मेलन और मुशायरे की महफिल वतन परस्ती के जज्बे से रोशन रही। गणतंत्रोत्सव के मंच पर कवियों और शायरों ने अपने कलाम से दर्शकों में देशभक्ति का जोश भर दिया।
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान और पाठशाला फाउंडेशन की ओर से गोमतीनगर स्थित उर्दू अकादमी के प्रेक्षागृह में आयोजित गणतंत्रोत्सव अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में मालविका हरिओम ने डिगा पाए न कोई वो अटल ईमान रखते हैं, वतन के वास्ते हाजिर हमेशा जान रखते हैं, भले रखती हो दुनिया अपनी आंखों में बड़े सपने, हम आंखों में हमारी सिर्फ हिंदुस्तान रखते हैं...पढ़कर माहौल में देशभक्ति का जज्बा भरा। लोकेश त्रिपाठी ने पढ़ा कि मैंने जो भी यहां पर पाया है, सब तेरी रहमतों का साया है। हैं सितारे यहां हर इक सफ में ख्वाब सच होने का दिन आया है...।
बलवंत सिंह ने वफादारी और दगाबाजी को अपने अंदाज में पेश करते हुए पढ़ा, कुछ मिले ताज या एजाज नहीं आएंगे, मेरे होंठों पर तेरे राज नहीं आएंगे, इसमें बनती है जगह सिर्फ वफादारों की, दिल के हुजरे में दगाबाज नहीं आएंगे...। आरिफ बस्तवी ने यह तिरंगा मेरा, आपकी शान है, इसमें हर धर्म का, केवल पैगाम है। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई संग रहें, यही भारत की भूमि का पैगाम है....पढ़कर खूब तालियां बटोरीं।
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शकील जौनपुरी ने सदा-सदा सुनकर चले आओ मेरी तकदीर बन जाओ, मैं पलके फिर बिछा दूंगा मेरी जागीर बन जाओ, नहीं तुम बिन कोई ऐसा जो समझे इस हकीकत को, लिखूं तुम पर गजल और तुम मेरी तहरीर बन जाओ...पढ़ा तो दर्शक वाह-वाह कर उठे। सलमान जफर ने पढ़ा कि मेरे सजदों के निशां गौर से देखे कोई, नक्शा-ए-हिंद बना है मेरी पेशानी पर....। महफिल में अभिश्रेष्ठ तिवारी, डॉ. आसिम मकनपुरी, गुले सबा फतेहपुरी, विनय प्रकाश मिश्र ने भी कलाम पेश किए।
संचालन शहबाज तालिब और अध्यक्षता माध्यमिक शिक्षा के निदेशक डा. महेंद्र देव ने की। मुख्य अतिथि के रूप में विधान परिषद सदस्य लालजी निर्मल मौजूद रहे। इस मौके पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निदेशक राज बहादुर और कार्यक्रम के संयोजक आकाश अवस्थी ने सभी लोगों का स्मृति चिह्न दिया।
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उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान और पाठशाला फाउंडेशन की ओर से गोमतीनगर स्थित उर्दू अकादमी के प्रेक्षागृह में आयोजित गणतंत्रोत्सव अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में मालविका हरिओम ने डिगा पाए न कोई वो अटल ईमान रखते हैं, वतन के वास्ते हाजिर हमेशा जान रखते हैं, भले रखती हो दुनिया अपनी आंखों में बड़े सपने, हम आंखों में हमारी सिर्फ हिंदुस्तान रखते हैं...पढ़कर माहौल में देशभक्ति का जज्बा भरा। लोकेश त्रिपाठी ने पढ़ा कि मैंने जो भी यहां पर पाया है, सब तेरी रहमतों का साया है। हैं सितारे यहां हर इक सफ में ख्वाब सच होने का दिन आया है...।
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बलवंत सिंह ने वफादारी और दगाबाजी को अपने अंदाज में पेश करते हुए पढ़ा, कुछ मिले ताज या एजाज नहीं आएंगे, मेरे होंठों पर तेरे राज नहीं आएंगे, इसमें बनती है जगह सिर्फ वफादारों की, दिल के हुजरे में दगाबाज नहीं आएंगे...। आरिफ बस्तवी ने यह तिरंगा मेरा, आपकी शान है, इसमें हर धर्म का, केवल पैगाम है। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई संग रहें, यही भारत की भूमि का पैगाम है....पढ़कर खूब तालियां बटोरीं।
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शकील जौनपुरी ने सदा-सदा सुनकर चले आओ मेरी तकदीर बन जाओ, मैं पलके फिर बिछा दूंगा मेरी जागीर बन जाओ, नहीं तुम बिन कोई ऐसा जो समझे इस हकीकत को, लिखूं तुम पर गजल और तुम मेरी तहरीर बन जाओ...पढ़ा तो दर्शक वाह-वाह कर उठे। सलमान जफर ने पढ़ा कि मेरे सजदों के निशां गौर से देखे कोई, नक्शा-ए-हिंद बना है मेरी पेशानी पर....। महफिल में अभिश्रेष्ठ तिवारी, डॉ. आसिम मकनपुरी, गुले सबा फतेहपुरी, विनय प्रकाश मिश्र ने भी कलाम पेश किए।
संचालन शहबाज तालिब और अध्यक्षता माध्यमिक शिक्षा के निदेशक डा. महेंद्र देव ने की। मुख्य अतिथि के रूप में विधान परिषद सदस्य लालजी निर्मल मौजूद रहे। इस मौके पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निदेशक राज बहादुर और कार्यक्रम के संयोजक आकाश अवस्थी ने सभी लोगों का स्मृति चिह्न दिया।