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यूपी : मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षकों को भरे गए पद, 70 वर्ष तक कार्य कर सकेंगे मेडिकल कॉलेजों के शिक्षक

Sun, 31 Oct 2021 11:03 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sun, 31 Oct 2021 11:03 PM IST
सार

इसके तहत एक तरफ चिकित्सा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति उम्र 65 से बढाकर 70 साल कर दी गई है तो दूसरी तरफ बॉड के तहत सुपर स्पेशियलिटी की डिग्री लेने वालों को दो साल तक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात किया है।

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UP: Posts filled to medical teachers in medical colleges, teachers of medical colleges will be able to work for 70 years
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों एवं संस्थानों में चिकित्सा शिक्षक की कमी दूर करने के लिए सरकार ने नई रणनीति अपनाई है। इसके तहत एक तरफ चिकित्सा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति उम्र 65 से बढाकर 70 साल कर दी गई है तो दूसरी तरफ बॉड के तहत सुपर स्पेशियलिटी की डिग्री लेने वालों को दो साल तक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात किया है। इससे कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी की सेवाओं का विस्तार होगा। मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।

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प्रदेश में लगातार नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। पुराने चिकित्सा संस्थानों में नए विभाग शुरू हो रहे हैं। ऐसे में चिकित्सा शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए लगातार नई-नई रणनीति अपनाई जा रही है। करीब दो माह पहले इस कमी को दूर करने के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा बढाकर 70 साल करने का प्रस्ताव दिया गया था। चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है। ऐसे में 65 साल की उम्र पूरी करने पर उन्हें दोबारा से नियुक्ति दी जाएगी। वे 70 साल तक शिक्षण कार्य कर सकेंगे। भुगतान के लिए दो व्यवस्था दी गई है।
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राजकीय मेडिकल कालेज गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर, झांसी, मेरठ, आगरा के अलावा केजीएमयू डा. राम मनोहर लोहिया संस्थान, उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में पुर्ननियुक्त वालों को अंतिम वेतन आहरण में से पेंशन घटाते हुए भुगतान किया जाएगा, लेकिन राजकीय मेडिकल कालेज आजमगढ़, अंबेडकर नगर, बांदा, बदायूं, जालौन, कन्नौज, सहारनपुर एवं राज्य के सभी स्वशासी राज्य चिकित्सा विश्वविद्यलायों में तैनात होने वालों को दो लाख 20 हजार रुपया नियत पारिश्रमिक दिया जाएगा।
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तैयार किए जा सकेंगे नए डॉक्टर
प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। नए मेडिकल कॉलेजों में संकाय सदस्यों की नियुक्ति में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। नए खुलने वाले मेडिकल कॉलेजोें में पहले साल के लिए कम से कम 51 संकाय सदस्य का होना अनिवार्य किया गया है। ऐेस में सेवानिवृत्त की उम्र 70 साल किए जाने से डॉक्टरों की कमी दूर होगी। सेवानिवृत्त होने वाले और नए डॉक्टरों को मिलाकर मेडिकल कॉलेजों में संकाय सदस्यों के मानक को पूरा किया जा सकेगा। ऐसे में नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से लगाई जाने वाली आपत्ति से बच सकेंगे और बीच सत्र में किसी मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर संकट नहीं आएगा।


मेडिकल कॉलेजों को मिले सुपर स्पेशलिस्ट
विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में डीएम व एमसीएच की डिग्री हासिल करने वालों को बॉड के तहत दो साल के लिए किसी न किसी संस्थान में सेवा देना अनिवार्य किया गया है। ऐसे में इन चिकित्सा शिक्षा संस्थानों से निकलने वाले 122 डीएम व एमसीएच डिग्रीधारी सुपर स्पेशलिस्ट को विभिन्न कॉलेजों में संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात किया गया है।

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