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यूपीपीसीएल : पीएफ घोटाले में फर्जी निकले संजय अग्रवाल के दस्तखत, सीबीआई को नहीं मिली पूछताछ की अनुमति
Sat, 30 Apr 2022 04:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अजीत बिसारिया, लखनऊ
अजीत बिसारिया, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 30 Apr 2022 04:23 AM IST
सार
यह पीएफ घोटाला वर्ष 2019 में सामने आया था। पहले इसकी जांच ईओडब्ल्यू ने की। बाद में मामला सीबीआई को सौंपा गया था। शासन के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने तथ्यों की पड़ताल की तो सामने आया कि जिस बोर्ड बैठक में ज्यादा रिटर्न देने वाली कंपनियों में निवेश का फैसला हुआ दिखाया गया, उस कार्यवृत्त पर तत्कालीन चेयरमैन संजय अग्रवाल के दस्तखत फर्जी थे।
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- फोटो : social media
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विस्तार
उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) में हुए 22 अरब रुपये के पीएफ घोटाले में आईएएस अफसर संजय अग्रवाल के दस्तखत फर्जी निकले हैं। फोरेंसिक जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद शासन ने कॉर्पोरेशन में तैनात रहे तत्कालीन चेयरमैन संजय अग्रवाल व आलोक कुमार और तत्कालीन एमडी अपर्णा यू के खिलाफ पूछताछ की मंजूरी नहीं दी। सीबीआई ने कुछ समय पहले तीनों के खिलाफ पूछताछ चलाने की अनुमति मांगी थी।
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यह पीएफ घोटाला वर्ष 2019 में सामने आया था। पहले इसकी जांच ईओडब्ल्यू ने की। बाद में मामला सीबीआई को सौंपा गया था। शासन के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने तथ्यों की पड़ताल की तो सामने आया कि जिस बोर्ड बैठक में ज्यादा रिटर्न देने वाली कंपनियों में निवेश का फैसला हुआ दिखाया गया, उस कार्यवृत्त पर तत्कालीन चेयरमैन संजय अग्रवाल के दस्तखत फर्जी थे।
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उनके बाद चेयरमैन बने आलोक कुमार के इससे संबंधित एक कागज पर हस्ताक्षर जरूर मिले, लेकिन उन्होंने यह हस्ताक्षर पूर्ववर्ती चेयरमैन के हस्ताक्षर देखकर कर दिए थे। इसे गुड फेथ (पूर्ववर्ती अधिकारी पर भरोसा) में किया गया हस्ताक्षर माना गया। वहीं, अपर्णा यू के दस्तखत इस मामले से संबंधित सिर्फ एक बैलेंस शीट पर मिले। शासन का मानना है कि बैलेंस शीट से यह पता नहीं चलता कि राशि कहां निवेश की गई है। इसलिए उनका भी कोई दोष नहीं बनता। वर्तमान में 1984 बैच के आईएएस अधिकारी संजय अग्रवाल और 1988 बैच के अधिकारी आलोक कुमार केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं। अपर्णा यू सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के पद पर तैनात हैं।
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यूपीपीसीएल के पीएफ घोटाले में कई अफसर जा चुके हैं जेल
उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) में हुए 22 अरब रुपये के जिस पीएफ घोटाले में शासन ने सीबीआई को को तत्कालीन चेयरमैन संजय अग्रवाल, आलोक कुमार व तत्कालीन एमडी अपर्णा यू के खिलाफ पूछताछ की स्वीकृति नहीं दी है, उस मामले में कई अफसर जेल जा चुके हैं।
वर्ष 2019 में 10 जुलाई को पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन आलोक कुमार को एक गुमनाम पत्र मिला। इसमें ट्रस्ट की धनराशि के नियमविरुद्ध ढंग से निवेश की शिकायत की गई थी। इसकी जांच में पाया गया कि जीपीएफ व सीपीएफ के ट्रस्टों द्वारा गाइडलाइन्स का पालन नहीं किया जा रहा है। ट्रस्ट की धनराशि की 99 प्रतिशत से अधिक राशि केवल तीन हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में निवेश की गई थी। इसमें से 65 प्रतिशत से अधिक राशि डीएचएफसीएल (दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड) में था।
इतना ही नहीं निवेश गाइडलाइन्स के अनुसार पांच प्रतिशत तक का निवेश सूचीबद्ध बैंकों द्वारा जारी एक वर्ष की अवधि तक की सावधि जमा योजना में ही किया जा सकता है, लेकिन ट्रस्ट के अफसरों ने हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के फिक्स्ड डिपॉजिट में दिसंबर 2016 से ही निवेश शुरू कर दिया था। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट की धनराशि का मानकों के विपरीत जाकर निवेश करने के मामले में तत्कालीन एमडी एपी मिश्रा, निदेशक वित्त सुधांशु त्रिवेदी और पीके गुप्ता को जेल भेजा गया। इसके अलावा ब्रोकरेज फर्म के एजेंटों और सीए के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।