फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Risk of obesity in children due to mothers having jobs; shocking truth revealed in KGMU study.

यूपी: मां के नौकरीपेशा होने से बच्चों में मोटापे का खतरा, केजीएमयू के अध्ययन में सामने आया चौकाने वाला सच

Sat, 03 Oct 2026 10:43 AM IST
Akash Dwivedi सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 03 Oct 2026 10:43 AM IST
सार

केजीएमयू और लोहिया संस्थान के अध्ययन में 502 किशोरों के स्वास्थ्य का विश्लेषण किया गया। अध्ययन के अनुसार नौकरीपेशा माताओं के बच्चों में मोटापे की दर 21.3 फीसदी रही, जबकि गृहिणियों के बच्चों में 8.9 फीसदी थी। विशेषज्ञों ने फास्टफूड सेवन और खानपान की निगरानी को संभावित कारण बताया।

विज्ञापन
UP: Risk of obesity in children due to mothers having jobs; shocking truth revealed in KGMU study.
बच्चों में मोटापे के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

मां के नौकरीपेशा होने का असर बच्चों के वजन पर भी दिखाई दे रहा है। केजीएमयू और लोहिया संस्थान के साझा अध्ययन में इन महिलाओं के बच्चों में मोटापे की दर 21.3 फीसदी मिली है। गृहिणियों के बच्चों में यह दर 8.9 फीसदी ही रही। यह अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एडोलसेंट के सितंबर के अंक में प्रकाशित हुआ है।

विज्ञापन


अध्ययन में लखनऊ के 502 स्कूल जाने वाले किशोरों को शामिल किया गया। इनकी उम्र 10 से 19 वर्ष थी। सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के साथ शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अध्ययन में शामिल किया गया। इसमें सिर्फ मोटापे में ही नहीं बल्कि अधिक वजन की दर में भी बड़ा अंतर सामने आया।
विज्ञापन


कुशल और उससे ऊपर के पेशे में काम करने वाली माताओं के 23.4 फीसदी बच्चे अधिक वजन से प्रभावित मिले। अर्धकुशल-अकुशल पेशे वाली माताओं के बच्चों में यह 15.4 और बेरोजगार माताओं के बच्चों में 14.2 फीसदी था। डॉ. अजीत कुमार सिंह, डॉ. रितिका चतुर्वेदी, डॉ. रीमा कुमारी, डॉ. सौरभ कश्यप और डॉ. अभिषेक सिंह ने यह अध्ययन किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


 

पिता के पेशे से नहीं पड़ा अंतर

माताओं की नौकरी का किशोरों के वजन से सीधा संबंध है। हालांकि, पिता के मामले में ऐसा नहीं है। जो पुरुष कुशल या फिर उच्च पेशे में काम कर रहे थे उनके बच्चों में 17.4 फीसदी मामले ज्यादा वजन और 10.7 फीसदी मोटापे के मिले। अर्धकुशल-अकुशल समूह वाले पुरुषों के बच्चों में मोटापे और ज्यादा वजन के मामले 10.1 फीसदी थे। बेरोजगार पुरुषों के बच्चों में 12.5 फीसदी मामले मोटापे के थे।

 

मां की नौकरी ऐसे करती है प्रभावित

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष उपाध्याय के अनुसार किशोरों में मोटापे के पीछे सबसे बड़ी वजह फास्टफूड का ज्यादा सेवन है। ज्यादातर पुरुष काम पर चले जाते हैं और घर में मां बच्चों के खानपान की निगरानी कर लेती हैं। महिला के भी काम पर जाने पर निगरानी कमजोर होती है और बच्चे ज्यादा फास्टफूड खा लेते हैं।

 

बेटियों में मोटापा ज्यादा

अध्ययन के अनुसार बालिकाओं में मोटापा ज्यादा है। बेटियों के मामलों में 15.7 फीसदी में अधिक वजन और 11.6 फीसदी में मोटापा मिला। बालकों के मामले में अधिक वजन का प्रतिशत 14.5 और मोटापे का 9.4 फीसदी रहा। गांव के मुकाबले शहरों में भी मोटापा ज्यादा मिला।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed