फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   vat Savitri vrat on 26 may

Lucknow News: इस बार दोपहर में वट वृक्ष का पूजन श्रेयस्कर, वट सावित्री व्रत 26 को

Fri, 23 May 2025 04:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 23 May 2025 04:03 PM IST
विज्ञापन
vat Savitri vrat on 26 may
वट सावित्री व्रत व पूजन 26 को।
लखनऊ। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। इसमें वट वृक्ष की पूजा की जाती है। इस वर्ष वट सावित्री व्रत 26 मई को है। इसी दिन सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी, इस व्रत को बरगदाही व्रत भी कहते हैं। महिलाएं व्रत अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं। अमावस्या तिथि का प्रारंभ 26 मई को दोपहर 12:11 बजे से होगा और तिथि का समापन 27 मई को सुबह 8:31 बजे होगा। ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर दोपहर के समय वट वृक्ष पूजन करना श्रेष्ठ है।
विज्ञापन


ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि वट सावित्री व्रत के दिन चंद्रमा कृतिका नक्षत्र और मेष राशि में दिन में 1:40 बजे तक वृषभ राशि का संयोग बना रहे हैं। बुध आदित्य योग और मालव्य योग भी बनेगा। वट सावित्री व्रत पतिव्रता धर्म का प्रतीक माना जाता है। सावित्री ने कठोर व्रत, तप और साहस के बल पर अपने मृत पति सत्यवान को पुनर्जीवन दिलवाया था। तभी से सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत को रखती हैं। वट वृक्ष को देव वृक्ष माना जाता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में विष्णु जी और डालियों व पत्तियों मेें भगवान शिव का वास माना जाता है। वट वृक्ष की पूजा से दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और उन्नति की प्राप्ति होती है।व्रत का विधान
विज्ञापन


एसएस नागपाल के अनुसार, सुबह स्नान आदि के बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य रखकर ब्रह्मा जी की मूर्ति की स्थापना कर सावित्री की मूर्ति की स्थापना की जाती है। दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की मूर्तियों की स्थापना कर टोकरी को वट वृक्ष के नीचे जाकर ब्रह्मा जी और सावित्री पूजन के बाद सत्यवान और सावित्री की पूजा करके बरगद की जड़ में जल देते हैं। वट वृक्ष (बरगद) के नीचे बैठकर सावित्री और सत्यवान की कथा भी सुननी चाहिए। पूजा में जल, मौली, रोली, कच्चा सूत, भीगा चना, फूल और धूप से पूजन करते है। वट वृक्ष पूजन में तने पर कच्चा सूत लपेट कर 7, 21 या 108 बार परिक्रमा का विधान है। न्यूनतम सात बार परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed