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Lucknow News: राम मंदिर चढ़ावा-घोटाले में दोषियों को मिले कड़ी सजा विचार मंच की गोष्ठी में बुद्धिजीवियों ने उठाई मांग
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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा-घोटाले के दोषियों को कड़ी सजा देने और उनका सामाजिक बहिष्कार करने की मांग बुद्धिजीवियों ने उठाई। वक्ताओं ने इस मामले में एक बड़े षड्यंत्र की आशंका भी जताई। यह मांग वीरसावरकर नगर में विचार मंच की ओर से 'राममंदिर का चढ़ावा-घोटाला' विषय पर आयोजित गोष्ठी में उठाई गई।
मुख्य वक्ता ‘राष्ट्रधर्म’ पत्रिका के प्रभारी निदेशक सर्वेशचंद्र द्विवेदी ने कहा कि पिछले 70 सालों में सेकुलरवाद के कारण समाज का नैतिक पतन हुआ है। इसी का दुष्परिणाम है कि कुछ लोगों ने मंदिर के चढ़ावे को हड़पने का दुस्साहस किया। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को न बख्शने की बात कही। अध्यक्षता करते हुए ‘समाचार वार्ता’ के संपादक श्याम कुमार ने मुख्यमंत्री योगी के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जांच के नतीजों का एक पखवारे तक इंतजार करना चाहिए, ताकि 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो सके। श्याम कुमार ने चढ़ावे की निगरानी के लिए ऐसी ठोस व्यवस्था की भी वकालत की, जिससे एक पैसे की भी गड़बड़ी न हो। पत्रकार सिद्धार्थ सौरभ, समाजसेवी राजीव माथुर और सुशीला मिश्र ने गहन जांच की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि राम मंदिर के विरोधी, जिन्होंने कभी चंदा नहीं दिया, उन्हें घोटाले का सबसे पहले ज्ञान कैसे हुआ। वक्ताओं ने आशंका जताई कि उन लोगों ने ही हिंदुओं और राम मंदिर को विश्वभर में बदनाम करने का षड्यंत्र रचा हो। पत्रकार शेखर पंडित ने देश के सभी धार्मिक केंद्रों पर चढ़ावे में पारदर्शिता लाने के लिए ठोस उपाय सुझाए। पुष्कर चंद्रस्वरूप ने कहा कि राम मंदिर का विरोध करने वालों को शोर मचाने का कोई अधिकार नहीं है।
लखनऊ। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा-घोटाले के दोषियों को कड़ी सजा देने और उनका सामाजिक बहिष्कार करने की मांग बुद्धिजीवियों ने उठाई। वक्ताओं ने इस मामले में एक बड़े षड्यंत्र की आशंका भी जताई। यह मांग वीरसावरकर नगर में विचार मंच की ओर से 'राममंदिर का चढ़ावा-घोटाला' विषय पर आयोजित गोष्ठी में उठाई गई।
मुख्य वक्ता ‘राष्ट्रधर्म’ पत्रिका के प्रभारी निदेशक सर्वेशचंद्र द्विवेदी ने कहा कि पिछले 70 सालों में सेकुलरवाद के कारण समाज का नैतिक पतन हुआ है। इसी का दुष्परिणाम है कि कुछ लोगों ने मंदिर के चढ़ावे को हड़पने का दुस्साहस किया। उन्होंने उच्चस्तरीय जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को न बख्शने की बात कही। अध्यक्षता करते हुए ‘समाचार वार्ता’ के संपादक श्याम कुमार ने मुख्यमंत्री योगी के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जांच के नतीजों का एक पखवारे तक इंतजार करना चाहिए, ताकि 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो सके। श्याम कुमार ने चढ़ावे की निगरानी के लिए ऐसी ठोस व्यवस्था की भी वकालत की, जिससे एक पैसे की भी गड़बड़ी न हो। पत्रकार सिद्धार्थ सौरभ, समाजसेवी राजीव माथुर और सुशीला मिश्र ने गहन जांच की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि राम मंदिर के विरोधी, जिन्होंने कभी चंदा नहीं दिया, उन्हें घोटाले का सबसे पहले ज्ञान कैसे हुआ। वक्ताओं ने आशंका जताई कि उन लोगों ने ही हिंदुओं और राम मंदिर को विश्वभर में बदनाम करने का षड्यंत्र रचा हो। पत्रकार शेखर पंडित ने देश के सभी धार्मिक केंद्रों पर चढ़ावे में पारदर्शिता लाने के लिए ठोस उपाय सुझाए। पुष्कर चंद्रस्वरूप ने कहा कि राम मंदिर का विरोध करने वालों को शोर मचाने का कोई अधिकार नहीं है।
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