फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: The race to invoke Ambedkar's name isn't just for nothing; vote banks are the real target

UP: यूं ही नहीं लगी आंबेडकर का नाम लेने की होड़, वोट बैंक असली निशाना; आने वाले चुनाव हैं दलों के निशाने पर

Wed, 15 Apr 2026 06:52 AM IST
रोहित मिश्र अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 15 Apr 2026 06:52 AM IST
सार

Ambedkar Jayanti: बीते कुछ वर्षों से आंबेडकर राजनीति में नए तरीके से प्रासंगिक हो गए हैं। यूपी के सभी राजनीतिक दल आबंडेकर के नाम को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।

विज्ञापन
UP: The race to invoke Ambedkar's name isn't just for nothing; vote banks are the real target
सभी तरह के राजनीतिक दल आंबेडकर को केंद्र में रखे हुए हैं।

विस्तार

डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच कार्यक्रम करने की होड़ मची हुई है, लेकिन उनकी शिक्षाओं व मान्यताओं का प्रचार-प्रसार उतना ही कमजोर होता जा रहा है। बाबा साहब जातियों के उन्मूलन और सामाजिक समरसता व समानता के पक्षधर थे, पर हमारे समाज में यही विषमताएं बढ़ती जा रही हैं। दरअसल, आंबेडकर के बहाने असली निशाना वोट बैंक ही है।

विज्ञापन


भाजपा, सपा और बसपा डॉ. आंबेडकर को याद करने में कोई भी पीछे नहीं है। बाबा साहब के बताए रास्ते पर चलने के सबके अपने-अपने दावे हैं। डॉ. आंबेडकर का प्रसिद्ध कथन है- जाति का उन्मूलन तभी संभव है जब शास्त्रों की सत्ता को नकारा जाए। आंबेडकर ने जाति उन्मूलन के लिए अंतरजातीय विवाह को सबसे प्रभावी उपाय माना। वे कहते थे कि जब विभिन्न जातियों के लोग आपस में विवाह करेंगे, तो जातीय भेदभाव स्वतः समाप्त हो जाएगा। लेकिन, हमारे समाज में आज भी अंतरजातीय विवाह खून-खराबे तक की स्थिति ला देते हैं।
विज्ञापन


आंबेडकर के अनुसार, केवल राजनीतिक स्वतंत्रता पर्याप्त नहीं है। अगर समाज में ऊंच नीच बनी रहती है, तो स्वतंत्रता का कोई वास्तविक अर्थ नहीं रह जाता। लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग में प्रो. संजय गुप्ता कहते हैं कि डॉ. आंबेडकर की शिक्षाओं को मानते तो आज समाज से ऊंच नीच का भाव पूरी तरह से समाप्त हो जाता। आंबेडकर का मानना था कि जाति व्यवस्था केवल सामाजिक प्रथा नहीं है, बल्कि इसका आधार धर्मग्रंथों में निहित है। उन्होंने कहा कि जब तक लोग इन ग्रंथों को अंतिम सत्य मानते रहेंगे, तब तक जाति समाप्त नहीं हो सकती।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed