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Lucknow News: पांच छात्रों के निलंबन के बाद लविवि में जमकर बवाल
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निलंबन के विरोध में लविवि परिसर में बुधवा को प्रदर्शन हुआ।
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने एपीसेन सभागार में आयोजित युवा संसद के दौरान छात्राओं से अभद्रता, छेड़खानी के मामले में पांच छात्रों को बुधवार को निलंबित कर दिया। इससे आक्रोशित साथी छात्रों ने विवि परिसर में जमकर बवाल किया। परिसर में लगे पुस्तक मेले के होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर फाड़ डाले। फिर प्रशासनिक भवन का घेराव कर नारेबाजी की।
निलंबित किए छात्रो ंमें बीए (एनईपी) तृतीय वर्ष के दिव्यांश अवस्थी, अनुराग कुमार यादव (अनुराग चौधरी), नितिन पांडेय और अखिलेश प्रताप यादव तथा पीएचडी (राजनीतिशास्त्र) के शरद मिश्रा शामिल हैं। इनमें से एक ने शाम को कुलानुशासक कार्यालय के छज्जे पर चढ़कर कूदने का प्रयास किया। इस दौरान नीचे मौजूद प्रॉक्टोरियल बोर्ड और छात्रों ने बहुत समझाया पर वह तैयार नहीं हुआ। कुछ छात्रों ने छज्जे के ऊपर बने बरामदे से जाकर उसे उतारा। गोमती पुस्तक महोत्सव के बैनर-पोस्टर फाड़ने के बाद छात्रों ने प्रशासनिक भवन पहुंचकर आवागमन के लिए बने दोनों चैनलों पर ताला लगा दिया। इस दौरान कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा कार्यालय में थीं। ताला बंद होने से कुलसचिव समेत दर्जनों लोग प्रशासनिक भवन के अंदर फंसे रहे। इसमें अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अमिता कनौजिया, चीफ प्रोवोस्ट प्रो. आशीष अवस्थी और निर्माण अधीक्षक प्रो. विनीत वर्मा शामिल रहे। धरना दे रहे छात्रों ने मांग की कि निलंबित छात्रों को उनका पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। मुख्य कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी की अगुवाई में प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया। कुलानुशासक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, छात्रों को बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे तक का समय दिया गया है। वे उस दौरान अपना पक्ष आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के सामने रख सकते हैं।
वर्जन
कुलपति के साथ छात्रों की देर शाम वार्ता हुई है। निलंबित छात्रों को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
- प्रो. मुकुल श्रीवास्तव, प्रवक्ता, लविवि
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निलंबित किए छात्रो ंमें बीए (एनईपी) तृतीय वर्ष के दिव्यांश अवस्थी, अनुराग कुमार यादव (अनुराग चौधरी), नितिन पांडेय और अखिलेश प्रताप यादव तथा पीएचडी (राजनीतिशास्त्र) के शरद मिश्रा शामिल हैं। इनमें से एक ने शाम को कुलानुशासक कार्यालय के छज्जे पर चढ़कर कूदने का प्रयास किया। इस दौरान नीचे मौजूद प्रॉक्टोरियल बोर्ड और छात्रों ने बहुत समझाया पर वह तैयार नहीं हुआ। कुछ छात्रों ने छज्जे के ऊपर बने बरामदे से जाकर उसे उतारा। गोमती पुस्तक महोत्सव के बैनर-पोस्टर फाड़ने के बाद छात्रों ने प्रशासनिक भवन पहुंचकर आवागमन के लिए बने दोनों चैनलों पर ताला लगा दिया। इस दौरान कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा कार्यालय में थीं। ताला बंद होने से कुलसचिव समेत दर्जनों लोग प्रशासनिक भवन के अंदर फंसे रहे। इसमें अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अमिता कनौजिया, चीफ प्रोवोस्ट प्रो. आशीष अवस्थी और निर्माण अधीक्षक प्रो. विनीत वर्मा शामिल रहे। धरना दे रहे छात्रों ने मांग की कि निलंबित छात्रों को उनका पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। मुख्य कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी की अगुवाई में प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया। कुलानुशासक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, छात्रों को बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे तक का समय दिया गया है। वे उस दौरान अपना पक्ष आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के सामने रख सकते हैं।
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वर्जन
कुलपति के साथ छात्रों की देर शाम वार्ता हुई है। निलंबित छात्रों को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
- प्रो. मुकुल श्रीवास्तव, प्रवक्ता, लविवि

निलंबन के विरोध में लविवि परिसर में बुधवा को प्रदर्शन हुआ।

निलंबन के विरोध में लविवि परिसर में बुधवा को प्रदर्शन हुआ।

निलंबन के विरोध में लविवि परिसर में बुधवा को प्रदर्शन हुआ।

निलंबन के विरोध में लविवि परिसर में बुधवा को प्रदर्शन हुआ।

निलंबन के विरोध में लविवि परिसर में बुधवा को प्रदर्शन हुआ।

निलंबन के विरोध में लविवि परिसर में बुधवा को प्रदर्शन हुआ।

निलंबन के विरोध में लविवि परिसर में बुधवा को प्रदर्शन हुआ।

निलंबन के विरोध में लविवि परिसर में बुधवा को प्रदर्शन हुआ।
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