यूपी: वाल्मीकि सियासत में जगह बनाने में जुटीं रोहिणी घावरी, चन्द्रशेखर के लिए किस तरह से बन रहीं हैं चुनौती
Rohini Ghavri: रोहिणी की सक्रियता को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी की दलित राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
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स्विट्जरलैंड से लौटने के बाद डॉ. रोहिणी घावरी ने यूपी में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। उनका फोकस वाल्मीकि समाज के बीच शिक्षा और राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर है। पिछले तीन दिनों में मेरठ से लखनऊ तक समाज के लोगों के साथ बैठकें करने के बाद बुधवार को वह लवकुश नगर स्थित श्रीमती मुन्नी देवी वाल्मीकि स्मारक विद्यालय पहुंचीं। यहां बच्चों से संवाद करते हुए उन्होंने शिक्षा को समाज की तरक्की का आधार बताया।
रोहिणी की सक्रियता को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी की दलित राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। 15 सितंबर को लखनऊ में करणी सेना के कार्यक्रम में उन्हें झांसी की रानी की उपाधि देकर तलवार भेंट की गई थी। इसके बाद उन्होंने करणी सेना अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू के साथ कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर से मुलाकात की। इस दौरान आरक्षण में वर्गीकरण के मुद्दे पर चर्चा हुई।
रोहिणी कह चुकी हैं कि वह खुद चुनाव लड़ने के बजाय वाल्मीकि समाज के लोगों को चुनाव लड़ाने के लिए काम करेंगी। उनका कहना है कि जो दल आरक्षण में वर्गीकरण लागू करने के साथ समाज को टिकट और संगठन में हिस्सेदारी देगा, वह उसके साथ जाएंगी।
क्या चंद्रशेखर के लिए चुनौती बनेंगी रोहिणी
उनकी सक्रियता नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के प्रभाव क्षेत्र में भी देखी जा रही है। रोहिणी पहले उनके संपर्क में रही हैं। बाद में दोनों के बीच विवाद हुआ और उन्होंने चंद्रशेखर पर गंभीर आरोप लगाए। चंद्रशेखर का पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता चुका है। रोहिणी पश्चिमी यूपी समेत करीब 21 सीटों पर वाल्मीकि समाज के बीच सक्रियता बढ़ाने की बात कह रही हैं। आगरा, मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ़ और कानपुर की कुछ सीटें उनके फोकस में बताई जा रही हैं।
चंद्रशेखर गोंडा जाएंगे, पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर ने 17 सितंबर को गोंडा जाने की घोषणा की। वह बाराबंकी के रास्ते हिंसा प्रभावित कार्यकर्ताओं व उनके परिवार से मिलेंगे। वह बाराबंकी पुलिस से अब तक की कार्रवाई रिपोर्ट भी लेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं पर हमला बर्दाश्त नहीं होगा। बाराबंकी में कार्यकर्ताओं पर हुई हिंसा पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। कई वीडियो सामने आने के बावजूद केस दर्ज नहीं हुआ। चंद्रशेखर ने पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की। उन्होंने बाहरी दबाव से पुलिस कार्रवाई प्रभावित होने की आशंका जताई। चंद्रशेखर पहले भी गोंडा जाकर हिंसा प्रभावित परिवारों से मिल चुके हैं। उनके दोबारा गोंडा जाने से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।