फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Small cities will get relief from water crisis, plants will be set up in these cities to make dirty water

यूपी: छोटे शहरों को मिलेगी जलसंकट से निजात, इन शहरों में गंदे पानी को पीने लायक बनाने के लिए लगेंगे प्लांट

Sun, 08 Oct 2023 09:25 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 08 Oct 2023 09:25 AM IST
सार

पिछले दिनों मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की अध्यक्षता में हुई कमेटी ऑफ सेक्रेटरीज की बैठक में सिटी सेनिटेशन प्लान समेत कई परियोजनाओं के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी।

विज्ञापन
UP: Small cities will get relief from water crisis, plants will be set up in these cities to make dirty water
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छोटे शहरों में जल संकट को देखते हुए प्रयोग के बाद बेकार हो चुके जल को दोबारा प्रयोग में लाया जाएगा। इसके लिए नगर विकास विभाग सिटी सेनिटेशन प्लान लागू करने जा रहा है। पहले चरण में एक लाख से कम आबादी वाले 113 नगर निकायों में यह प्लान लागू होगा। इसके तहत इन शहरों में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। साथ ही गोरखपुर में बायो सीएनजी परियोजना लगाने और लखनऊ समेत 15 निकायों में लिगेसी वेस्ट के निस्तारण की कार्यवाही को भी तेजी पूरा करने का फैसला किया गया है। 

विज्ञापन


पिछले दिनों मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की अध्यक्षता में हुई कमेटी ऑफ सेक्रेटरीज की बैठक में सिटी सेनिटेशन प्लान समेत कई परियोजनाओं के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। इसके आधार पर अब कार्रवाई शुरू करने को लेकर नगर विकास विभाग द्वारा कार्ययोजना तैयार कर काम शुरू किया जा रहा है। बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत शहरों में जल संकट की समस्या के निदान के लिए सिटी सेनिटेशन प्लान को मंजूरी दी गई है। इसके तहत प्रदूषित या गंदे जल का भी ट्रीटमेंट करके उसे दोबारा प्रयोग लायक बनाया जाएगा। 
विज्ञापन


शासन ने जल निगम (शहरी) को ऐसे 113 निकायों को चिह्नित करने को कहा है, जहां पर जल संकट की संभावना अधिक है। प्लान के मुताबिक चिह्नित शहरों में एसटीपी कम एफएसटीपी लगाए जाएंगे। इसके लिए शासन ने 2916.66 करोड़ रुपये भी मंजूर कर दिया है। इस प्लान पर जल्द कार्यवाही शुरू करने को कहा गया है। इसके अलावा गोरखपुर नगर निगम को भी 200 टीपीडी क्षमता के बायो-सीएनजी परियोजना पर जल्द काम शुरू करने को कहा गया है। प्रस्ताव के मुताबिक इस परियोजना के जरिए 73,000 मिट्रिक टन प्रतिवर्ष ठोस कचरे (एमएसडब्ल्यू) को लैंडफिल में जाने से रोका जा सकेगा। निकाय पर कोई वित्तीय बोझ नहीं होगा, क्योंकि पीपीपी मोड पर डेवलपर द्वारा परियोजना की पूरी अवधि के लिए 'ऑपरेशन एंड मेंन्टिनेंस' (ओ एंड एम) खर्च सहित 100 प्रतिशत पूंजी निवेश किया जाएगा । इन परियोजनाओं के क्रियान्वन से जिले के चारों निकायों को 56 लाख रुपये की सालाना आमदनी रॉयल्टी के रुप में प्राप्त होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी होगा फायदा
ठोस कचरे के जैविक अंश पर आधारित जैव सीएनजी की इस परियोजना के जरिए सालाना 50,000 हजार टन कार्बन डाइ ऑक्साइड एवं अन्य ग्रीन हाउस गैसेस को कम किया जा सकेगा और 6,800 किलोग्राम सीएनजी का उत्पादन होगा । इस सीएनजी का प्रयोग इंडस्ट्रियल, कमर्शियल एवं वाहनों के लिए ईंधन के रूप में किया जाएगा।


15 निकायों में लिगेसी वेस्ट का निस्तारण
शासन स्तर पर लखनऊ समेत 15 शहरों में 41.944 लाख टन वर्षों से एकत्र पुराने कूड़ा (लीगेसी वेस्ट) के निस्तारण की कार्ययोजना के लिए भी 191.96 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इन शहरों में मलिहाबाद, गोंडा, अकबरपुर, लखीमपुर, हरदोई, प्रयागराज, मेरठ, बरेली, मथुरा-वृंदावन, मुरादगनर, गंगागाट, फर्रूखाबाद, चंदौसी, सिंकंदराबाद शामिल हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed