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यूपी: नए कानूनों के तहत अमरोहा में दर्ज हुआ पहला केस, बरेली में दूसरा तो आगरा में आया तीसरा मामला
Tue, 02 Jul 2024 12:12 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Tue, 02 Jul 2024 12:12 AM IST
सार
New criminal laws: केंद्र सरकार के द्वारा लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत पहला मुकदमा अमरोहा में दर्ज हुआ। दो और मामले प्रदेश में आए हैं।
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यूपी डीजीपी प्रशांत कुमार ने यह जानकारी दी।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत सोमवार को अमरोहा जिले के रहरा थाने में पहला मुकदमा दर्ज किया गया। वहीं दूसरा मुकदमा बरेली के बारादरी थाने में, जबकि तीसरा आगरा पुलिस कमिश्नरेट के शमशाबाद थाने में दर्ज किया गया। पहली एनसीआर (असंज्ञेय अपराध की सूचना रिपोर्ट) बांदा के बबेरू थाने में लिखी गयी है।
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डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि अमरोहा के रहरा थाने में सुबह 9.51 बजे गैर इरादतन हत्या के मामले में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता 2023) की धारा 106 के तहत दर्ज हुआ है, जो खेत में किसान की करंट लगने से हुई मौत से संबंधित है। इस मामले में दो लोगों को नामजद किया गया है। वहीं दूसरा मुकदमा बरेली के बारादरी थाने में सुबह 10.17 बजे बीएनएस की धारा 97 के तहत दर्ज हुआ है। यह प्रकरण बरेली के अपोलो अस्पताल से एक माह के बच्चे का अपहरण करने से संबंधित है, जिसमें अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।
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वहीं तीसरा मुकदमा आगरा पुलिस कमिश्नरेट के शमशाबाद थाने में सुबह 10.44 बजे बीएनएस की धारा 305 (ए) व 331 (4) के तहत दर्ज किया गया है, जो चोरी से संबंधित है। इसके अलावा बीएनएस की धारा 352 के तहत पहली एनसीआर बांदा के बबेरू थाने में लिखी गयी है। यह मामला मारपीट से संबंधित है।
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वीडियो भी किया जारी
वहीं नए कानूनों के लागू होने के बाद प्रदेश पुलिस ने जागरूकता संबंधी एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें बताया गया कि अंग्रेजों द्वारा बनाए गये तीन कानूनों को समाप्त कर दिया गया है। अब नए कानून लागू हो चुके हैं, जो दंड आधारित होने के बजाय न्याय आधारित हैं। साथ ही नए कानूनों की तमाम धाराओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है। साथ ही, गवाहों की सुरक्षा, छोटे अपराधों में सजा की जगह सामुदायिक सेवा कराने का उल्लेख किया गया है।
बदलाव का है प्रतीक
एक जुलाई से लागू तीन नए आपराधिक कानून औपनिवेशिक युग के कानूनों से एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक हैं, जो सामाजिक गतिशीलता को प्रदर्शित करता है। नए कानून दंड आधारित न होकर न्याय आधारित हैं।- प्रशांत कुमार, डीजीपी