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UP: सरकारी आवास योजनाओं की हकीकत पर होगा अध्ययन, आरएमएलएनएलयू को मिला केंद्रीय प्रोजेक्ट; बनेगी पूरी रिपोर्ट

Tue, 12 May 2026 08:25 PM IST
Akash Dwivedi रविशंकर गुप्ता, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
रविशंकर गुप्ता, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 12 May 2026 08:25 PM IST
सार

केंद्र सरकार की आवास योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए एक बड़े अध्ययन की जिम्मेदारी Dr. Ram Manohar Lohiya National Law University को सौंपी गई है। इस परियोजना के तहत लाभार्थियों की समस्याओं, रेरा कानून और किफायती आवास योजनाओं का अध्ययन कर सरकार को विस्तृत रिपोर्ट दी जाएगी, जिससे योजनाओं को और प्रभावी बनाया जा सके।

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UP: Study to be Conducted on the Ground Reality of Government Housing Schemes; RMLNLU Awarded Central Project;
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

केंद्र सरकार की आवासीय योजनाओं को आमजन के लिए अधिक सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में अब जमीनी स्तर पर अध्ययन किया जाएगा। केंद्र सरकार के आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने यह जिम्मेदारी डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (आरएमएलएनएलयू) को सौंपी है। अध्ययन का उद्देश्य लाभार्थियों की समस्याओं की पहचान कर योजनाओं को अधिक सुगम बनाना और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को मजबूती देना है।

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विश्वविद्यालय की टीम सरकारी आवास योजनाओं की वास्तविक स्थिति, लाभार्थियों को आने वाली दिक्कतों और भविष्य में जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करेगी। 
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विधि विवि के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर मनीष सिंह ने बताया कि दिल्ली में हुए समझौते के तहत रियल एस्टेट कानूनों, रेरा के फैसलों और किफायती आवास योजनाओं पर शोध किया जाएगा।  टीम सीधे लाभार्थियों से संपर्क कर फीडबैक जुटाएगी और उसके आधार पर मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
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वहीं, कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने बताया कि यह अध्ययन देश के किफायती आवास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगा और विकसित भारत 2047 के मंत्रालय के विजन को समर्थन देगा। विश्वविद्यालय के लिए यह गर्व की बात है कि इतने बड़े मंत्रालय ने हम पर भरोसा जताया है।

 

UP: Study to be Conducted on the Ground Reality of Government Housing Schemes; RMLNLU Awarded Central Project;
कुलपति प्रोफ़ेसर अमर पाल सिंह व विधि विवि के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर मनीष सिंह - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

50 लाख रुपये का बजट स्वीकृत

इस परियोजना के लिए एमओएचयूए ने 50 लाख रुपये की मंजूरी दी है। परियोजना के तहत केंद्र, राज्य और शहरी स्थानीय निकायों के कानूनी ढांचे का अध्ययन कर बाधाओं की पहचान की जाएगी। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए क्षेत्र विशेष के मॉडल कानून, उपनियम और अनुबंध भी तैयार किए जाएंगे।

रिपोर्ट के आधार पर तैयार होंगे नए मॉडल

अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार कानूनी और तकनीकी उपकरणों के प्रोटोटाइप विकसित करेगी। इसके जरिए सरकारी अधिकारियों, योजनाकारों और डेवलपर्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही निम्न आय वर्ग के समुदायों और आवास क्षेत्र से जुड़े हितधारकों में कानूनी साक्षरता को बढ़ावा देने की भी योजना है। यह समझौता पीएमएवाई-यू 2.0 की मिशन अवधि तक प्रभावी रहेगा।

उत्तरी राज्यों की चुनौतियों पर रहेगा फोकस

आरएमएलएनएलयू का अध्ययन उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड में भूमि स्वामित्व, किरायेदारी और रेरा क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर केंद्रित होगा। अध्ययन का उद्देश्य मुकदमेबाजी कम करना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना भी है।

योजनाओं के लिए विकसित होंगे मॉडल उपकरण

परियोजना के तहत राज्य कानूनों, किरायेदारी, शहरी नियोजन और रेरा से जुड़े विषयों पर गहन शोध किया जाएगा। इसके साथ सरलीकृत अनुबंध और राज्य उपनियमों के टेम्पलेट जैसे मॉडल उपकरण भी विकसित किए जाएंगे।

 

सरकार की प्रमुख आवास योजनाएं

  • प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण : ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे घरों में रहने वाले परिवारों को पक्का मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 : शहरी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की योजना।

योजनाओं के प्रमुख बिंदु

  • झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में पक्के मकानों का निर्माण।
  • सरकारी और निजी क्षेत्र की साझेदारी से सस्ते आवास।
  • ब्याज सब्सिडी के जरिए होम लोन पर राहत।
  • स्वयं की जमीन वाले लाभार्थियों को निर्माण सहायता।

आवेदन की प्रक्रिया

योजनाओं के लिए आवेदन नजदीकी जन सेवा केंद्र या आधिकारिक वेबसाइट pmaymis.gov.in (शहरी) और pmayg.nic.in (ग्रामीण) के माध्यम से किया जा सकता है।

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