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यूपी: कोडीन सिरप मामले में दो आरोपियों को हाईकोर्ट से मिली सशर्त अंतरिम जमानत, कोर्ट ने दिया ये आदेश
Mon, 22 Dec 2025 10:47 PM IST
आकाश द्विवेदी
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: आकाश द्विवेदी
Updated Mon, 22 Dec 2025 10:47 PM IST
सार
कोडीन सिरप मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर के दो आरोपियों, विभोर राणा और विशाल सिंह को सशर्त अंतरिम जमानत दी। कोर्ट ने कहा कि दोनों जांच में पूरा सहयोग करेंगे और जब भी बुलाया जाएगा उपस्थित रहेंगे। अगली सुनवाई 5 जनवरी 2026 को होगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
कोडीन सिरप मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सहारनपुर के रहने वाले दो आरोपी भाइयों विभोर राणा और विशाल सिंह को सशर्त अंतरिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि दोनों जांच में पूरा सहयोग करेंगे और जब भी जांच अधिकारी को उनकी आवश्यकता होगी, वे उपस्थित रहेंगे। न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने विभोर राणा और विशाल सिंह की जमानत अर्जियों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
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अभियोजन के मुताबिक 8 अप्रैल 2024 को लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में औषधि विभाग के इंस्पेक्टर संदेश मौर्य ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं में कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि फेंसिडल कफ सिरप और अन्य दवाओं का अवैध भंडारण किया जा रहा था और नशे के रूप में इनके इस्तेमाल के लिए बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक तस्करी की जा रही थी।
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यूपी एसटीएफ ने 12 फरवरी 2024 को सूचना के आधार पर छापा मारकर एक ट्रक से भारी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद किया था। इसके बाद यह एफआईआर दर्ज हुई और जांच आगे बढ़ने पर एक बड़े नेटवर्क के सामने आने की बात कही गई। जांच के दौरान सहारनपुर निवासी विभोर राणा और विशाल सिंह को इस मामले में 11 नवंबर को गिरफ्तार किया था। 6 दिसंबर 2025 को लखनऊ की निचली अदालत से दोनों भाइयों की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी। इसके बाद दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में जमानत अर्जी दाखिल की थी।
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अभियोजन का आरोप है कि सह-आरोपियों ने अलग-अलग नामों से फर्जी फर्में बनाईं। इन फर्मों के बैंक लेन-देन आरोपी विभोर राणा और विशाल राणा (विशाल सिंह) ने अपने सहयोगियों और कर्मचारियों की बैंक आईडी व पासवर्ड का इस्तेमाल कर किए। इससे फेंसिडल कफ सिरप की अवैध बिक्री को बढ़ावा मिला।
जांच के दौरान मारुति मेडिकोज से जुड़े लेन-देन की पड़ताल में ये भी सामने आया कि ओम मेडिकोज, अभि फार्मा, आशु मेडिकोज और विभोर की जीआर ट्रेडिंग के साथ संदिग्ध लेन-देन हुए थे। आरोप है कि फेंसिडल कफ सिरप की अवैध खरीद-बिक्री को फर्जी फर्मों के माध्यम से दिखाया गया और इसी नेटवर्क के जरिए तस्करी की गई।
हाईकोर्ट ने दोनों को मामले में अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि दोनों आरोपी जांच में सहयोग करेंगे और जांच एजेंसी द्वारा बुलाए जाने पर उपलब्ध रहेंगे। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 जनवरी 2026 को नियत की है।