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Lucknow News: शहीद की विरासत बेटियों ने संभाली, 18 बनीं अग्निवीर
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लखनऊ विश्वविद्यालय
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विनीत चतुर्वेदी
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय की एक अनोखी पहल के तहत परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन मनोज पांडेय की जन्मस्थली सीतापुर के रूढ़ा गांव से अब बेटियों के ''अग्निवीर'' बनने का सपना साकार हो रहा है। वर्ष 2025 में शुरू हुई इस पहल के तहत विश्वविद्यालय के फिजिकल एजुकेशन विभाग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ''सम्मान'' प्रोजेक्ट के सहयोग से रूढ़ा गांव में एक उन्नत प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया।
फिजिकल एजुकेशन विभाग के प्रमुख प्रो. रूपेश कुमार ने बताया यहां विभाग की ओर से एक वर्ष में 76 युवाओं को कड़ी ट्रेनिंग दी गई, जिनमें से 22 का चयन ''अग्निवीर'' के रूप में हुआ। खास बात यह रही कि चयनित अभ्यर्थियों में 18 बेटियां शामिल हैं।
कराई जाती है तैयारी
- इस प्रशिक्षण केंद्र में अभ्यर्थियों को सेना भर्ती के अनुरूप शारीरिक और मानसिक तैयारी कराई जाती है। 600 मीटर का रनिंग ट्रैक, व्यायाम के उपकरण और अन्य जरूरी सुविधाएं यहां उपलब्ध हैं। साथ ही, रहने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, ताकि अभ्यर्थी पूरी लगन से तैयारी कर सकें।
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- इस अभियान को और मजबूत बनाने के लिए लखनऊ कैंट स्थित मध्य कमान की 11-गोरखा राइफल्स बटालियन के जवान समय-समय पर प्रशिक्षण देने पहुंचते हैं। यह वही बटालियन है, जिससे शहीद कैप्टन मनोज पांडेय जुड़े रहे। स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना को और प्रगाढ़ किया जाता है। विश्वविद्यालय के शिक्षक और शोधार्थी भी नियमित रूप से गांव जाकर प्रशिक्षण और संसाधनों में सहयोग करते हैं।
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय की एक अनोखी पहल के तहत परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन मनोज पांडेय की जन्मस्थली सीतापुर के रूढ़ा गांव से अब बेटियों के ''अग्निवीर'' बनने का सपना साकार हो रहा है। वर्ष 2025 में शुरू हुई इस पहल के तहत विश्वविद्यालय के फिजिकल एजुकेशन विभाग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ''सम्मान'' प्रोजेक्ट के सहयोग से रूढ़ा गांव में एक उन्नत प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया।
फिजिकल एजुकेशन विभाग के प्रमुख प्रो. रूपेश कुमार ने बताया यहां विभाग की ओर से एक वर्ष में 76 युवाओं को कड़ी ट्रेनिंग दी गई, जिनमें से 22 का चयन ''अग्निवीर'' के रूप में हुआ। खास बात यह रही कि चयनित अभ्यर्थियों में 18 बेटियां शामिल हैं।
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कराई जाती है तैयारी
- इस प्रशिक्षण केंद्र में अभ्यर्थियों को सेना भर्ती के अनुरूप शारीरिक और मानसिक तैयारी कराई जाती है। 600 मीटर का रनिंग ट्रैक, व्यायाम के उपकरण और अन्य जरूरी सुविधाएं यहां उपलब्ध हैं। साथ ही, रहने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, ताकि अभ्यर्थी पूरी लगन से तैयारी कर सकें।
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- इस अभियान को और मजबूत बनाने के लिए लखनऊ कैंट स्थित मध्य कमान की 11-गोरखा राइफल्स बटालियन के जवान समय-समय पर प्रशिक्षण देने पहुंचते हैं। यह वही बटालियन है, जिससे शहीद कैप्टन मनोज पांडेय जुड़े रहे। स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना को और प्रगाढ़ किया जाता है। विश्वविद्यालय के शिक्षक और शोधार्थी भी नियमित रूप से गांव जाकर प्रशिक्षण और संसाधनों में सहयोग करते हैं।