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Lucknow : विधान परिषद चुनाव में शिक्षक नेताओं का वर्चस्व खत्म कर भाजपा ने बढ़ाई ताकत, कारगर रही रणनीति

Sat, 04 Feb 2023 05:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा सचिन मुद्गल, लखनऊ
सचिन मुद्गल, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 04 Feb 2023 05:34 AM IST
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UP : supremacy of teacher leaders ends in Legislative Council, BJP increased its strength
विधान परिषद - फोटो : amar ujala

विधान परिषद की शिक्षक एवं स्नातक खंड की पांच में से चार सीटें जीतकर भाजपा ने उच्च सदन में शिक्षक दल गैर राजनीतिक और निर्दल समूह के वर्चस्व को खत्म कर अपनी ताकत और बढ़ा ली है। छह साल पहले परिषद में मात्र नौ सदस्यों के साथ सत्तापक्ष में बैठी भाजपा ने धीरे-धीरे न केवल अपनी संख्या को बढ़ायी, बल्कि सपा, बसपा के साथ परिषद चुनाव में शिक्षक एवं स्नातक खंड के क्षत्रप शर्मा गुट के शिक्षक दल (गैर राजनीतिक) और चंदेल गुट के निर्दलीय समूह को इकाई पर समेट दिया है। परिषद में पहले इन्हीं दोनों का दबदबा था। 

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शिक्षक दल गैर राजनीतिक की पूर्व एमएलसी ओमप्रकाश शर्मा और निर्दलीय समूह की कमान राज बहादुर सिंह चंदेल व पूर्व एमएलसी चेतनारायण सिंह के हाथ थी। 2020 के चुनाव में भाजपा ने पुराने और मंझे खिलाड़ी ओमप्रकाश शर्मा, चेत नारायण सिंह और संजय मिश्रा को शिकस्त दी। सहारनपुर-मेरठ मंडल में त्रिकोणीय संघर्ष में हेमसिंह पुंडीर भी चुनाव हार गए। 
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दो तिहाई सीटें भाजपा के कब्जे में 
इस चुनाव के शुक्रवार को आए नतीजों में भाजपा ने झांसी-प्रयागराज सीट शर्मा गुट के अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी से छीन ली। अब सदन में शर्मा गुट से मात्र ध्रुव कुमार त्रिपाठी और चंदेल गुट से राज बहादुर सिंह चंदेल और आकाश अग्रवाल सदस्य हैं। परिषद की 100 में से 6 सीटें खाली हैं। भाजपा ने 76 सीटों के साथ दो तिहाई से अधिक सीटों पर कब्जा जमा लिया है। मनोनीत कोटे की छह सीटों पर मनोनयन के बाद भाजपा के सदस्यों की संख्या 82 हो जाएगी, जबकि, सपा के 9 और बसपा का मात्र एक सदस्य है। देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस की उपस्थिति तक नहीं है।
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सिमटती गई सपा 
परिषद में 2017 में सपा के 60 से अधिक सदस्य थे। सबसे बड़ा झटका उसे विधानसभा चुनाव 2022 से पहले लगा, जब उसके एक दर्जन एमएलसी भाजपा में शामिल हो गए। परिषद की स्थानीय निकाय सीटों पर हुए चुनाव में सपा का सूपड़ा साफ हो गया। 9 सदस्यों के साथ इकाई तक सिमटी सपा नेता प्रतिपक्ष की स्थिति में भी नहीं रह गई है।
 

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