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UP: ऑनलाइन दर्ज होगी शिक्षक-विद्यार्थियों की उपस्थिति, इससे शैक्षणिक गुणवत्ता और जवाबदेही में सुधार आएगा

Sat, 14 Feb 2026 09:23 AM IST
आकाश द्विवेदी विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
विनीत चतुर्वेदी, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 14 Feb 2026 09:23 AM IST
सार

लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षक और विद्यार्थियों की उपस्थिति अब समर्थ पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज होगी। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने तकनीक से पढ़ाई, परीक्षा और प्रशासन में पारदर्शिता लाने का दावा किया। ई-ऑफिस, वाई-फाई और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था लागू की जाएगी।

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UP: Teacher-student attendance will be recorded online, improving educational quality and accountability.
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

लखनऊ विश्वविद्यालय में कक्षाओं का नियमित संचालन तय करने के लिए शिक्षक और विद्यार्थियों की उपस्थिति समर्थ पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कार्यकाल का एक माह पूरा होने पर अमर उजाला से बातचीत करते हुए भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की।

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कुलपति ने बताया कि एक महीने के कार्यकाल में उन्होंने निरीक्षण के दौरान कक्षाएं न चलने की बात देखी। इसको देखते हुए ऑनलाइन उपस्थिति की योजना बनाई गई है। इससे कक्षाओं का संचालन सुनिश्चित होगा। 
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कक्षावार रियल टाइम मॉनिटरिंग से अनुशासन बेहतर होगा। समर्थ पोर्टल के जरिये अटेंडेंस दर्ज करने की व्यवस्था कागजी प्रक्रिया को खत्म करेगी। प्रो. सैनी का मानना है कि इससे शैक्षणिक गुणवत्ता और जवाबदेही दोनों में सुधार आएगा। 
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इसी तरह परीक्षा के दौरान शिक्षकों की ड्यूटी लगाने, मूल्यांकन और रिजल्ट की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने में भी तकनीक का सहारा लिया जाएगा। विश्वविद्यालय ने संबद्ध राजकीय और अनुदानित कॉलेजों को बिना शुल्क केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया में शामिल करने का निर्णय लिया है। इससे सरकारी कॉलेजों की खाली सीटें भर सकेंगी और विद्यार्थियों को अधिक विकल्प मिलेंगे। इसी तरह बालिका महाविद्यालयों के दाखिलों की स्थिति सुधारने के लिए उठाए जा सकने लायक कदमों का परीक्षण किया जा रहा है।

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मुख्यमंत्री से करेंगे ग्रांट जारी करने का अनुरोध

कुलपति ने कहा कि राज्य विश्वविद्यालय होने के बावजूद लविवि को सिर्फ सालाना 35 करोड़ रुपये का ही तय अनुदान मिलता है। यह स्थिति पिछले 30 साल से अनुदान फ्रीज होने के बाद से बनी हुई है। इसकी वजह से खर्च निकालना मुश्किल होता जा रहा है। प्रो. सैनी के मुताबिक वह खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में मुलाकात करेंगे। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस समस्या को जरूर समझेंगे।

ई-ऑफिस से पारदर्शी और पेपरलेस व्यवस्था

प्रो. सैनी ने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली लागू करके सभी फाइलें, आदेश और पत्राचार ऑनलाइन किए जा रहे हैं। पुराने अभिलेखों की स्कैनिंग व कोडिंग कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि रिकॉर्ड सुरक्षित और व्यवस्थित रहेगा। कागज, स्टेशनरी व अन्य संसाधनों पर होने वाला सालाना करोड़ों रुपये का खर्च भी बचेगा।

वाई-फाई से लैस होगा समूचा कैंपस

लगभग 225 एकड़ में फैले लविवि के दोनों परिसर को चरणबद्ध तरीके से वाई-फाई सुविधा से जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को निर्बाध डिजिटल संसाधनों तक पहुंच मिलेगी। ऑनलाइन अध्ययन, शोध और प्रशासनिक कार्यों को गति मिलेगी।

शोध और मूल्यांकन प्रक्रिया का डिजिटलीकरण

पीएचडी वायवा, थीसिस मूल्यांकन और जेआरएफ से एसआरएफ पदोन्नति की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की तैयारी है। इससे समयबद्धता, पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित होगी। संबद्ध महाविद्यालयों के निरीक्षण भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कर प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा।

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