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बेड खाली फिर भी इलाज के लिए घंटों इंतजार
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केस वन ब्रेन हेमरेज के बावजूद नहीं किया भर्ती जौनपुर निवासी आलोक की मां को ब्रेन हेमरेज हो गया था। वह बृहस्पतिवार को बीएचयू से रेफर होकर पीजीआई पहुंचे। यहां इमरजेंसी में बताया गया कि बेड नहीं है। शुक्रवार दोपहर तक इंतजार करने के बाद भी बेड का इंतजाम नहीं हो सका। ऐसे में परिजन मरीज को लेकर लोहिया संस्थान गए, जहां शनिवार तक होल्डिंग एरिया में जगह नहीं मिली। निराश होकर तीमारदार शनिवार को मरीज को निजी अस्पताल ले गए। जहां कोरोना की जांच के लिए सैंपल लिया गया। केस दो एक दिन बाद मिला बेड उन्नाव से रेफर होकर आई श्रद्धा (50) को केजीएमयू के होल्डिंग एरिया में एक दिन इंतजार करना पड़ा। दूसरे दिन उन्हें जगह मिली और तब जाकर सैंपल लिया जा सका। फिलहाल श्रद्धा की कोराना की रिपोर्ट शनिवार को निगेटिव आई है। ऐसी स्थिति में उनका इलाज शुरू हो गया है। लखनऊ। लॉकडाउन खुलने के बाद राजधानी के अस्पतालों में पड़ोसी जिलों के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। हालत यह है कि कोविड की जांच के लिए होल्डिंग एरिया में लाइन लग गई है। ऐसी स्थिति में मरीज घंटों बिना इलाज तड़पने को मजबूर हैं। जबकि अस्पतालों में बेड खाली हैं। लेकिन होल्डिंग एरिया में बेड न होने की स्थिति में मरीजों को लौटना पड़ रहा है। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में सबसे ज्यादा मरीजों की भीड़ लगी है। यहां ट्रॉमा सेंटर के सामने बाल मानसिक रोग विभाग की ओपीडी को होल्डिंग एरिया बनाया गया है। यहां करीब ढाई सौ से अधिक बेड का इंतजाम है। ट्रामा के सीएमएस डॉ. संतोष कुमार का कहना है कि तीन दिन से यहां 500 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। ऐसे में व्यवस्था बनाए रखना चुनौती है। विभिन्न जिलों से हल्की बीमारी के मरीज भी केजीएमयू रेफर कर दिए जा रहे हैं। होल्डिंग एरिया मरीजों से भरा हुआ है। सैंपल लेने की संख्या बढ़ती जा रही है, फिर भी समस्या जस की तस है। ऐसी स्थिति में कई बार मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। विभिन्न विभागों में खाली हैं बेड केजीएमयू में करीब 45 सौ बेड हैं। पिछले दिनों 70 फीसदी से ज्यादा बेड खाली कर दिए गए। क्योंकि आशंका थी कि कोरोना मरीज अचानक बढ़ सकते हैं। लेकिन लॉकडाउन की वजह से मरीज नहीं आए। अब ट्रॉमा में मरीजों की भीड़ जुटी है। सीएमएस प्रोफेसर एसएन शंखवार ने बताया कि सभी विभागाध्यक्ष को मरीजों को भर्ती करने का निर्देश दिया गया है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भर्ती भी किया जा रहा है। लेकिन गाइड लाइन में कोविड-19 अनिवार्य कर दी गई है। यहां आने वाले ज्यादा से ज्यादा मरीजों को भर्ती करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि सिर्फ गंभीर मरीज रेफर किए जाएं तो व्यवस्था बनाए रखने में आसानी होगी। लोहिया संस्थान में दोपहर बाद फुल हो गया होल्डिंग एरिया करीब 1000 बेड वाले लोहिया संस्थान की इमरजेंसी का भी बुरा हाल है। यहां शनिवार दोपहर बाद होल्डिंग एरिया में मरीजों को भर्ती करने की जगह नहीं बची थी। करीब डेढ़ सौ मरीज भर्ती होने के बाद तमाम मरीज गेट तक वाहनों में पड़े रहे। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर उन्हें बेड खाली होने पर भर्ती करने का आश्वासन देते रहे। निदेशक प्रोफेसर एके त्रिपाठी का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को भर्ती कर इलाज देने का प्रयास किया जा रहा है। होल्डिंग एरिया में बेडों की संख्या भी बढ़ाई गई है, लेकिन मरीज तेज से बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में सोमवार को टीम के साथ बैठक करके हॉस्पिटल ब्लॉक में होल्डिंग एरिया को बढ़ाने की रणनीति बनाई जाएगी। अभी रेड और ग्रीन जोन में बांटकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। पीजीआई का भी बुरा हाल केजीएमयू, लोहिया संस्थान की तरह ही पीजीआई में भी इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की लाइन लगी है। पीजीआई में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए पुरानी ओपीडी को होल्डिंग एरिया बनाया गया है। लेकिन तीन दिन से होल्डिंग एरिया में भीड़ बढ़ती जा रही है। यहां सुबह से शाम तक लोग वाहनों में पड़े बेड मिलने का इंतजार कर रहे हैं। बेड नहीं होने की स्थिति में केजीएमयू और लोहिया संस्थान के चक्कर काटते रहते हैं।
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