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UP: 14 जिलों में डाटा सेंटर बनाने का झूठ बोला, अफसरों और निवेशकों को किया गुमराह, ईडी की जांच में खुलासा
Thu, 06 Mar 2025 10:35 AM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 06 Mar 2025 10:35 AM IST
सार
व्यूनाउ ने डाटा सेंटर निर्माण की फर्जी जानकारियां देकर अफसरों और निवेशकों को गुमराह किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में पता चला कि व्यूनाउ ने वसूली रकम डाटा सेंटरों में लगाई ही नहीं। रकम को डायवर्ट कर लग्जरी कारें खरीदी गईं।
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
उत्तर प्रदेश में 750 डाटा सेंटर का एमओयू करने वाली व्यूनाउ कंपनी ने निवेशकों के साथ ही अफसरों को भी अंधेरे में रखा। धोखाधड़ी का पर्दाफाश होने से रोकने के लिए फर्जी सूचनाएं दीं। गाजियाबाद में केवल डाटा सेंटर खोला। कई जिलों में डाटा सेंटर जल्द शुरू करने का दावा किया। पड़ताल में अधिकांश दावों की सत्यता संदिग्ध पाई गई।
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व्यूनाउ ने अरबों की ठगी करने के लिए डाटा सेंटर निर्माण स्थल की फर्जी तस्वीरें दिखाईं। अफसरों व निवेशकों को बरगलाने के लिए कागजों में गाजियाबाद, अंबेडकरनगर और रायबरेली के सेंटर कार्यरत दिखाए। लखनऊ में निर्माण करीब-करीब पूर्ण बताया। सीतापुर, मिल्कीपुर, इटावा, दादरी, मवाना, गोरखपुर, हरदोई, मिर्जापुर, बागपत में सेंटर जल्द शुरू करने का झांसा दिया।
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कंपनी ने 14 डाटा सेंटर क्रियाशील, जल्द क्रियाशील और निर्माणाधीन होने का अपडेट दिया। अंबेडकरनगर में बसखारी मार्ग पर बने सेंटर के अगले भाग में कार्यालय है, जबकि पिछले हिस्से में बने हॉल में ताला लटका है। रायबरेली के बछरावां में तीन माह पहले कंपनी के कर्मचारी आए थे, लेकिन जिले में सेंटर नहीं है। मिल्कीपुर में भी कंपनी का सेंटर नहीं मिला। अन्य जिलों में पड़ताल जारी है। बता दें कि एमओयू के बाद कई बार उद्यमी मित्र ने भी निवेश की जानकारी मांगी, लेकिन कोई सूचना नहीं मिली।
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डाटा सेंटर में लगाई ही नहीं वसूली रकम
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में पता चला कि व्यूनाउ ने वसूली रकम डाटा सेंटरों में लगाई ही नहीं। रकम को डायवर्ट कर लग्जरी कारें खरीदी गईं। सबसे ज्यादा रकम बेनामी संपत्ति में लगाई। एक हिस्सा मनी लॉन्ड्रिंग के रास्ते विदेश भेजा। इसमें कंपनी निदेशकों की भूमिका भी पता चली है। आरिफ निसार को गिरफ्तार किया जा चुका है। कंपनी की अहम कड़ी प्रवेश देसवाल और नितिन श्रीवास्तव की भी मिलीभगत का पता चला है। नितिन का कनेक्शन रायबरेली से भी बताया जा रहा है।