यूपी: VDO भर्ती प्रकिया में हो सकता है 'बड़ा खेल'
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प्रदेश में ग्राम्य विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी के रिक्त पदों पर होने वाली भर्ती में सत्ता-शासन और प्रशासन चाहे तो मनमानी के भरपूर मौके हैं।
ग्राम्य विकास अधिकारी (वीडीओ) की भर्ती में आवेदन लेने की प्रक्रिया तो ऑनलाइन होने के कारण पारदर्शी है, लेकिन इसके आगे की प्रक्रिया कदम दर कदम झोल नजर आता है।
पंचायतीराज विभाग ने तो ऐसी प्रक्रिया अपनाई है कि आवेदक के लिए कुछ भी पता कर पाना आसान नहीं है।
लोकसभा चुनाव के एक साल पहले से ही इन पदों की भर्ती को लेकर घोषणाएं शुरू कर दी गई थीं।
रुकी पड़ी थी प्रक्रिया
बेरोजगार युवाओं को नौकरी की उम्मीद जगी तो जमकर आवेदन हुए, लेकिन ग्राम्य विकास विभाग और पंचायतीराज विभाग ने आवेदन लेने के बाद भर्ती पर चुप्पी साध ली।
जानकार बताते हैं कि चुनाव से पहले भर्ती होने पर चयन प्रक्रिया से उभरने वाले आक्रोश को ध्यान में रखकर प्रक्रिया को जहां का तहां छोड़ दिया गया।
वीडीओ के 3000 से अधिक पदों पर भर्ती के लिए 1.23 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं तो पंचायतीराज विभाग में ग्राम पंचायत अधिकारी के 2900 पदों पर भर्ती के लिए कितने आवेदन आए, अधिकारी आज भी यह बता पाने की स्थिति में नहीं हैं। वजह, इस विभाग ने ऑनलाइन की जगह डाक से आवेदन मंगाए।
आवेदकों को बुलाने में पूरी मनमर्जी
वीडीओ भर्ती का एक दिलचस्प पहलू यह है कि आवेदकों में से इंटरव्यू के लिए कितने लोगों को बुलाया जाएगा, इसकी कोई संख्या तय नहीं की गई है।
यह अधिकार जिला स्तर पर जिला विकास अधिकारियों की अध्यक्षता वाली चयन समिति पर छोड़ दिया गया है।
नियमावली में इस व्यवस्था का सबसे बड़ा पेंच यह है कि हर जिले का डीडीओ अलग-अलग संख्या में आवेदकों को इंटरव्यू के लिए बुलाने के लिए स्वतंत्र है।
लोगों का कहना है कि यदि कोई मनचाहा अभ्यर्थी मेरिट लिस्ट के अंत में है और नियुक्ति प्राधिकारी चाहे तो वहां तक के आवेदकों को इंटरव्यू के लिए बुला सकता है।
इंटरव्यू में लगेगा जुगाड़
पहले समूह ‘ग’ की परीक्षा में शैक्षिक रिकॉर्ड व वेटेज आदि के लिए 50 नंबर होते थे और 50 नंबर का इंटरव्यू होता था।
लिखित परीक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में आवेदकों में यह धारणा बन गई थी किशैक्षिक आधार पर चाहे जितनी अच्छी मेरिट हो, इंटरव्यू में जुगाड़ वालों का ही भला होगा।
युवाओं की इस भावना को ‘अमर उजाला’ ने प्राथमिकता से उठाया था। इसके बाद वीडीओ भर्ती में 40 नंबर की लिखित परीक्षा और 50 की जगह 25 नंबर का इंटरव्यू किया गया, पर 100 नंबर की चयन प्रक्रिया में इसे भी निष्पक्ष चयन के लिहाज से उचित नहीं माना जा रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि 100 नंबर की चयन प्रक्रिया में 10 नंबर से अधिक का इंटरव्यू होने पर पक्षपात के अवसर हमेशा रहेंगे। लेखपाल भर्ती की 100 नंबर की चयन प्रक्रिया में 10 नंबर का इंटरव्यू होता है।
वेटेज में भी दो तरह के नियम
राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती के लिए परास्नातक अंकों का वेटेज खत्म किया जा चुका है जबकि वीडीओ भर्ती में स्नातक का वेटेज दिया जा रहा है।
राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती में पीजी में प्रथम श्रेणी पर 15, द्वितीय पर 10 और तृतीय श्रेणी पर पांच अंक का अतिरिक्त वेटेज देने की व्यवस्था थी।
इसे इस तर्क के साथ खत्म किया गया कि अच्छे अंक के बावजूद स्नातक योग्यताधारक अपनी ही योग्यता वाली नौकरी से बाहर हो जाते हैं।
दूसरी ओर वीडीओ भर्ती में शैक्षिक अर्हता इंटरमीडिएट (कृषि/ विज्ञान) या समकक्ष मानी गई है।
डोएक की सीसीसी सर्टिफिकेट अनिवार्य है, मगर जब मेरिट बनाने की बात आई तो नियमावली में जोड़ दिया गया कि मेरिट इंटरमीडिएट के साथ स्नातक के प्राप्तांकों, छंटनीशुदा प्रमाणपत्र व खेलकूद प्रमाणपत्रों के आधार पर बनाई जाएगी।
स्नातक उपाधि पर 60 प्रतिशत या इससे अधिक अंक पर 10, 45 प्रतिशत या 60 प्रतिशत से कम पर 8 व 33 प्रतिशत या 45 प्रतिशत से कम पर 5 अंक देने का प्रावधान है।
क्या कहते हैं प्रमुख सचिव
आवेदन के लिए ऑनलाइन पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई है। हर आवेदक के शैक्षिक रिकॉर्ड कोई भी देख सकता है।
मेरिट बनाने के बाद उस पर भी आपत्ति का मौका होगा जिसका निबटारा किया जाएगा। पहले इंटरव्यू 50 अंक का था जिसे 25 अंक किया गया है।
आवेदन लेने के दौरान कार्मिक विभाग ने भर्ती नियमावली में संशोधन किया है। ऐसे में न्याय विभाग से राय ली जा रही है कि पुराने नियम से भर्ती हो या नए नियम से।
राय मिलने के बाद चयन प्रक्रिया तय की जाएगी। तब तक चयन प्रक्रिया स्थगित है।
- अरुण सिंघल, प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास