सुप्रीम कोर्ट और कांग्रेस पर निशाना साध विहिप ने दी राम मंदिर एजेंडे को धार दी धार
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राम मंदिर निर्माण की हुंकार के लिए आयोजित विहिप की धर्मसभा में साधु संतों, आरएसएस और विहिप ने मंदिर निर्माण में विलंब के लिए कांग्रेस और सुप्रीम कोर्ट को जिम्मेदार ठहराया। धर्मसभा के जरिए कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करने और सर्वोच्च न्यायालय पर दबाव बनाने को एजेंडे को धार दी।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सर कार्यवाह कृष्णगोपाल ने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि मंदिर निर्माण का मुद्दा उनकी वरीयता में नहीं है, धर्मसभा में आए नौजवान उन्हें यही बताने आए हैं कि मंदिर निर्माण उनकी प्राथमिकता है। स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के फैसले मे देरी से जनता को निराशा हुई है, न्यायालय धोखा दे सकता है लेकिन जनता की अदालत धोखा नहीं देगी।
रविवार को अयोध्या में बड़ा भक्त माल की बगिया में आयोजित धर्मसभा में संघ के सह सरकार्यवाह कृष्णगोपाल ने कहा कि हिंदू समाज के ही कुछ लोगों ने न्यायालय में खड़े होकर कहा है कि मंदिर निर्माण का फैसला 2019 के बाद होना चाहिए। देश के हिंदू समाज को सोचना समझना होगा कि ये लोग कौन हैं जो मंदिर निर्माण नहीं कराना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि संघ मंदिर निर्माण के मुद्दे पर ना चैन से बैठा है ना चैन से बैठने देगा।
विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का मुद्दा 2011 से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। लेकिन 2017 तक तो किसी को इस मामले की फाइलें खोलने तक की चिंता नहीं थी ना ही किसी के पास इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आठ हजार पेज के फैसले को पढ़ने का समय था। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के मामले में सितम्बर 2018 तक फैसला आ जाता लेकिन कुछ धर्मनिरपेक्ष संगठनों से जुड़े वकीलों ने कहा कि लोकसभा चुनाव 2019 के बाद इसका फैसला आना चाहिए।
अयोध्या के हंसदेवाचार्य ने कहा कि कांग्रेस के एजेंट कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में 2019 के बाद सुनवाई टालने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे गद्दारों को चिह्नित करना होगा कि कौन हिंदुओं की धार्मिक आस्था से खिलवाड़ कर रहा है। उन्होंने कहा कि संतों ने कहा कि आतंकी की फांसी सहित अन्य गैर जरूरी मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट रात में भी खुलता है, लेकिन करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा मुद्दा उनकी वरीयता में नहीं होना हिंदुओं का अपमान है।
कमलनयनदास महाराज ने कहा धैर्य की परीक्षा समाप्त हो चुकी है। सर्वोच्च न्यायालय को राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलनरत हिंदुओं की भावना को समझना चाहिए। यदि सर्वोच्च न्यायालय ने जनभावना को नहीं सुना तो जनता खुद ही मंदिर निर्माण शुरू कर देगी।