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Lucknow News: इमरजेंसी में भर्ती का इंतजार, गर्भवती का बढ़ा रहा दर्द
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इमरजेंसी के गेट पर खड़ीं गर्भवतीं।
लखनऊ। वीरांगना अवंतीबाई महिला अस्पताल (डफरिन) की इमरजेंसी में गर्भवतियों को भर्ती के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। डेढ़ से दो घंटे के इंतजार के बाद वह भर्ती हो पा रही हैं। इमरजेंसी में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में उनका दर्द और भी बढ़ रहा है। इसे लेकर तीमारदारों में काफी रोष है। डफरिन 326 बेड की क्षमता का अस्पताल है। 24 घंटे इमरजेंसी का संचालन हो रहा है। इमरजेंसी में 12 बेड हैं। हर दिन औसतन 25-30 सामान्य और सिजेरियन प्रसव भी होते हैं।
डेट मिली, मगर भर्ती होने में लग गया एक घंटा
बालागंज की रहने वाली गर्भवती अंजलि को भर्ती के लिए शनिवार को डेट मिली थी। वह पति के साथ दोपहर करीब 12 बजे इमरजेंसी पहुंचीं। वहां एक घंटे तक वह इंतजार करती रहीं। पति चिकित्सक और स्टाफ से जल्द भर्ती करने के लिए मिन्नत करते रहे। एक घंटे बाद अंजलि कोभर्ती के लिए इमरजेंसी के अंदर बुलाया गया।
सुबह आईं और दोपहर के बाद आया नंबर
खदरा मदेयगंज की रहने वाली प्रसूता नाजिया की नॉर्मल डिलवरी डफरिन अस्पताल में हफ्ते भर पहले हुई थी। प्रसव के बाद अस्पताल से उनकी छुट्टी हो गई थी। इस दौरान प्रसूता को लगाए गए टांके खुल गए थे। दर्द उठने पर वह पति के साथ सुबह 10 बजे इमरजेंसी आई थीं। दोपहर डेढ़ बजे तक प्रसूता को इमरजेंसी के अंदर नहीं बुलाया गया। वह नवजात बच्चे को लेकर इमरजेंसी के बाहर पड़ी कुर्सी पर बैठी इंतजार करती रहीं। पति सुफियान ने बताया कि चार घंटे के इंतजार के बाद इमरजेंसी में बुलाया गया।
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Iइमरजेंसी में गर्भवती के भर्ती होने में देरी होने के आरोप बेबुनियाद हैं। इमरजेंसी में मेडिकल अफसर गर्भवती की जांच-पड़ताल करते हैं। इस दौरान थोड़ा वक्त लगता है। फिलहाल मामले को दिखवाया जाएगा।I
I- डॉ. ज्योति मेहरोत्रा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, डफरिन अस्पतालI
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डेट मिली, मगर भर्ती होने में लग गया एक घंटा
बालागंज की रहने वाली गर्भवती अंजलि को भर्ती के लिए शनिवार को डेट मिली थी। वह पति के साथ दोपहर करीब 12 बजे इमरजेंसी पहुंचीं। वहां एक घंटे तक वह इंतजार करती रहीं। पति चिकित्सक और स्टाफ से जल्द भर्ती करने के लिए मिन्नत करते रहे। एक घंटे बाद अंजलि कोभर्ती के लिए इमरजेंसी के अंदर बुलाया गया।
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सुबह आईं और दोपहर के बाद आया नंबर
खदरा मदेयगंज की रहने वाली प्रसूता नाजिया की नॉर्मल डिलवरी डफरिन अस्पताल में हफ्ते भर पहले हुई थी। प्रसव के बाद अस्पताल से उनकी छुट्टी हो गई थी। इस दौरान प्रसूता को लगाए गए टांके खुल गए थे। दर्द उठने पर वह पति के साथ सुबह 10 बजे इमरजेंसी आई थीं। दोपहर डेढ़ बजे तक प्रसूता को इमरजेंसी के अंदर नहीं बुलाया गया। वह नवजात बच्चे को लेकर इमरजेंसी के बाहर पड़ी कुर्सी पर बैठी इंतजार करती रहीं। पति सुफियान ने बताया कि चार घंटे के इंतजार के बाद इमरजेंसी में बुलाया गया।
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Iइमरजेंसी में गर्भवती के भर्ती होने में देरी होने के आरोप बेबुनियाद हैं। इमरजेंसी में मेडिकल अफसर गर्भवती की जांच-पड़ताल करते हैं। इस दौरान थोड़ा वक्त लगता है। फिलहाल मामले को दिखवाया जाएगा।I
I- डॉ. ज्योति मेहरोत्रा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, डफरिन अस्पतालI

इमरजेंसी के गेट पर खड़ीं गर्भवतीं।