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यूपी : भाजपा व सपा के घोषणा पत्रों में आरक्षण का मुद्दा न होने से आरक्षण समर्थक नाराज
Tue, 08 Feb 2022 10:04 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 08 Feb 2022 10:04 PM IST
सार
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि जल्द ही कोर ग्रुप की बैठक बुलाकर चुनाव में दोनों दलों के बारे में फैसला लेगी।
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आरक्षण
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विस्तार
भाजपा और सपा द्वारा मंगलवार को जारी चुनावी घोषणा पत्र में पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में कोई घोषणा न किए जाने पर आरक्षण समर्थकों ने कड़ी नाराजगी जताई है। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि जल्द ही कोर ग्रुप की बैठक बुलाकर चुनाव में दोनों दलों के बारे में फैसला लेगी।
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संघर्ष समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि दोनों दलों ने अपने-अपने घोषणा पत्रों में इस मुद्दे पर कोई वादा न करके आरक्षण समर्थकों के हितों को नजरअंदाज किया है। दोनों दलों के घोषणा पत्रों मे न दो पदोन्नति में आरक्षण बिल को संसद में पारित कराने के बारे में कुछ कहा गया है और न ही रिवर्ट किए गए दलित कर्मियों को पुन: पदोन्नति वाले पद पर तैनात करने के संबंध में ही कोई उल्लेख किया गया है। इससे साफ हो गया है कि भाजपा और सपा दलित व पिछड़ों का वोट तो लेना चाहते हैं, लेकिन इनको संवैधानिक अधिकार नहीं देना चाहते हैं।
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उन्होंने कहा कि इससे पहले पदोन्नति में आरक्षण को समाप्त करने के मुद्दे पर सपा ने इस मुद्दे को उस समय अपने घोषणा पत्र में शामिल किया था, लेकिन इस बार चुप्पी साधना इस बात का प्रमाण है कि सपा भी दलित और पिछड़ों के अधिकारों को नहीं देना चाहती है। संघर्ष समिति के सभी संयोजको ने 8 लाख दलित कार्मिकों से अपील किया है कि इस बार केचुनाव में आरक्षण समर्थक दल को ही अपना समर्थन दें और अपने परिवार को भी इसके लिए जागरूक करें।
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