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लखनऊ विश्वविद्यालय में नहीं खुला वर्चुअल क्लासरूम का ताला
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लविवि का वर्चुअल क्लासरूम।
- फोटो : LKO CITY
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लखनऊ। कोरोना संक्रमण की वजह से क्लासरूम टीचिंग लंबे समय तक ठप रही। ऑनलाइन क्लास और वीडियो लेक्चर के सहारे पढ़ाई की गाड़ी चलती रही। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन भी ज्यादा से ज्यादा ई-कंटेंट और वीडियो लेक्चर तैयार करने पर जोर दे रहा है। वहीं दूसरी ओर 1.67 करोड़ रुपये की लागत से बने वर्चुअल क्लासरूम पर आज भी ताला पड़ा हुआ है। लविवि में इसके माध्यम से ई-कंटेंट तैयार किया जा सकता है। इसके बावजूद लविवि में इसकी ओर ध्यान तक नहीं दिया जा रहा है।
वर्चुअल क्लासरूम का उद्घाटन वर्ष 2011 में हुआ था। उद्घाटन के बाद से ही इस पर ताला पड़ा हुआ है। वर्चुअल क्लासरूम में लविवि के विद्यार्थी अन्य विवि की ऑनलाइन और रिकॉर्डेड कक्षाओं की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इसमें वीडियो लेक्चर तैयार करने की व्यवस्था भी है। इस क्लासरूम के माध्यम से स्टूडेंट्स किसी संस्थान में हो रहे लेक्चर को देख व सुन सकते हैं। एकेडमिक स्टाफ कॉलेज में स्थापित इस क्लासरूम के उद्घाटन के एक महीने केे अंदर स्टूडेंट्स को सुविधा देने का दावा किया गया था। यह दावा आज नौ साल भी धरातल पर नहीं उतर सका है। कोरोना महामारी के दौरान जब नियमित क्लास का संचालन नहीं हो पा रहा था, ऐसे समय मे ऑनलाइन क्लास और वीडियो लेक्चर उपयोगी साबित हो सकते थे, फिर भी इसका उपयोग शुरू नहीं किया गया।
वर्चुअल क्लासरूम से जुड़ने के लिए शिक्षकों और स्टूडेंट्स को सबसे पहले खुद का रजिस्ट्रेशन कराना था। इसके बाद स्टूडेंट और टीचर्स को लॉगइन आईडी और पासवर्ड दिए जाने थे। लॉगइन आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके वर्चुअल क्लासरूम से जुड़ा जा सकता है। उद्घाटन के दो महीने बाद कुछ लोगों ने इसमें रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन किसी प्रकार की सुविधा न होने की वजह से वे भी शांत पड़ गए। इसके बाद वर्चुअल क्लास रूम पर ताला ही पड़ा गया। लविवि के प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव का कहना है कि ऑनलाइन क्लास के लिए अपना प्लेटफॉर्म स्लेट के रूप में शुरू किया है। वर्चुअल क्लासरूम काफी समय से बंद है। संभव है कि उसे दुरुस्त करने में कुछ अतिरिक्त खर्च भी लगे। इसके बावजूद इसका निरीक्षण और आकलन किया जाएगा कि इसका उपयोग किस तरह किया जा सकता है।
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तीन भाग में है वर्चुअल क्लासरूम
वर्चुअल क्लासरूम तीन भाग में बंटा हुआ है। पहले भाग में दो इंटरैक्टिव बोर्ड हैं। जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई कराई जा सकती है। दूसरे भाग में एक स्टूडियो है, जिसमें शिक्षकों के लेक्चर रिकॉर्ड करने की सुविधा उपलब्ध है। तीसरे भाग में वेब पोर्टल है। इस पोर्टल पर शिक्षकों के नोट्स और लेक्चर उपलब्ध हो सकते हैं। इसके साथ ही विद्यार्थी भी अपनी समस्याएं रख पाएंगे। शिक्षक वहीं पर इनका जवाब दे सकेंगे। इस तरह से विद्यार्थी को घर बैठकर ही अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं।
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वर्चुअल क्लासरूम का उद्घाटन वर्ष 2011 में हुआ था। उद्घाटन के बाद से ही इस पर ताला पड़ा हुआ है। वर्चुअल क्लासरूम में लविवि के विद्यार्थी अन्य विवि की ऑनलाइन और रिकॉर्डेड कक्षाओं की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। इसमें वीडियो लेक्चर तैयार करने की व्यवस्था भी है। इस क्लासरूम के माध्यम से स्टूडेंट्स किसी संस्थान में हो रहे लेक्चर को देख व सुन सकते हैं। एकेडमिक स्टाफ कॉलेज में स्थापित इस क्लासरूम के उद्घाटन के एक महीने केे अंदर स्टूडेंट्स को सुविधा देने का दावा किया गया था। यह दावा आज नौ साल भी धरातल पर नहीं उतर सका है। कोरोना महामारी के दौरान जब नियमित क्लास का संचालन नहीं हो पा रहा था, ऐसे समय मे ऑनलाइन क्लास और वीडियो लेक्चर उपयोगी साबित हो सकते थे, फिर भी इसका उपयोग शुरू नहीं किया गया।
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वर्चुअल क्लासरूम से जुड़ने के लिए शिक्षकों और स्टूडेंट्स को सबसे पहले खुद का रजिस्ट्रेशन कराना था। इसके बाद स्टूडेंट और टीचर्स को लॉगइन आईडी और पासवर्ड दिए जाने थे। लॉगइन आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके वर्चुअल क्लासरूम से जुड़ा जा सकता है। उद्घाटन के दो महीने बाद कुछ लोगों ने इसमें रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन किसी प्रकार की सुविधा न होने की वजह से वे भी शांत पड़ गए। इसके बाद वर्चुअल क्लास रूम पर ताला ही पड़ा गया। लविवि के प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव का कहना है कि ऑनलाइन क्लास के लिए अपना प्लेटफॉर्म स्लेट के रूप में शुरू किया है। वर्चुअल क्लासरूम काफी समय से बंद है। संभव है कि उसे दुरुस्त करने में कुछ अतिरिक्त खर्च भी लगे। इसके बावजूद इसका निरीक्षण और आकलन किया जाएगा कि इसका उपयोग किस तरह किया जा सकता है।
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तीन भाग में है वर्चुअल क्लासरूम
वर्चुअल क्लासरूम तीन भाग में बंटा हुआ है। पहले भाग में दो इंटरैक्टिव बोर्ड हैं। जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई कराई जा सकती है। दूसरे भाग में एक स्टूडियो है, जिसमें शिक्षकों के लेक्चर रिकॉर्ड करने की सुविधा उपलब्ध है। तीसरे भाग में वेब पोर्टल है। इस पोर्टल पर शिक्षकों के नोट्स और लेक्चर उपलब्ध हो सकते हैं। इसके साथ ही विद्यार्थी भी अपनी समस्याएं रख पाएंगे। शिक्षक वहीं पर इनका जवाब दे सकेंगे। इस तरह से विद्यार्थी को घर बैठकर ही अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं।